बिहार में 21 हजार करोड़ रुपये की लागत से सड़क और पुल बनाए जाएंगे, लेकिन इन परियोजनाओं के लिए सरकार बैंकों से कर्ज लेगी। सरकार इस कर्ज को आने वाले वर्षों में चुकाएगी और इसके लिए सड़कों व पुलों से टोल टैक्स के जरिए राशि जुटाई जाएगी। यानि की सरकार का कर्ज अब बिहार की जनता चुकाएगी
इधर, बिहार सरकार पहले ही कई योजनाओं और परियोजनाओं के लिए बड़े पैमाने पर ऋण ले चुकी है। अब राज्य पर कुल कर्ज का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है। सरकार का कहना है कि यह कर्ज विकास कार्यों के लिए लिया जा रहा है, जबकि विपक्ष का आरोप है कि चुनावी घोषणाओं और मुफ्त योजनाओं का वित्तीय बोझ अब जनता पर पड़ने वाला है। बिहार सरकार पहले ही कई तरह के लोन लेकर राज्य पर कर्ज का बोझ बढ़ा चुकी है। अब इस कर्ज की भरपाई टैक्स और अन्य राजस्व स्रोतों से की जाएगी। फिलहाल बिहार पर कुल कर्ज लगभग 4.47 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच चुका है।
अब आपको बताते हैं कि एनडीए सरकार ने अब तक किन-किन योजनाओं के लिए ऋण लेने का फैसला किया है।
सम्राट चौधरी सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 3,47,589 करोड़ रुपये का बजट पेश किया था। इसमें 61,939.48 करोड़ रुपये ऋण लेने का प्रावधान था, लेकिन बाद में सरकार ने 72,901.31 करोड़ रुपये का ऋण लेने का फैसला किया, ताकि चुनावी घोषणाओं और विकास योजनाओं पर काम आगे बढ़ाया जा सके।साल दर साल बिहार पर कर्ज बढ़ता जा रहा है। बिहार सरकार बाजार से 64,141 करोड़ रुपये का ऋण लेगी। यह राशि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के माध्यम से मिलेगी। फिलहाल 12,000 करोड़ रुपये आरबीआई से लेने की तैयारी है। शेष राशि विश्व बैंक, एशियाई विकास बैंक (ADB), सिडबी (SIDBI) और नाबार्ड (NABARD) जैसी वित्तीय संस्थाओं से केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत विकास योजनाओं के लिए ली जाएगी।
राज्य की आबादी लगभग 13 करोड़ मानें तो प्रति व्यक्ति कर्ज का अनुमान लगभग 27 हजार से 31 हजार रुपये के बीच बैठता है। इसके अलावा रोड टैक्स और अन्य टैक्स भी अलग से वसूले जाते हैं।
अब कुछ आंकड़ों पर भी नजर डालिए।
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले नीतीश कुमार की अगुवाई वाली एनडीए सरकार ने कई बड़ी कल्याणकारी योजनाओं की घोषणा की। जानकारों का कहना है कि इन योजनाओं के कारण राज्य की वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ा है। बड़े प्रोजेक्ट पूरे करने के लिए सरकार को लगातार ऋण लेना पड़ रहा है और हर साल बड़ी राशि केवल ब्याज चुकाने में खर्च हो जाती है। बढ़ते कर्ज के कारण राजकोषीय घाटा भी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।महिलाओं को आर्थिक सहायता देने की योजना पर सरकार को 15 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च करना पड़ा है। आने वाले समय में यह राशि बढ़कर लगभग 20 हजार करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।इसके अलावा महिला रोजगार योजना के तहत दूसरी किस्त के रूप में 20 हजार रुपये देने की तैयारी भी चल रही है, जिसके लिए 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक की अतिरिक्त राशि की जरूरत होगी।
सरकार को भविष्य में तीसरी, चौथी और पांचवीं किस्त भी जारी करनी होगी, जिसके लिए भी हजारों करोड़ रुपये की आवश्यकता पड़ेगी।सामाजिक सुरक्षा पेंशन 400 रुपये से बढ़ाकर 1100 रुपये किए जाने के बाद सरकार को हर महीने लगभग 1100 करोड़ रुपये अतिरिक्त खर्च करने पड़ रहे हैं। इस योजना पर सालाना 13 हजार करोड़ रुपये से अधिक खर्च होने का अनुमान है।125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना के कारण भी सरकार पर इस वर्ष लगभग 23 हजार करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय बोझ आने का अनुमान है।
सरकार ने औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन राशि देने की घोषणा भी की है, जिसके लिए भी बड़ी धनराशि की आवश्यकता होगी।
हाल ही में कैबिनेट ने 72,901 करोड़ रुपये तक ऋण लेने को मंजूरी दी है। ग्रामीण विकास विभाग, पथ निर्माण विभाग और नगर विकास विभाग अपनी-अपनी योजनाओं को पूरा करने के लिए ऋण लेने की तैयारी कर रहे हैं।बढ़ते ऋण के कारण बिहार पर देनदारी भी लगातार बढ़ रही है। सम्राट चौधरी सरकार द्वारा 72,901 करोड़ रुपये का अतिरिक्त ऋण लेने के फैसले से राज्य का कुल कर्ज और बढ़ जाएगा।पिछले 15 वर्षों में बिहार पर कर्ज का बोझ लगभग सात गुना तक बढ़ चुका है। वर्ष 2025-26 में बिहार सरकार ने करीब 55,737 करोड़ रुपये का ऋण लिया था, जबकि इस वर्ष उससे लगभग 17 हजार करोड़ रुपये अधिक कर्ज लेने की योजना है।अनुमान है कि बिहार पर कुल देनदारियां साढ़े चार लाख करोड़ रुपये से अधिक हो जाएंगी। इसका सीधा असर ब्याज भुगतान पर पड़ेगा, क्योंकि हर साल हजारों करोड़ रुपये केवल ऋण के ब्याज में खर्च किए जाते हैं।
नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और अन्य विपक्षी नेताओं का दावा है कि सरकार का खजाना खाली हो चुका है। हालांकि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और उनके मंत्रियों का कहना है कि खजाना खाली नहीं है।डिप्टी सीएम एवं वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव का कहना है कि सरकार हर साल जरूरत के अनुसार ऋण लेती है। विश्व बैंक और आरबीआई जैसी संस्थाएं इसी उद्देश्य से बनी हैं और बिहार सरकार केंद्र द्वारा निर्धारित सीमा के भीतर ही ऋण लेती है।वहीं ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार का कहना है कि विकास कार्यों के कारण सरकार को ऋण लेना पड़ता है। उन्होंने कहा कि पहले भी विश्व बैंक से ऋण लेकर जीविका जैसी योजनाएं शुरू की गई थीं और आगे भी आवश्यकता के अनुसार विश्व बैंक तथा अन्य संस्थाओं से ऋण लिया जाएगा।
किन योजनाओं के लिए ऋण लिया जाएग
पटना मेट्रो परियोजना के लिए सरकार जापान की अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (JICA) से 5,500 करोड़ रुपये का ऋण लेने की तैयारी कर रही है। हाल ही में जेआईसीए की टीम बिहार का दौरा कर परियोजना का निरीक्षण भी कर चुकी है।पटना के अलावा मुजफ्फरपुर, गया, दरभंगा और अन्य शहरों में भी भविष्य में मेट्रो परियोजनाओं पर काम किया जाना है, जिसके लिए भी सरकार को ऋण लेना होगा।सरकार का लक्ष्य है कि बिहार के सुदूर इलाकों से चार घंटे के भीतर पटना पहुंचने की सुविधा विकसित की जाए। इसके लिए बड़े पुल, एक्सप्रेस-वे और कई सड़क परियोजनाओं पर काम किया जाएगा।रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लगभग 15 हजार करोड़ रुपये और बिहार राज्य पुल निर्माण निगम करीब 6 हजार करोड़ रुपये का ऋण लेने की तैयारी कर रहे हैं।इसके अलावा अर्बन ट्रांसपोर्टेशन प्रोग्राम के लिए 4,750 करोड़ रुपये और आजीविका योजना के लिए 1,937 करोड़ रुपये ऋण लेने की योजना बनाई गई है।मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत महिलाओं को रोजगार के लिए 2 लाख रुपये तक की सहायता देने की घोषणा की गई है। फिलहाल दूसरी किस्त के रूप में 20 हजार रुपये लाखों महिलाओं को दिए जाने हैं, जिसके लिए भी सरकार को बड़ी राशि की आवश्यकता होगी और इसके लिए भी ऋण लेने की तैयारी की जा रही है।
इसी बीच बिहार सरकार ने शानदार सड़कें और पुल बनाने के लिए एक और बड़ा फैसला लिया है। पथ निर्माण विभाग ने बैंकों से 21 हजार करोड़ रुपये का ऋण लेने की मंजूरी दे दी है।ई स फंड से मुजफ्फरपुर सहित पूरे उत्तर बिहार में रुकी हुई और चल रही सड़क एवं पुल परियोजनाओं का काम तेजी से पूरा किया जाएगा।इस 21 हजार करोड़ रुपये में से 15 हजार करोड़ रुपये बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (BSRDCL) को दिए जाएंगे, जबकि 6 हजार करोड़ रुपये बिहार राज्य पुल निर्माण निगम को मिलेंगे।पथ निर्माण विभाग ने ऋण से जुड़ी सभी शर्तें और दिशा-निर्देश अधिकारियों को जारी कर दिए हैं।सरकार इस ऋण को 25 वर्षों में किस्तों के माध्यम से चुकाएगी। कर्ज की अदायगी के लिए बिहार पथ उपयोगकर्ता शुल्क नियमावली 2026 के तहत सड़कों और पुलों से वसूले जाने वाले टोल टैक्स का उपयोग किया जाएगा।
सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था के बाद धन की कमी के कारण सड़क और पुल निर्माण की कोई भी परियोजना नहीं रुकेगी। यानि की पहले ही सरकार ने कई तरह के टैक्स के नाम पर वसूली करने की योजना बना रही है