BNT Desk: केंद्र सरकार में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे लाखों युवाओं के लिए रिक्त पदों से जुड़ा बड़ा आंकड़ा सामने आया है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, केंद्र सरकार के मंत्रालयों और विभागों में खाली पदों की संख्या पिछले एक दशक में करीब दोगुनी हो गई है। वर्ष 2015 में जहां करीब 4.21 लाख पद खाली थे, वहीं 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 8.24 लाख से अधिक पहुंच गया। वहीं सरकारी कंपनियों यानी PSU में भी स्थायी कर्मचारियों की तुलना में ठेके पर काम करने वाले कर्मचारियों की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है।
केंद्र सरकार में 39 लाख से ज्यादा पद स्वीकृत
व्यय विभाग के आंकड़ों के अनुसार, केंद्र सरकार के 80 मंत्रालयों और विभागों में कुल 39 लाख 23 हजार 212 पद स्वीकृत हैं। इनमें करीब 30 लाख 99 हजार 656 पदों पर कर्मचारी कार्यरत हैं, जबकि 8 लाख 23 हजार 556 पद खाली हैं। वर्ष 2015 में कुल 36 लाख 49 हजार 468 पद स्वीकृत थे। इनमें 32 लाख 28 हजार 921 पद भरे हुए थे और 4 लाख 20 हजार 547 पद खाली थे। यानी दस साल में स्वीकृत पदों की संख्या करीब 2.74 लाख बढ़ी, लेकिन रिक्त पदों की संख्या लगभग दोगुनी हो गई। इससे कुल स्वीकृत पदों में रिक्तियों की हिस्सेदारी 11.5 फीसदी से बढ़कर करीब 21 फीसदी हो गई।
रेलवे में 2.40 लाख से ज्यादा पद रिक्त
सरकारी विभागों में रेलवे की स्थिति सबसे महत्वपूर्ण है। वर्ष 2015 में रेलवे में रिक्तियों का आंकड़ा शून्य बताया गया था, जबकि 2024 तक 2 लाख 40 हजार 125 पद खाली हो गए। इन रिक्तियों की हिस्सेदारी करीब 16.2 फीसदी है। रेलवे देश के सबसे बड़े सरकारी नियोक्ताओं में शामिल है। हर साल लाखों अभ्यर्थी रेलवे की विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में शामिल होते हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में पद खाली रहने से भर्ती प्रक्रिया और कर्मचारियों की उपलब्धता को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
रक्षा मंत्रालय में 2.41 लाख पद खाली
रक्षा मंत्रालय के सिविलियन कर्मचारियों के स्वीकृत पदों में भी बड़ी संख्या खाली है। आंकड़ों के मुताबिक यहां 2 लाख 41 हजार 643 पद रिक्त हैं। 2015 में रक्षा मंत्रालय में रिक्तता दर 31.9 फीसदी थी, जो 2024 में बढ़कर 43.4 फीसदी हो गई। यानी स्वीकृत पदों के मुकाबले बड़ी संख्या में पदों पर कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं।
गृह और डाक विभाग में भी बढ़ी रिक्तियां
गृह मंत्रालय में वर्ष 2015 में 58 हजार 774 पद खाली थे। 2024 में यह संख्या बढ़कर 1 लाख 10 हजार 885 हो गई। इस दौरान रिक्तता दर 5.8 फीसदी से बढ़कर 9.9 फीसदी पहुंच गई। डाक विभाग की स्थिति और ज्यादा चौंकाने वाली है। वर्ष 2015 में यहां 7 हजार 561 पद खाली थे, जबकि 2024 में यह आंकड़ा बढ़कर 61 हजार 546 हो गया। यानी रिक्त पदों की संख्या करीब आठ गुना बढ़ी है। रिक्तता दर भी 3.8 फीसदी से बढ़कर 24.3 फीसदी हो गई।
कॉमर्स विभाग में आधे से ज्यादा पद खाली
रिक्तता दर के मामले में कॉमर्स विभाग की स्थिति गंभीर है। 2024 में यहां करीब 55.4 फीसदी पद खाली बताए गए हैं। वर्ष 2015 में यह दर 37.1 फीसदी थी। इसके अलावा सिविल एविएशन विभाग में 45.2 फीसदी और श्रम मंत्रालय में 41.5 फीसदी पद रिक्त हैं। राजस्व विभाग में 69 हजार 652 पद यानी करीब 38.8 फीसदी पद खाली हैं। ऑडिट और अकाउंट से जुड़े विभाग में 21 हजार 505 पद, जबकि परमाणु ऊर्जा विभाग में 10 हजार 234 पद रिक्त बताए गए हैं। हालांकि कुछ विभागों में रिक्तता दर कम भी हुई है। विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग में यह दर 41.4 फीसदी से घटकर 29.4 फीसदी और हाउसिंग एवं अर्बन अफेयर्स विभाग में 39.5 फीसदी से घटकर 24 फीसदी हुई है।
खाली पदों के बीच बढ़ी आउटसोर्सिंग
सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सरकारी विभागों में लाखों पद खाली हैं तो कामकाज कैसे चलाया जा रहा है। उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, विभागों में कर्मचारियों की कमी को पूरा करने के लिए आउटसोर्सिंग और GeM के जरिए सेवाएं लेने का चलन बढ़ा है। बताया गया है कि पिछले साल करीब 10 लाख कर्मचारियों को आउटसोर्स किया गया। यानी कई ऐसे काम, जिन्हें स्थायी सरकारी कर्मचारियों के जरिए कराया जाता था, अब ठेके या निजी एजेंसियों के माध्यम से कराए जा रहे हैं। इस व्यवस्था को लेकर जवाबदेही और कार्यकुशलता पर भी सवाल उठ रहे हैं। विशेषज्ञों का तर्क है कि स्थायी कर्मचारियों की तुलना में ठेके पर काम करने वालों की नौकरी की सुरक्षा और संस्थागत अनुभव अलग होता है।
PSU में भी बढ़ा ठेका कर्मचारियों का हिस्सा
ठेके पर रोजगार का चलन सिर्फ सरकारी मंत्रालयों तक सीमित नहीं है। सरकारी कंपनियों यानी PSU में भी इसमें बड़ी बढ़ोतरी हुई है। पब्लिक एंटरप्राइजेज सर्वे के आंकड़ों के मुताबिक, 2015 में PSU में ठेके पर काम करने वाले कर्मचारियों की हिस्सेदारी करीब 18.6 फीसदी थी। 2025 में यह बढ़कर 49.1 फीसदी हो गई। यानी अब सरकारी कंपनियों में काम करने वाले कर्मचारियों में लगभग आधे कर्मचारी ठेके पर हैं। वर्ष 2015 में करीब 298 PSU में 15 लाख 87 हजार 149 कर्मचारी कार्यरत थे, जिनमें 2 लाख 95 हजार 975 ठेका कर्मचारी थे। वहीं 2025 में PSU की संख्या बढ़कर 475 हो गई, लेकिन कुल कर्मचारियों की संख्या 15 लाख 42 हजार 339 रही। इनमें 7 लाख 83 हजार 728 स्थायी और 7 लाख 58 हजार 611 ठेका कर्मचारी थे।
युवाओं के सामने रोजगार का बड़ा सवाल
एक तरफ SSC, रेलवे, UPSC और अन्य सरकारी भर्तियों की तैयारी करने वाले लाखों युवा स्थायी नौकरी का इंतजार कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकारी विभागों में 8 लाख से अधिक पद खाली हैं। इसी बीच आउटसोर्सिंग और ठेका कर्मचारियों पर निर्भरता बढ़ रही है। सरकारी नौकरी युवाओं के लिए सिर्फ रोजगार नहीं, बल्कि नौकरी की सुरक्षा, नियमित वेतन और सामाजिक सुरक्षा का माध्यम भी है। ऐसे में खाली स्वीकृत पदों को समयबद्ध तरीके से भरने और ठेका व्यवस्था के बढ़ते दायरे पर बहस होना स्वाभाविक है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब सरकारी विभागों में लाखों स्वीकृत पद खाली हैं, तो इन पदों पर स्थायी भर्ती की रफ्तार क्यों नहीं बढ़ाई जा रही?