नालंदा: शराब तस्करों की फायरिंग में उत्पाद विभाग के सिपाही अजीत कुमार की मौत, PMCH में तोड़ा दम

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BNT Desk: बिहार के नालंदा जिले में शराब तस्करों के खिलाफ कार्रवाई करने पहुंची उत्पाद विभाग की टीम पर बदमाशों ने फायरिंग कर दी। इस घटना में गोली लगने से सिपाही अजीत कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए। उन्हें पहले पावापुरी के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से बेहतर इलाज के लिए पटना के PMCH रेफर किया गया। हालांकि, इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना बुधवार रात पावापुरी-सिलाव इलाके में हाईवे पर फ्लाईओवर के पास हुई। वारदात के बाद शराब तस्कर और उनके लिए रेकी करने वाला कथित लाइनर फरार हो गए। घटना के बाद उत्पाद विभाग और पुलिस महकमे में शोक के साथ आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई है।

 

गुप्त सूचना पर शराब की खेप पकड़ने पहुंची थी टीम

जानकारी के अनुसार, उत्पाद विभाग की टीम को शराब की बड़ी खेप नालंदा जिले में लाए जाने की सूचना मिली थी। उत्पाद अधीक्षक संजय कुमार चौधरी ने घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि पटना मुख्यालय की एक्साइज इंटेलिजेंस ब्यूरो (EIB) को सूचना मिली थी कि एक पिकअप वैन से शराब की खेप जिले में पहुंचाई जा रही है।

सूचना के मुताबिक, संदिग्ध वाहन खराट मोड़ के रास्ते आगे बढ़ रहा था। इसके बाद पटना से आई ईआईबी की विशेष टीम ने राजगीर उत्पाद विभाग के सब-इंस्पेक्टर और स्थानीय टीम के साथ मिलकर कार्रवाई की योजना बनाई। शराब की खेप को पकड़ने के लिए संभावित रास्तों पर घेराबंदी शुरू की गई।

टीम का उद्देश्य संदिग्ध पिकअप को रोककर उसकी तलाशी लेना और शराब की खेप बरामद करना था। इसी कार्रवाई के दौरान पावापुरी-सिलाव इलाके में हाईवे पर फ्लाईओवर के पास फायरिंग की घटना हो गई।

 

पिकअप रोकने के दौरान टीम पर हुई फायरिंग

बताया जा रहा है कि उत्पाद विभाग की टीम ने हाईवे पर फ्लाईओवर के समीप शराब लदी पिकअप को रोकने और घेरने की कोशिश की। इसी दौरान शराब तस्करों के लिए रेकी करने वाले कथित लाइनर ने टीम पर गोली चला दी।

गोली सिपाही अजीत कुमार को लगी। वह गंभीर रूप से घायल होकर गिर पड़े। अचानक हुई फायरिंग से मौके पर अफरा-तफरी मच गई। टीम के अन्य सदस्यों के लिए भी स्थिति चुनौतीपूर्ण हो गई।

इसी बीच पिकअप में सवार कथित शराब तस्कर और उनके लिए रेकी करने वाला व्यक्ति मौके से फरार हो गए। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, हमले के बाद आरोपी शराब लदी गाड़ी के साथ भाग निकले। हालांकि, पिकअप में शराब की मात्रा कितनी थी और फरार आरोपियों की पहचान क्या है, इस बारे में विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आना बाकी है।

 

पावापुरी से PMCH रेफर, इलाज के दौरान मौत

गोली लगने के बाद घायल सिपाही अजीत कुमार को उनके साथियों ने तुरंत पावापुरी स्थित भगवान महावीर आयुर्विज्ञान संस्थान पहुंचाया। वहां डॉक्टरों ने उनका प्राथमिक उपचार किया। उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए पटना के पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (PMCH) रेफर कर दिया गया।

अजीत कुमार को बचाने की कोशिश की गई, लेकिन इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। घटना की खबर मिलने के बाद उत्पाद विभाग और पुलिसकर्मियों के बीच शोक का माहौल है।

जानकारी के अनुसार, सिपाही के शव का पोस्टमार्टम पटना में कराया जा रहा है। हालांकि, उनके गृह जिले, परिवार और सेवा से जुड़ी अन्य जानकारी के बारे में फिलहाल विस्तृत विवरण सामने नहीं आया है।

 

विशेष EIB टीम के नेतृत्व में हुई थी कार्रवाई

उत्पाद थानाध्यक्ष नीतीश कुमार के मुताबिक, यह संयुक्त कार्रवाई पटना से आई विशेष ईआईबी टीम के नेतृत्व में की जा रही थी। कार्रवाई में राजगीर उत्पाद विभाग और स्थानीय टीम भी शामिल थी।

गुप्त सूचना के आधार पर संदिग्ध वाहन को रोकने की योजना बनाई गई थी, लेकिन इस दौरान टीम को गोलीबारी का सामना करना पड़ा। घटना के बाद अब जांच का मुख्य फोकस फरार आरोपियों की पहचान, गिरफ्तारी और शराब की खेप बरामद करने पर है।

इस वारदात ने शराब तस्करी के खिलाफ अभियान के दौरान सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, घटना की पूरी परिस्थितियों और हमले में शामिल लोगों की भूमिका की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

 

आरोपियों की तलाश में छापेमारी और नाकेबंदी

घटना के बाद उत्पाद विभाग और स्थानीय जिला पुलिस की टीमें आरोपियों की तलाश में जुट गई हैं। संभावित ठिकानों पर छापेमारी की जा रही है। वहीं, हाईवे और आसपास के रास्तों पर नाकेबंदी कर तलाशी अभियान चलाए जाने की जानकारी है।

फिलहाल पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती फरार शराब तस्करों और कथित लाइनर को गिरफ्तार करना है। इसके साथ ही शराब लदी पिकअप को बरामद करने की कोशिश की जा रही है। जांच टीम घटना के क्रम और आरोपियों के भागने के रास्ते से जुड़े तथ्यों की पड़ताल कर रही है।

नालंदा में हुई इस घटना में उत्पाद विभाग के एक सिपाही की जान चली गई है। अब देखना होगा कि जांच के दौरान आरोपियों के बारे में क्या जानकारी सामने आती है और पुलिस उन्हें कब तक गिरफ्तार कर पाती है।

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