BNT Desk: संसद के बजट सत्र के सातवें दिन गुरुवार को लोकसभा में जबरदस्त हंगामा देखने को मिला। विपक्ष के कड़े विरोध और नारेबाजी के बीच राष्ट्रपति के अभिभाषण पर ‘धन्यवाद प्रस्ताव’ को बिना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण के ही पास कर दिया गया। भारतीय संसदीय इतिहास में साल 2004 के बाद यह पहली बार हुआ है जब प्रधानमंत्री सदन में अपनी बात नहीं रख पाए और प्रस्ताव पारित हो गया। विपक्ष की मांग है कि जब तक उनके नेता राहुल गांधी को बोलने की अनुमति नहीं दी जाती, तब तक वे प्रधानमंत्री को भी बोलने नहीं देंगे।
क्यों हुआ हंगामा और क्या है विपक्ष की मांग?
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसद नारेबाजी करने लगे। कांग्रेस सांसद मणिक्कम टैगोर ने साफ तौर पर कहा कि जब तक लोकसभा में विपक्ष के नेता (LoP) राहुल गांधी को अपनी बात रखने की इजाजत नहीं दी जाती, तब तक विपक्ष प्रधानमंत्री को सदन में बोलने नहीं देगा। विपक्ष का आरोप है कि सरकार एक ‘अप्रकाशित किताब’ (Unpublished Book) के मुद्दे पर राहुल गांधी को बोलने से रोक रही है। इसी मुद्दे को लेकर राज्यसभा में भी मल्लिकार्जुन खड़गे और सत्ता पक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई, जिसके बाद विपक्ष ने वहां से वॉकआउट कर दिया।
स्पीकर ने जताई नाराजगी, सदन कल तक के लिए स्थगित
हंगामे को देखते हुए लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने गहरी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने सदन की कार्यवाही को तीन बार स्थगित किया और अंत में इसे शुक्रवार सुबह 11 बजे तक के लिए टाल दिया। स्पीकर ने कहा कि सदन के इतिहास में ऐसा पहले कभी नहीं हुआ कि विपक्ष के सांसद प्रधानमंत्री की सीट के इतने करीब आ जाएं। उन्होंने इसे लोकतंत्र की गरिमा के खिलाफ बताया। स्पीकर ने यह भी खुलासा किया कि उन्होंने सुरक्षा और सदन की मर्यादा को देखते हुए खुद प्रधानमंत्री से सदन में न आने का आग्रह किया था।
सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच जुबानी जंग तेज
इस पूरे विवाद पर राजनीति भी गरमा गई है। बीजेपी नेता जेपी नड्डा और किरेन रिजिजू ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि राहुल गांधी नियमों का पालन नहीं करते। वहीं दूसरी ओर, आरजेडी सांसद मनोज झा और सपा सांसद डिंपल यादव ने विपक्ष का बचाव किया। डिंपल यादव ने कहा कि हर सांसद को सदन में अपनी बात रखने का हक है। इस बीच, कांग्रेस सांसद शशि थरूर भी चर्चा में रहे, जो पैर में चोट के बावजूद व्हीलचेयर पर संसद पहुंचे और विपक्ष की आवाज का समर्थन किया। अब सबकी नजरें कल की कार्यवाही पर टिकी हैं कि क्या सदन शांति से चल पाएगा।