BNT Desk: दिल्ली में महिला के साथ हुए सामूहिक दुष्कर्म मामले ने पूरे देश को हिला दिया है। जिस स्लीपर बस (BR-28P-3941) में इस हैवानियत को अंजाम दिया गया, उसका रजिस्ट्रेशन बिहार के गोपालगंज जिले के सिधवलिया थाना क्षेत्र के सदौवा रामपुर गांव के पते पर है। इस खुलासे के बाद बिहार का परिवहन विभाग और गोपालगंज प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है।
किराये के कमरे पर चल रहा था ‘कागजी’ ऑफिस
जांच में पता चला है कि बस का असली मालिक हरियाणा के फरीदाबाद का रहने वाला साहिल मल्होत्रा है।
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फर्जीवाड़ा: साहिल ने गोपालगंज के सदौवा रामपुर निवासी अनुज पांडेय के घर को ₹7000 महीने के किराये पर लेकर वहां एक दफ्तर दिखाया था।
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हकीकत: इसी पते के आधार पर बस का रजिस्ट्रेशन कराया गया, लेकिन मौके पर फिलहाल कोई ऑफिस मौजूद नहीं है। बस “साईं दृष्टि प्राइवेट लिमिटेड” के नाम से रजिस्टर्ड है।
आखिर बिहार में ही क्यों होता है बसों का रजिस्ट्रेशन?
दिल्ली-हरियाणा के बस मालिक बिहार में रजिस्ट्रेशन कराना अधिक फायदेमंद समझते हैं। इसके पीछे कुछ ‘मुनाफे’ वाले कारण हैं:
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ज्यादा सीटिंग क्षमता: बिहार के नियमों के तहत बसों में ज्यादा बॉक्स और चौड़ी बॉडी बनाने की अनुमति मिल जाती है।
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अतिरिक्त मुनाफा: बड़ी बॉडी और ज्यादा सीटों की वजह से बस संचालक क्षमता से अधिक यात्रियों को बैठाते हैं और भारी सामान की अवैध ढुलाई करते हैं।
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नियमों की अनदेखी: ड्राइवर केबिन में यात्रियों को बैठाना मना है, लेकिन बिहार के परमिट पर चलने वाली कई बसों में यह धड़ल्ले से होता है।
₹1.37 लाख का जुर्माना था बकाया
परिवहन विभाग के रिकॉर्ड खंगालने पर पता चला कि यह बस पहले से ही दागदार रही है। नियमों के उल्लंघन, ओवरलोडिंग और इंश्योरेंस न होने जैसे मामलों में इस बस पर 1 लाख 37 हजार रुपये का जुर्माना पहले से बकाया था। बस का संचालन “रॉयल ट्रैवल्स एंड कार्गो” नाम की कंपनी कर रही थी।
मजदूरी कर परिवार पालती है पीड़िता
इस घटना की शिकार महिला एक बेहद गरीब परिवार से है। वह अपने तीन बच्चों और बीमार पति का पेट पालने के लिए एक फैक्ट्री में मजदूरी करती है। सोमवार रात जब वह काम से लौट रही थी, तब समय पूछने के बहाने उसे बस में खींच लिया गया और दरिंदगी के बाद सड़क किनारे फेंक दिया गया। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में बस के ड्राइवर और कंडक्टर को गिरफ्तार कर लिया है।
प्रशासन का रुख
गोपालगंज के जिला परिवहन पदाधिकारी (DTO) शशि शेखर ने बताया कि बस के रजिस्ट्रेशन से जुड़े सभी दस्तावेजों की गहराई से जांच की जा रही है। अगर यह पाया गया कि फर्जी पते या गलत तरीके से रजिस्ट्रेशन कराया गया है, तो बस मालिक और संबंधितों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
यह घटना न केवल सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाती है, बल्कि परिवहन विभाग की उन खामियों को भी उजागर करती है जिनका फायदा उठाकर दूसरे राज्यों के बस मालिक बिहार के पते पर गाड़ियां रजिस्टर कराते हैं और बेखौफ होकर सड़कों पर नियमों की धज्जियां उड़ाते हैं।