Cyclone Murasu: चक्रवात मुरासु से किसानों की बढ़ी चिंता, भारी बारिश और 120 KM की रफ्तार से हवाएं; धान-कपास समेत इन फसलों पर खतरा

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Cyclone Murasu: Farmers grow anxious as Cyclone Murasu approaches, bringing heavy rain and winds reaching 120 km/h; crops including paddy and cotton are at risk.

BNT Desk : बंगाल की खाड़ी में उठे चक्रवाती तूफान Murasu ने आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में किसानों की चिंता बढ़ा दी है। भारी बारिश और तेज हवाओं के कारण खेतों में खड़ी फसलों को नुकसान पहुंचने की आशंका है। खासकर धान, कपास, मिर्च और खरीफ की दूसरी फसलें प्रभावित हो सकती हैं। वहीं, केले, पपीते और नारियल जैसे बागवानी पौधों को भी तेज हवाओं से नुकसान पहुंचने का खतरा है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के 2 नवंबर के बुलेटिन के मुताबिक, तूफान के प्रभाव से तटीय क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है।

 

120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकते हैं हवा के झोंके

IMD के पूर्वानुमान के अनुसार, चक्रवात मुरासु के दक्षिण आंध्र प्रदेश के तट से गुजरने के दौरान 100 से 110 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चल सकती हैं। वहीं, हवा के झोंकों की गति 120 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंचने का अनुमान है।इसके साथ ही तटीय इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश और कुछ स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश की आशंका जताई गई है। तेज हवाओं और जलभराव का सबसे अधिक असर उन खेतों पर पड़ सकता है, जहां फसलें पकने या कटाई के चरण में हैं।

 

धान की फसल पर सबसे ज्यादा असर पड़ने की आशंका

आंध्र प्रदेश के तटीय जिलों में धान की खेती बड़े पैमाने पर होती है। ऐसे में चक्रवात के कारण होने वाली भारी बारिश किसानों के लिए परेशानी बढ़ा सकती है। खेतों में पानी भरने से धान की फसल लंबे समय तक जलमग्न रह सकती है। इससे पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंचने और तेज हवाओं के कारण फसल गिरने का खतरा है।जिन किसानों की धान की फसल पक चुकी है या कटाई के लिए तैयार है, उन्हें भी नुकसान हो सकता है। बारिश के कारण कटाई का काम रुक सकता है। वहीं, खेतों में कटी हुई फसल पड़ी रहने पर उसके भीगने और अनाज की गुणवत्ता खराब होने की आशंका है। इससे भंडारण के दौरान भी किसानों को परेशानी हो सकती है।

 

कपास और मिर्च की खेती करने वाले किसान भी रहें सतर्क

चक्रवात मुरासु का असर धान के अलावा कपास और मिर्च की फसलों पर भी पड़ सकता है। भारी बारिश के कारण खेतों में जलभराव होने से कपास के पौधों की जड़ें प्रभावित हो सकती हैं। वहीं, तेज हवाओं से पौधों के झुकने या टूटने का खतरा है।मिर्च की फसल के लिए भी लगातार बारिश और अधिक नमी नुकसानदायक हो सकती है। खेतों में पानी जमा रहने से पौधों को नुकसान पहुंचने के साथ समय पर फसल की तुड़ाई करना भी मुश्किल हो सकता है।आंध्र प्रदेश के कृषि मंत्री किंजरापु अच्चन्नायडू ने किसानों को धान, कपास, मिर्च और बागवानी फसलों की सुरक्षा के लिए जरूरी एहतियाती कदम उठाने की सलाह दी है।

 

केले और पपीते के पौधों को तेज हवाओं से खतरा

चक्रवात का असर बागवानी फसलों पर भी देखने को मिल सकता है। केले और पपीते के पौधों की संरचना अपेक्षाकृत कमजोर होती है, इसलिए तेज हवाओं में इनके गिरने या टूटने की आशंका रहती है।इसके अलावा फलदार पेड़ों की शाखाएं टूट सकती हैं और पेड़ों पर लगे फल झड़ सकते हैं। नारियल और ताड़ के पेड़ों को भी तेज हवाओं से नुकसान पहुंचने का खतरा है। ऐसे में बागवानी करने वाले किसानों को अपने खेतों और पौधों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

 

Cyclone Murasu: किसानों को क्या सावधानी बरतने की सलाह?

चक्रवात के खतरे को देखते हुए कृषि मंत्री ने किसानों से खेतों में जलनिकासी की व्यवस्था दुरुस्त रखने और नालियों की सफाई करने की अपील की है। इससे बारिश का पानी खेतों में लंबे समय तक जमा होने से रोका जा सकता है।

किसानों को ये सावधानियां बरतने की सलाह दी गई है:

  • कटाई के बाद रखी गई फसल और अनाज को सुरक्षित तथा सूखी जगह पर रखें।
  • खेतों में पानी की निकासी के लिए नालियों को साफ रखें।
  • मौसम सामान्य होने तक कटाई और फसल की तुड़ाई जैसे काम सावधानी से करें।
  • तेज बारिश और हवा के दौरान कीटनाशकों का छिड़काव और खाद डालने से बचें।
  • बिजली गिरने और तेज हवाओं के दौरान खेतों में जाने से बचें।
  • पशुओं को सुरक्षित स्थान पर रखें।

कृषि और बागवानी विभाग के अधिकारियों को भी गांवों में किसानों तक मौसम संबंधी जानकारी और जरूरी तकनीकी सलाह पहुंचाने के निर्देश दिए गए हैं।

 

किसानों के लिए अगले कुछ दिन अहम

चक्रवात मुरासु के प्रभाव से आंध्र प्रदेश के तटीय इलाकों में अगले कुछ दिन किसानों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। खासकर जिन किसानों की फसल कटाई के लिए तैयार है, उन्हें मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखनी होगी। किसानों को IMD और स्थानीय प्रशासन की चेतावनियों का पालन करने तथा कृषि विभाग की सलाह के अनुसार ही काम करने की जरूरत है।

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