BNT Desk: बिहार के भागलपुर जिले के सुल्तानगंज में कार्यपालक पदाधिकारी (EO) कृष्ण भूषण कुमार की दिनदहाड़े हत्या के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। इस जघन्य हत्याकांड के मुख्य आरोपी रामधनी यादव को पुलिस ने एक संक्षिप्त मुठभेड़ में मार गिराया है। सरकारी अधिकारी की हत्या के महज कुछ घंटों के भीतर हुए इस एनकाउंटर ने राज्य के राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है।
एनकाउंटर पर जेडीयू का सख्त रुख
इस पुलिसिया कार्रवाई के बाद जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने कड़े तेवर दिखाए हैं। पार्टी के मुख्य प्रवक्ता और विधान पार्षद नीरज कुमार ने इस एनकाउंटर को “कानून के शासन” का एक स्पष्ट संदेश बताया है।
नीरज कुमार ने अपराधियों को चेतावनी देते हुए कहा कि बिहार में अब अपराध करके बच निकलना नामुमकिन है। उन्होंने एक बेहद सख्त बयान देते हुए कहा:
“अभी तक तो अपराधियों के पैर में गोली लग रही थी, लेकिन अब सीधे कलेजे पर फटाफट गोली लगेगी। अपराध करने वालों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।”
उन्होंने आगे कहा कि सुल्तानगंज की घटना ने न केवल एक कर्तव्यनिष्ठ अधिकारी को हमसे छीना, बल्कि जनप्रतिनिधि पर भी हमला कर सरकार को चुनौती दी थी। पुलिस की यह त्वरित कार्रवाई भविष्य के अपराधियों के लिए एक नजीर (मिसाल) बनेगी।
दिनदहाड़े हत्या से दहल गया था सुल्तानगंज
यह मामला तब शुरू हुआ जब सुल्तानगंज नगर परिषद कार्यालय में अपराधी निडर होकर घुसे और वहां तैनात EO कृष्ण भूषण कुमार पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी।
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अधिकारी की मौत: गोलीबारी में गंभीर रूप से घायल कृष्ण भूषण कुमार की मौके पर ही मौत हो गई।
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सभापति घायल: इस हमले में नगर परिषद सभापति राजकुमार गुड्डू भी अपराधियों की गोलियों का शिकार हुए। उनकी हालत अब भी नाजुक बनी हुई है और वे अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहे हैं।
इस दुस्साहसिक वारदात ने प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े किए थे, जिसका जवाब पुलिस ने मुख्य आरोपी रामधनी यादव को ढेर कर दिया है।
मुख्यमंत्री का बड़ा ऐलान
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए शहीद अधिकारी के परिवार के लिए बड़े ऐलान किए हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह अपने अधिकारियों के साथ खड़ी है।
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आर्थिक मदद: दिवंगत अधिकारी के परिवार को सरकार की ओर से 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
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राजकीय सम्मान: कृष्ण भूषण कुमार की अंतिम विदाई पूरे राजकीय सम्मान के साथ होगी, जो उनकी कर्तव्यनिष्ठा को सरकार की ओर से एक बड़ी श्रद्धांजलि है।
राजनीति का अखाड़ा बना एनकाउंटर
जहां एक तरफ सत्तापक्ष (JDU-BJP) इस एनकाउंटर को “इंस्टेंट जस्टिस” और अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति बता रहा है, वहीं विपक्ष ने इस पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
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सत्तापक्ष का तर्क: सरकार का कहना है कि जब अपराधी पुलिस पर गोली चलाएंगे, तो पुलिस आत्मरक्षा में चुप नहीं बैठेगी। त्वरित न्याय से जनता में विश्वास बहाल होता है।
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विपक्ष का सवाल: विपक्षी दलों ने पुलिस की कार्यप्रणाली और कानून-व्यवस्था की गिरती स्थिति पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि एनकाउंटर कानून-व्यवस्था की विफलता को छिपाने का तरीका नहीं होना चाहिए।
कानून व्यवस्था के लिए ‘लिटमस टेस्ट’
सुल्तानगंज की यह घटना और उसके बाद की पुलिस कार्रवाई बिहार की राजनीति में एक नया मोड़ ले चुकी है। नीरज कुमार के “कलेजे पर गोली” वाले बयान ने यह साफ कर दिया है कि सरकार अब ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में नहीं है।
बिहार नगर सेवा संघ की हड़ताल की चेतावनी और अधिकारियों के बीच व्याप्त असुरक्षा के माहौल को देखते हुए, रामधनी यादव का एनकाउंटर पुलिस के मनोबल को बढ़ाने और अपराधियों में खौफ पैदा करने की एक कोशिश माना जा रहा है।