BNT Desk: पटना के जय प्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट पर विमानों की सुरक्षा के लिए बर्ड हिट यानी पक्षियों के विमान से टकराने की घटनाएं लगातार चिंता का कारण बनी हुई हैं। एयरपोर्ट पर पक्षियों की मौजूदगी और उनके कारण विमानों के संचालन पर पड़ने वाले खतरे को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025 में पटना एयरपोर्ट पर बर्ड हिट के 9 मामले सामने आए थे। इससे पहले 2021 में 2, 2022 में 1 और 2023 में 1 मामला दर्ज किया गया था। बर्ड हिट की घटनाएं खास तौर पर विमान के टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान गंभीर हो सकती हैं। ऐसे में एयरपोर्ट प्रशासन के सामने रनवे और उसके आसपास पक्षियों की गतिविधियों को नियंत्रित करना बड़ी चुनौती बना हुआ है।
2025 में अचानक बढ़े बर्ड हिट के मामले
पटना एयरपोर्ट पर उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार 2021 में पक्षियों के विमान से टकराने की 2 घटनाएं सामने आई थीं। 2022 और 2023 में यह संख्या घटकर एक-एक रह गई। इसके बाद 2025 में बर्ड हिट के मामलों में अचानक बढ़ोतरी दर्ज की गई और कुल 9 घटनाएं सामने आईं। लगातार बढ़ते खतरे को देखते हुए एयरपोर्ट के आसपास पक्षियों को आकर्षित करने वाले कारणों की पहचान और उन्हें दूर करने पर जोर दिया जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि एयरफील्ड के आसपास का वातावरण पक्षियों की संख्या को प्रभावित करता है। यदि यहां भोजन और पानी के स्रोत मौजूद रहें तो पक्षियों की आवाजाही बढ़ सकती है।
गंदगी और खुले कचरे से बढ़ रहा खतरा
एयरपोर्ट के आसपास खुले में पड़ा कचरा बर्ड स्ट्राइक के प्रमुख कारणों में शामिल है। अप्रैल में हुई एयरफील्ड एनवायरमेंट मैनेजमेंट कमेटी (AEMC) की बैठक में भी इस मुद्दे पर विशेष चर्चा हुई थी। बैठक में एयरपोर्ट के आसपास साफ-सफाई बनाए रखने, खुले में कचरा नहीं फेंकने और जलजमाव की समस्या दूर करने पर जोर दिया गया। अधिकारियों के मुताबिक कचरे में मौजूद खाद्य पदार्थ पक्षियों को आकर्षित करते हैं। खासकर चील जैसे बड़े पक्षी एयरपोर्ट के आसपास पहुंचते हैं तो विमानों के लिए खतरा और बढ़ जाता है।
मांस-मछली की दुकानों के अवशेष भी बड़ी वजह
एयरपोर्ट के आसपास मौजूद मांस और मछली की दुकानों से निकलने वाले अवशेष भी पक्षियों को आकर्षित कर रहे हैं। दुकानों से निकलने वाला मांस-मछली का कचरा खुले में फेंके जाने पर चील और दूसरे मांसाहारी पक्षी वहां पहुंच जाते हैं। बैठकों में एयरपोर्ट के आसपास ऐसी दुकानों पर रोक लगाने का निर्णय कई बार लिया जा चुका है। इसके बावजूद फुलवारीशरीफ और आसपास के क्षेत्रों में खुले में मांस-मछली की बिक्री और अवशेषों के निपटारे की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी है। इस वजह से एयरपोर्ट के आसपास पक्षियों के झुंड दिखाई देने की संभावना बनी रहती है। प्रशासन के लिए अब केवल एयरपोर्ट परिसर के अंदर ही नहीं, बल्कि आसपास के इलाकों में भी पर्यावरणीय स्थिति को नियंत्रित करना जरूरी हो गया है।
जलजमाव और गंदगी भी बनी चुनौती
मानसून के दौरान एयरपोर्ट क्षेत्र के आसपास जलजमाव और रनवे के किनारे उगने वाली जंगली घास भी पक्षियों की संख्या बढ़ा सकती है। घास में कीड़े-मकौड़े पनपते हैं और इन्हें खाने के लिए पक्षी एयरफील्ड की ओर आकर्षित होते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार रनवे के आसपास घास की नियमित कटाई और जलजमाव को खत्म करना जरूरी है। पानी जमा रहने से कीड़े-मकौड़ों की संख्या बढ़ सकती है, जिससे पक्षियों को एयरपोर्ट क्षेत्र में भोजन मिल जाता है।
बर्ड चेजर्स और स्केयर गन्स से रोकथाम
बर्ड हिट की घटनाओं को रोकने के लिए एयरपोर्ट पर बर्ड चेजर्स की तैनाती की गई है। इनका काम रनवे और ऑपरेशनल एरिया के आसपास मौजूद पक्षियों को दूर रखना है। पक्षियों को भगाने के लिए फायर क्रैकर्स, स्केयर गन्स और शॉट लॉन्चर्स जैसे उपकरणों का इस्तेमाल किया जाता है। विमानों के टेकऑफ और लैंडिंग के समय विशेष रूप से निगरानी बढ़ा दी जाती है। इस दौरान बर्ड चेजर्स को सक्रिय रखा जाता है ताकि पक्षी रनवे के आसपास न आ सकें। हालांकि केवल एयरपोर्ट परिसर के अंदर पक्षियों को भगाना पर्याप्त नहीं माना जा रहा है। आसपास के क्षेत्रों में मौजूद कचरा, जलजमाव और खाद्य अवशेषों को हटाना भी जरूरी है।
गार्बेज ट्रांसफर स्टेशन भी चिंता का कारण
गर्दनीबाग स्थित गार्बेज ट्रांसफर स्टेशन को स्थानांतरित करने की योजना पर भी लंबे समय से चर्चा होती रही है। लेकिन अब तक इसे पूरी तरह दूसरी जगह स्थानांतरित करने की कवायद आगे नहीं बढ़ सकी है। एयरपोर्ट के आसपास कचरे के बड़े स्रोत बने रहने से पक्षियों को भोजन मिलने की संभावना बनी रहती है। ऐसे में बर्ड स्ट्राइक के खतरे को कम करने के लिए एयरपोर्ट से जुड़े क्षेत्रों में कचरा प्रबंधन व्यवस्था को मजबूत करना जरूरी है।
टेकऑफ और लैंडिंग के समय सबसे ज्यादा खतरा
विमान जब टेकऑफ या लैंडिंग करता है, उस समय उसकी गति और ऊंचाई ऐसी होती है कि पक्षियों से टकराव गंभीर हो सकता है। बड़े पक्षियों के विमान से टकराने की स्थिति में इंजन और विमान के दूसरे हिस्सों को नुकसान पहुंचने का खतरा रहता है। इसी कारण दुनिया भर के एयरपोर्ट पर बर्ड स्ट्राइक को विमानन सुरक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। पटना एयरपोर्ट पर भी बढ़ते मामलों को देखते हुए रनवे के आसपास निगरानी और पक्षी नियंत्रण व्यवस्था को लगातार मजबूत करने की जरूरत है।
आसपास के इलाकों की सफाई पर भी देना होगा जोर
पटना एयरपोर्ट पर बर्ड हिट की समस्या केवल एयरपोर्ट प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं है। इसके लिए एयरपोर्ट के आसपास के स्थानीय निकाय, नगर प्रशासन और संबंधित विभागों को भी मिलकर काम करना होगा। खुले में कचरा फेंकने, जलजमाव और मांस-मछली के अवशेषों के निपटारे की समस्या दूर किए बिना पक्षियों की आवाजाही को पूरी तरह नियंत्रित करना मुश्किल होगा। ऐसे में एयरपोर्ट की सुरक्षा के लिए आसपास के इलाकों को भी साफ और पक्षी-अनुकूल परिस्थितियों से मुक्त रखना जरूरी है।
पटना एयरपोर्ट पर 2025 में सामने आए 9 बर्ड हिट के मामले सुरक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर संकेत हैं। एयरपोर्ट पर बर्ड चेजर्स, स्केयर गन्स और अन्य उपायों से पक्षियों को दूर रखने की कोशिश जारी है, लेकिन इसके साथ एयरपोर्ट के आसपास खुले कचरे, जलजमाव, जंगली घास और मांस-मछली के अवशेषों की समस्या का स्थायी समाधान भी जरूरी है। आने वाले समय में एयरपोर्ट की सुरक्षा काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि इन बाहरी कारणों को कितनी प्रभावी तरीके से नियंत्रित किया जाता है।