बक्सर: सरकारी दफ्तर में मिली शराब की बोतलें, खाली बोतलों का मिला अंबार

BiharNewsAuthor
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BNT Desk: बिहार में शराबबंदी कानून को ठेंगा दिखाने का नया मामला बक्सर से सामने आया है। यहाँ जिला परिवहन कार्यालय (DTO) के अंदर से भारी मात्रा में शराब और खाली बोतलें बरामद की गई हैं। सरकारी दफ्तर के भीतर शराब मिलने की इस घटना ने जिला प्रशासन और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

गुप्त सूचना पर पुलिस का ‘अचानक’ छापा

गुरुवार दोपहर करीब 2 बजे सदर एसडीपीओ गौरव पांडेय को गुप्त सूचना मिली थी कि परिवहन कार्यालय परिसर में शराब का स्टॉक रखा गया है। सूचना मिलते ही नगर थाना पुलिस और उत्पाद विभाग की टीम ने कार्यालय में अचानक छापेमारी कर दी। पुलिस को देखते ही दफ्तर में तैनात कर्मियों और आसपास मौजूद लोगों में हड़कंप मच गया।

अलमारी के पीछे और कमरों में छिपाया गया था ‘स्टॉक’

तलाशी के दौरान पुलिस ने कार्यालय के एक-एक कमरे और अलमारियों को खंगाला। भवन के निचले तल पर जांच के दौरान चौंकाने वाला नजारा दिखा:

  • भरी बोतलें: अलमारी के पीछे छिपाकर रखी गई 330 एमएल की 7 भरी हुई विदेशी शराब की बोतलें मिलीं।

  • खाली बोतलों का ढेर: गार्ड रूम से सटे एक कमरे में, जिसका इस्तेमाल किचन के तौर पर हो रहा था, वहां से सैकड़ों खाली बोतलें और टेट्रा पैक के खाली पाउच बरामद हुए।

दफ्तर बना था ‘मयखाना’?

बरामद खाली बोतलों की संख्या को देखकर यह आशंका जताई जा रही है कि दफ्तर के इस हिस्से का इस्तेमाल लंबे समय से शराब पीने के लिए किया जा रहा था। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या कार्यालय के कर्मचारी ही इसमें संलिप्त हैं या बाहरी तत्वों द्वारा सरकारी परिसर का दुरुपयोग किया जा रहा था।

किसी की नहीं हुई गिरफ्तारी, जांच जारी

छापेमारी के दौरान मौके से किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है। एसडीपीओ गौरव पांडेय ने बताया कि मामले की गहराई से जांच की जा रही है। पुलिस यह पता लगा रही है कि कड़ी सुरक्षा के बावजूद शराब की बोतलें सरकारी दफ्तर के अंदर तक कैसे पहुंचीं। इस मामले में ड्यूटी पर तैनात गार्ड्स और दफ्तर के कर्मचारियों से भी पूछताछ की जा सकती है।

सचिवालय के बाद अब बक्सर में किरकिरी

हाल ही में पटना सचिवालय परिसर में भी शराब की बोतलें मिली थीं, जिसकी गूँज राजनीतिक गलियारों में खूब सुनाई दी थी। अब बक्सर के महत्वपूर्ण सरकारी दफ्तर (DTO) में शराब मिलना यह दर्शाता है कि शराब माफिया और शराब के शौकीनों के लिए सरकारी दीवारें भी कोई बाधा नहीं हैं।

 बिहार सरकार एक ओर शराबबंदी को सफल बनाने के लिए कड़े कानून और ड्रोन से निगरानी की बात करती है, वहीं दूसरी ओर सरकारी दफ्तरों के भीतर से शराब मिलना कानून के इकबाल पर बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है।

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