भरत तिवारी एनकाउंटर के बाद बिहार में नई सियासी जंग: कुशवाह VS ब्राह्मण ?

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भोजपुर के भरत तिवारी एनकाउंटर मामले ने अब सिर्फ कानून व्यवस्था का सवाल नहीं छोड़ा है, बल्कि बिहार की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक अब चर्चा ब्राह्मण बनाम कुशवाहा की ओर जाती दिख रही है।

आरोप लग रहे हैं कि कुछ कुशवाहा समाज के बड़े नेता भरत तिवारी के समर्थन में उठ रही आवाजों पर सवाल खड़े कर रहे हैं, जबकि दूसरी तरफ कई सवर्ण नेता इस मामले में न्याय की मांग कर रहे हैं।मामला तब और चर्चा में आया जब बिहार के वरिष्ठ नेता नागमणि कुशवाहा ने एक टीवी चैनल पर भरत तिवारी एनकाउंटर से जुड़े सवाल पर कहा कि “कुत्ता-बिल्ली की बात मत करो।” उनके इस बयान को लेकर सोशल मीडिया पर काफी प्रतिक्रिया देखने को मिली।नागमणि कुशवाहा बिहार की राजनीति का जाना-पहचाना नाम हैं। वह बिहार के चर्चित समाजवादी नेता और “बिहार के लेनिन” कहे जाने वाले स्वर्गीय जगदेव प्रसाद के बेटे हैं।

दिलचस्प बात यह है कि जगदेव प्रसाद की मौत भी पुलिस गोलीकांड में हुई थी।

5 सितंबर 1974 को जहानाबाद के कुर्था में एक राजनीतिक आंदोलन के दौरान पुलिस फायरिंग में जगदेव प्रसाद की मौत हो गई थी। वह शोषित समाज दल के बैनर तले आंदोलन का नेतृत्व कर रहे थे। आरोप था कि प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने गोली चलाई, जिसमें उन्हें गोली लगी और बाद में उनकी मौत हो गई।यही वजह है कि कई लोग सवाल उठा रहे हैं कि जिस परिवार ने कभी पुलिस गोलीकांड का दर्द झेला, उसी परिवार से आने वाले नेता आज पुलिस कार्रवाई का समर्थन क्यों कर रहे हैं?

नागमणि की राजनीतिक यात्रा भी रही चर्चा में

72 साल की उम्र में नागमणि कई राजनीतिक दलों का सफर कर चुके हैं। बिहार की राजनीति में उनकी पहचान दल बदलने वाले नेताओं में भी होती रही है।उन्होंने राजद, जदयू, लोजपा समेत कई दलों में राजनीतिक भूमिका निभाई। कई बार अपनी पार्टी भी बनाई। 2024 में उन्होंने चतरा लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन सफलता नहीं मिली।कभी कुशवाहा समाज में उनकी मजबूत पकड़ मानी जाती थी, लेकिन लगातार बदलती राजनीतिक यात्राओं के कारण उनका प्रभाव पहले जैसा नहीं रहा।

उपेंद्र कुशवाहा ने भी दिया बयान

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले पर राष्ट्रीय लोक मोर्चा के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने लोगों से जांच पूरी होने तक धैर्य रखने की अपील की।उन्होंने कहा कि अगर प्रशासन से कोई गलती हुई होगी तो जांच के बाद सुधार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसे गंभीर मामले पर जांच रिपोर्ट आने से पहले राजनीति नहीं होनी चाहिए।

आरजेडी ने उठाए सवाल

वहीं आरजेडी विधायक भाई वीरेंद्र ने इस मामले पर सरकार को घेरा।उन्होंने सवाल उठाया कि जब किसी दलित व्यक्ति का एनकाउंटर होता है तो उसे नक्सलवाद से जोड़ दिया जाता है, लेकिन जब किसी सवर्ण व्यक्ति की मौत पुलिस कार्रवाई में होती है तो उसे अलग नजरिए से क्यों देखा जाता है?

राजीव रंजन पटेल का बयान भी चर्चा में

कुशवाहा समाज से आने वाले नेता राजीव रंजन पटेल ने भरत तिवारी के समर्थन में उठ रही आवाजों पर सवाल उठाए।उन्होंने कहा कि जो लोग इस मामले में सरकार और पुलिस पर सवाल उठा रहे हैं, वे नक्सलवाद को बढ़ावा दे रहे हैं।उन्होंने बिहार सरकार के मंत्री अशोक चौधरी के बयान पर भी प्रतिक्रिया दी।इतना ही नहीं, उन्होंने अपने ही विधान परिषद सदस्य पवन सिंह पर भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जब जवइनिया के लोग परेशान थे तब कहां थे, अब आवाज उठा रहे हैं।

कई नेता खुलकर समर्थन में नहीं आए

भरत तिवारी एनकाउंटर मामले में अब तक कई बड़े राजनीतिक चेहरे खुलकर समर्थन में नहीं दिखे हैं।हालांकि पप्पू यादव, तेजस्वी यादव समेत कई नेताओं ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।वहीं दूसरी तरफ भरत तिवारी के समर्थक लगातार सवाल उठा रहे हैं कि क्या एक सामाजिक कार्यकर्ता की मौत सिर्फ एक एनकाउंटर थी या इसके पीछे कोई बड़ी कहानी है?

फिलहाल न्यायिक जांच जारी है और आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट ही तय करेगी कि सच क्या था।

लेकिन इतना तय है कि भरत तिवारी एनकाउंटर अब सिर्फ भोजपुर का मामला नहीं रहा, बल्कि बिहार की राजनीति और समाज में एक बड़ी बहस बन चुका है।

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