बिहार के लिए खुशखबरी: केंद्र ने दी UDAN 2.0 को मंजूरी, बिहार को मिले 4 नए एयरपोर्ट—जानें आपके जिले में कब शुरू होगी उड़ान

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BNT Desk: बिहार के विकास की गाड़ी अब सिर्फ सड़कों और पटरियों पर ही नहीं दौड़ेगी, बल्कि अब बिहार सीधे आसमान से बातें करेगा। केंद्र सरकार ने अपनी महत्वाकांक्षी ‘उड़ान योजना 2.0’ (UDAN 2.0) को हरी झंडी दे दी है। इस योजना के तहत देशभर में 100 नए हवाई अड्डे बनाए जाने हैं, जिनमें से 4 बड़े एयरपोर्ट अकेले बिहार के खाते में आए हैं।

यह फैसला बिहार की कनेक्टिविटी और अर्थव्यवस्था के लिए ‘गेमचेंजर’ साबित होने वाला है। गोपालगंज से लेकर भागलपुर तक, अब आम आदमी के लिए हवाई सफर का सपना हकीकत बनने जा रहा है।

1. गोपालगंज (सबेया): रक्षा एयरबेस अब बनेगा सिविल एयरपोर्ट

गोपालगंज के सबेया (Sabeya) स्थित ऐतिहासिक एयरबेस की किस्मत बदलने वाली है। द्वितीय विश्व युद्ध के समय का यह एयरबेस वर्तमान में रक्षा मंत्रालय के अधीन है। लंबे समय से स्थानीय लोग इसे आम जनता के लिए खोलने की मांग कर रहे थे।

  • बदलाव: अब इसे ‘सिविल एन्क्लेव’ के रूप में विकसित किया जाएगा।

  • फायदा: यहाँ से कॉमर्शियल फ्लाइट्स शुरू होने से उत्तर बिहार और उत्तर प्रदेश के सीमावर्ती जिलों के लोगों को पटना या गोरखपुर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

2. बेगूसराय (उलाओ): हवाई पट्टी से बड़े एयरपोर्ट तक का सफर

बेगूसराय के उलाओ (Ulao) में गंगा किनारे स्थित छोटी हवाई पट्टी को अब एक पूर्ण विकसित एयरपोर्ट का रूप दिया जाएगा।

  • मौजूदा स्थिति: अभी यहाँ केवल छोटे चार्टर्ड विमान या वीआईपी हेलीकॉप्टर ही उतर पाते हैं।

  • भविष्य की योजना: केंद्र सरकार यहाँ रनवे का विस्तार करेगी और टर्मिनल बिल्डिंग बनाएगी। बिहार के ‘लेनिनग्राद’ कहे जाने वाले इस औद्योगिक शहर में एयरपोर्ट बनने से निवेश और व्यापार को नई ऊंचाइयां मिलेंगी।

3. सुल्तानगंज (भागलपुर): ₹400 करोड़ का ‘ग्रीनफील्ड’ प्रोजेक्ट

भागलपुर के सुल्तानगंज में एक बिल्कुल नया यानी ‘ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट’ बनाने को मंजूरी मिली है।

  • लागत: इस प्रोजेक्ट पर लगभग 400 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

  • महत्व: सुल्तानगंज श्रावणी मेले और सुल्तानगंज-खगड़िया पुल के कारण पहले ही चर्चा में है। यहाँ एयरपोर्ट बनने से अंग क्षेत्र (भागलपुर, बांका) और सीमांचल के जिलों को सीधा लाभ होगा। सिल्क सिटी भागलपुर के व्यापारियों के लिए यह एक बड़ा वरदान साबित होगा।

4. सारण (सोनपुर): कनेक्टिविटी का नया केंद्र

छपरा (सारण) के सोनपुर इलाके में भी नया एयरपोर्ट बनाने की अनुमति मिल गई है। सोनपुर अपने विश्व प्रसिद्ध पशु मेले के लिए जाना जाता है, लेकिन अब यह हवाई नक्शे पर भी चमकेगा। यह एयरपोर्ट उत्तर बिहार और राजधानी पटना के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी का काम करेगा और इलाके में पर्यटन को बढ़ावा देगा।

मिशन मोड में बिहटा और मुजफ्फरपुर (पताही)

सिर्फ नए एयरपोर्ट की मंजूरी ही नहीं, बल्कि दो पुराने प्रोजेक्ट्स पर भी काम ‘सुपरफास्ट’ मोड में चल रहा है:

  • बिहटा एयरपोर्ट: पटना के जयप्रकाश नारायण अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर बढ़ते दबाव को कम करने के लिए बिहटा में सिविल एन्क्लेव का काम युद्धस्तर पर जारी है। उम्मीद है कि बहुत जल्द बड़े बोइंग विमान यहाँ से उड़ान भरेंगे।

  • मुजफ्फरपुर (पताही): पताही एयरपोर्ट के रनवे को फिर से तैयार किया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, सब कुछ ठीक रहा तो इसी साल के अंत तक यहाँ से क्षेत्रीय उड़ानें शुरू हो सकती हैं।

बिहार की ‘तस्वीर और तकदीर’ बदलेगी

विशेषज्ञों का मानना है कि इन हवाई अड्डों के शुरू होने से बिहार में ‘रिवर्स माइग्रेशन’ और निवेश को बढ़ावा मिलेगा।

  • रोजगार: एयरपोर्ट बनने से स्थानीय स्तर पर हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे।

  • समय की बचत: दिल्ली, मुंबई या बेंगलुरु जाने के लिए अब लोगों को घंटों बस या ट्रेन का सफर कर पटना आने की मजबूरी नहीं रहेगी।

  • पर्यटन: बोधगया और राजगीर के साथ-साथ अब अन्य जिलों के पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान हो जाएगी।

बिहार की नई पहचान

कुल मिलाकर, बिहार अब पिछड़ेपन की बेड़ियों को तोड़कर ‘उड़ान’ भरने को तैयार है। गोपालगंज का सबेया हो या भागलपुर का सुल्तानगंज—हर तरफ निर्माण की गूंज सुनाई देगी। केंद्र और राज्य सरकार का यह साझा प्रयास बिहार को देश के अग्रणी राज्यों की कतार में खड़ा करने का एक बड़ा माध्यम बनेगा।

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