BNT Desk: बिहार की सत्ता की कमान संभालते ही मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पूरी तरह से एक्शन मोड में नजर आ रहे हैं। राज्य में प्रशासनिक कसावट लाने के लिए वे लगातार समीक्षा बैठकें कर रहे हैं और अधिकारियों को कड़े निर्देश दे रहे हैं। इसी कड़ी में, सम्राट सरकार की दूसरी कैबिनेट बैठक की तारीख का एलान हो गया है। आगामी 29 अप्रैल को होने वाली यह बैठक बिहार के विकास और युवाओं के भविष्य के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
29 अप्रैल को कैबिनेट की महाबैठक
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में होने वाली इस दूसरी कैबिनेट बैठक को लेकर सचिवालय में तैयारियां तेज हो गई हैं। सूत्रों के मुताबिक, यह बैठक सुबह शुरू होगी और इसके तुरंत बाद शाम 5 बजे कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देने के लिए प्रेस ब्रीफिंग की जाएगी।
बता दें कि इससे पहले 22 अप्रैल को सम्राट सरकार की पहली कैबिनेट बैठक हुई थी, जो लगभग एक घंटे तक चली थी। उस बैठक में सरकार ने 22 अहम एजेंडों पर अपनी स्वीकृति दी थी। अब मात्र एक सप्ताह के भीतर दूसरी बैठक बुलाना यह दर्शाता है कि नई सरकार विकास कार्यों में किसी भी तरह की देरी के मूड में नहीं है।
5 लाख करोड़ का निवेश और रोजगार का रोडमैप
इस बैठक का मुख्य फोकस ‘निवेश और रोजगार’ रहने वाला है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने पद संभालते ही बिहार में 5 लाख करोड़ रुपये के निवेश का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए राज्य में नई औद्योगिक नीति और निवेशकों को दी जाने वाली सुविधाओं पर चर्चा संभव है।
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औद्योगिक गलियारा: राज्य में नए उद्योगों की स्थापना के लिए जमीन आवंटन की प्रक्रिया को सरल बनाया जा सकता है।
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रोजगार सृजन: निवेश के जरिए स्थानीय स्तर पर युवाओं के लिए नौकरियों के अवसर पैदा करने पर सरकार का विशेष जोर है।
11 नए टाउनशिप: शहरीकरण को मिलेगी रफ्तार
बिहार में बढ़ती आबादी और शहरीकरण की जरूरतों को देखते हुए सरकार 11 नए टाउनशिप परियोजनाओं पर विचार कर रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि 29 अप्रैल की बैठक में इन परियोजनाओं को प्रशासनिक मंजूरी मिल सकती है।
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इन टाउनशिप के बनने से न केवल लोगों को आधुनिक आवासीय सुविधाएं मिलेंगी, बल्कि रियल एस्टेट और निर्माण क्षेत्र में हजारों की संख्या में रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।
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यह परियोजना बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को मजबूत करने की दिशा में सम्राट सरकार का एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
मंत्रिमंडल विस्तार से पहले बड़ी रणनीति
राजनीतिक गलियारों में इस बैठक की चर्चा इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि वर्तमान में बिहार सरकार बिना पूर्ण मंत्रिमंडल विस्तार के काम कर रही है। सीमित मंत्रियों के साथ बार-बार कैबिनेट की बैठक करना यह संकेत देता है कि मुख्यमंत्री अपनी प्राथमिकताओं को जल्द से जल्द जमीन पर उतारना चाहते हैं। जानकारों का मानना है कि मंत्रिमंडल विस्तार से पहले सरकार अपनी छवि एक ‘डिलिवरी आधारित सरकार’ (Delivery-based Govt) के रूप में बनाना चाहती है।
जनता की उम्मीदें और आगामी चुनौतियां
पहली कैबिनेट में 22 फैसलों के बाद अब जनता की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार शिक्षा, स्वास्थ्य और किसानों से जुड़े मुद्दों पर भी कुछ बड़ा एलान करेगी।
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समीक्षा बैठकें: मुख्यमंत्री केवल कैबिनेट तक सीमित नहीं हैं, वे विभागों की अलग-अलग समीक्षा कर फाइलों के निपटारे की गति बढ़ा रहे हैं।
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प्रशासनिक सुधार: अधिकारियों को समय सीमा के भीतर काम पूरा करने के ‘फरमान’ जारी किए जा रहे हैं।
निष्कर्ष: बिहार के विकास की नई दिशा
29 अप्रैल की शाम 5 बजे जब प्रेस ब्रीफिंग होगी, तब बिहार की नई दिशा की तस्वीर और साफ हो जाएगी। चाहे वह निवेश का मुद्दा हो या नई टाउनशिप का निर्माण, सम्राट सरकार के ये शुरुआती कदम राज्य की आर्थिक स्थिति को बदलने का दम रखते हैं। बिहार के युवाओं, व्यापारियों और आम जनता की निगाहें अब मुख्यमंत्री के उन हस्ताक्षरों पर टिकी हैं, जो इस सोमवार को कैबिनेट की फाइल पर होने वाले हैं।