BNT Desk: बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों की पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था लागू करने की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। बैंक यूनियनों ने इस मुद्दे पर सरकार और बैंक प्रबंधन की ओर से अपेक्षित पहल नहीं होने का आरोप लगाते हुए हड़ताल का रास्ता अपनाया है। हड़ताल के बाद शनिवार और रविवार को साप्ताहिक अवकाश होने के कारण बैंक शाखाएं लगातार तीन दिनों तक बंद रहेंगी। हालांकि, इस दौरान डिजिटल बैंकिंग और एटीएम जैसी सेवाएं सामान्य रूप से उपलब्ध रहने की उम्मीद है। शाखाओं में होने वाले आमने-सामने के बैंकिंग कार्य प्रभावित हो सकते हैं।
हड़ताल के बाद तीन दिन बैंक बंद
बैंक कर्मचारियों की हड़ताल शुक्रवार को होने के बाद अगले दो दिन शनिवार और रविवार का साप्ताहिक अवकाश रहेगा। ऐसे में बैंक शाखाओं में लगातार तीन दिनों तक कामकाज प्रभावित रहेगा।
ग्राहकों के लिए राहत की बात यह है कि डिजिटल बैंकिंग सेवाएं और एटीएम जैसी सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी। लोग ऑनलाइन ट्रांजेक्शन, मोबाइल बैंकिंग और अन्य डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल कर सकेंगे। हालांकि, जिन कामों के लिए बैंक शाखा जाना जरूरी है, उनके लिए ग्राहकों को इंतजार करना पड़ सकता है।
यूनियनों का कहना है कि पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था की मांग लंबे समय से लंबित है और सरकार तथा बैंक प्रबंधन की ओर से इस पर अंतिम फैसला नहीं होने के कारण कर्मचारियों में नाराजगी है।
2015 से चली आ रही है पांच दिन बैंकिंग की मांग
बैंक अधिकारियों के संगठन के वरिष्ठ उपाध्यक्ष अमरेश विक्रमादित्य के अनुसार, पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था की मांग नई नहीं है। मई 2015 में भारतीय बैंक संघ यानी आईबीए और बैंक प्रबंधन के बीच हुए समझौते में दूसरे और चौथे शनिवार को अवकाश घोषित किया गया था।
उस समय अन्य शनिवार को भी अवकाश देने की दिशा में आगे प्रयास करने पर सहमति बनी थी। इसके बाद से बैंक कर्मचारी और अधिकारी शेष शनिवार को भी छुट्टी देने की मांग करते रहे हैं।
यूनियनों का कहना है कि बैंकिंग व्यवस्था में दूसरे और चौथे शनिवार की छुट्टी लागू होने के बाद से ही पांच दिन के कार्य सप्ताह की दिशा में आगे बढ़ने की उम्मीद थी, लेकिन अब तक पूरी तरह से पांच दिवसीय व्यवस्था लागू नहीं हो सकी है।
2020 के समझौते में भी मिला था आश्वासन
नवंबर 2020 में हुए समझौते में भी पांच दिवसीय बैंकिंग से जुड़े मुद्दे के समाधान का आश्वासन दिया गया था। इसके बाद मार्च 2024 के वेतन समझौते में शेष शनिवार को अवकाश देने पर सहमति बनी।
यूनियनों के मुताबिक, इसके बदले सोमवार से शुक्रवार तक बैंक कर्मचारियों को प्रतिदिन करीब 40 मिनट अतिरिक्त काम करने की व्यवस्था पर सहमति बनी थी। यानी कर्मचारियों की ओर से शनिवार के कार्यदिवस की भरपाई अतिरिक्त काम के जरिए करने की बात स्वीकार की गई थी।
इसके बावजूद प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी नहीं मिल सकी है। यही वजह है कि बैंक कर्मचारी संगठन अब इस मुद्दे को लेकर आंदोलन के रास्ते पर हैं।
वित्त मंत्रालय की मंजूरी का इंतजार
यूनियन नेताओं के अनुसार, पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था से संबंधित प्रस्ताव को वित्त मंत्रालय की मंजूरी के लिए भेजा गया था। हालांकि, अभी तक इस पर अंतिम निर्णय नहीं हो सका है।
बैंक संगठनों का कहना है कि लंबे समय से बातचीत और समझौते की प्रक्रिया चलने के बावजूद जब इस मांग पर ठोस निर्णय नहीं हुआ, तो कर्मचारियों और अधिकारियों में असंतोष बढ़ना स्वाभाविक है।
यूनियनों का तर्क है कि कर्मचारियों की ओर से सोमवार से शुक्रवार तक अतिरिक्त समय देने पर सहमति पहले ही जताई जा चुकी है। ऐसे में अब शेष शनिवार को अवकाश घोषित करने में किसी तरह की बड़ी समस्या नहीं होनी चाहिए।
RBI और कई संस्थानों में पांच दिन काम
बैंक यूनियनों ने अपनी मांग के समर्थन में दूसरे संस्थानों का उदाहरण भी दिया है। उनका कहना है कि केंद्र और राज्य सरकार के कई कार्यालयों के अलावा भारतीय रिजर्व बैंक, एलआईसी, जीआईसी, नाबार्ड और कई निजी संस्थानों में पांच दिवसीय कार्यप्रणाली लागू है।
यूनियनों का कहना है कि बैंकों में भी सोमवार से शुक्रवार तक कामकाज की व्यवस्था लागू की जा सकती है। उनका तर्क है कि इससे ग्राहकों को मिलने वाली बैंकिंग सेवाओं में जरूरी बदलाव नहीं होगा, क्योंकि अतिरिक्त कार्य समय के जरिए शनिवार के काम की भरपाई की जा सकती है।
बैंक कर्मचारी संगठनों के मुताबिक, पांच दिन की व्यवस्था से कर्मचारियों को बेहतर कार्य-जीवन संतुलन मिल सकता है और बैंकिंग क्षेत्र में काम करने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों को भी अन्य संस्थानों के समान साप्ताहिक अवकाश की सुविधा मिल सकेगी।
26 अक्टूबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल की चेतावनी
पांच दिवसीय बैंकिंग व्यवस्था की मांग पूरी नहीं होने पर यूनियनों ने आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी है। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस यानी यूएफबीयू ने कहा है कि यदि मांगों पर ठोस समाधान नहीं निकला तो 26 अक्टूबर 2026 से अनिश्चितकालीन हड़ताल शुरू की जा सकती है।
इसका मतलब है कि मौजूदा हड़ताल को अंतिम चरण मानने के बजाय बैंकिंग यूनियनें आगे भी बड़े आंदोलन की तैयारी कर रही हैं। अगर सरकार और बैंक प्रबंधन की ओर से इस अवधि में कोई समाधान नहीं निकलता है, तो अक्टूबर में बैंकिंग सेवाओं पर इसका बड़ा असर पड़ सकता है।
फिलहाल बैंक ग्राहकों के लिए जरूरी है कि वे शाखा से जुड़े महत्वपूर्ण काम पहले से निपटा लें और हड़ताल या साप्ताहिक अवकाश के दौरान डिजिटल बैंकिंग और एटीएम जैसी उपलब्ध सेवाओं का इस्तेमाल करें। वहीं, बैंक कर्मचारियों की नजर अब सरकार और वित्त मंत्रालय के अंतिम फैसले पर है।