BNT Desk: नई दिल्ली में बुधवार को INDIA ब्लॉक के नेताओं की अहम बैठक हुई। बैठक का केंद्र चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्ष की आपत्तियां रहीं। करीब तीन घंटे तक चली बैठक में विपक्षी दलों ने आगे की रणनीति पर चर्चा की और चुनावी प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को लेकर संयुक्त आंदोलन का कार्यक्रम तय किया। बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर विपक्ष की ओर से तय कार्यक्रमों की जानकारी दी।
कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में हुई बैठक
INDIA ब्लॉक की यह बैठक दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में आयोजित की गई। बैठक में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, वाम दलों, समाजवादी पार्टी, एनसीपी-एसपी, शिवसेना यूबीटी, आरजेडी और झारखंड मुक्ति मोर्चा समेत कई विपक्षी दलों के नेता शामिल हुए। अलग-अलग दलों के कुछ नेता बैठक में वर्चुअली भी जुड़े। उद्धव ठाकरे और हेमंत सोरेन के वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक में शामिल होने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, सभी विपक्षी दल इस बैठक में शामिल नहीं हुए। आम आदमी पार्टी और डीएमके ने बैठक से दूरी बनाई, जबकि समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव की जगह प्रतिनिधि के शामिल होने की जानकारी सामने आई थी।
SIR और चुनाव आयोग को लेकर विपक्ष की रणनीति
बैठक में मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्षी दलों की चिंताओं पर चर्चा हुई। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव की प्रक्रिया में पारदर्शिता की कमी है और इससे वास्तविक मतदाताओं के नाम प्रभावित हो सकते हैं। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से मतदाता सूची में किए गए बदलावों की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने कहा है कि SIR से संबंधित फैसले निर्धारित प्रक्रियाओं के तहत लिए गए हैं और आयोग के भीतर विचार-विमर्श के दौरान मतभेद या टिप्पणियां संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा हैं। आयोग ने यह भी कहा है कि SIR से जुड़े निर्णय सर्वसम्मति से लिए गए।
खड़गे ने चुनाव आयोग पर लगाए आरोप
बैठक के बाद कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर आरोप लगाए। खड़गे ने कहा कि विपक्षी दलों को लगता है कि चुनाव आयोग की स्वतंत्रता और निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े हुए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर भी चुनाव आयोग को प्रभावित करने का आरोप लगाया। ये आरोप खड़गे और विपक्षी दलों के राजनीतिक दावे हैं। खड़गे ने आयोग की तुलना ‘कठपुतली’ से करते हुए कहा कि विपक्ष चुनाव आयोग और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अपनी राजनीतिक और संवैधानिक लड़ाई जारी रखेगा। इससे पहले भी कांग्रेस कार्यसमिति की बैठक में खड़गे ने ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की थी।
2 से 8 अक्टूबर तक ‘लोकतंत्र बचाओ’ कार्यक्रम
INDIA ब्लॉक ने अपने आंदोलन के पहले चरण के तौर पर 2 अक्टूबर से 8 अक्टूबर तक देशभर में ‘लोकतंत्र बचाओ’ कार्यक्रम आयोजित करने का फैसला किया है। इस दौरान जिला स्तर पर मार्च और प्रदर्शन किए जाएंगे। विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं, युवाओं, NGO और सिविल सोसाइटी से जुड़े लोगों को भी इन कार्यक्रमों में शामिल करने की योजना बताई गई है। इसके तहत जिला स्तर पर मार्च निकालने के साथ जिलाधिकारी कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन किए जाने की योजना है। INDIA ब्लॉक का कहना है कि इन कार्यक्रमों के जरिए चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को जनता के बीच उठाया जाएगा।
6 अक्टूबर को चुनाव आयोग तक मार्च
विपक्षी गठबंधन ने 6 अक्टूबर को दिल्ली में चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च निकालने का भी कार्यक्रम तय किया है। इसमें INDIA ब्लॉक से जुड़े विपक्षी सांसदों के शामिल होने की बात कही गई है। इस मार्च के जरिए चुनाव आयोग के सामने SIR और मतदाता सूची से जुड़े विपक्ष के सवालों को उठाया जाएगा। इसके बाद अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में विपक्षी नेता राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात का समय मांगेंगे। विपक्ष की ओर से चुनाव प्रक्रिया और संस्थागत मुद्दों से जुड़ी अपनी चिंताओं को राष्ट्रपति के सामने रखने की योजना है।
1 नवंबर को बड़ी रैली का ऐलान
बैठक के बाद विपक्ष ने आंदोलन के अगले चरण की भी घोषणा की। 1 नवंबर को बड़ी रैली आयोजित करने की बात कही गई है। इसके अलावा आगे पांच बड़ी रैलियां आयोजित करने की योजना पर भी चर्चा हुई है। इन कार्यक्रमों के जरिए विपक्ष चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की तैयारी में है। INDIA ब्लॉक की इस बैठक के बाद विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग को लेकर अपनी साझा रणनीति सामने रख दी है। आने वाले दिनों में जिला स्तर के कार्यक्रमों से लेकर दिल्ली में चुनाव आयोग तक मार्च और नवंबर की बड़ी रैली तक कई चरणों में राजनीतिक गतिविधियां होने वाली हैं। वहीं चुनाव आयोग की ओर से SIR और मतदाता सूची से संबंधित प्रक्रिया को लेकर अपनी स्थिति पहले ही स्पष्ट की जा चुकी है। ऐसे में आने वाले दिनों में विपक्ष और चुनाव आयोग के बीच यह मुद्दा राजनीतिक और सार्वजनिक बहस का प्रमुख विषय बना रह सकता है।