नीतीश कुमार के लिए क्यों रो पड़ीं मंत्री Leshi Singh? कौन हैं सीमांचल की ‘आयरन लेडी’

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Parambir Singh एक पत्रकार और डिजिटल मीडिया रणनीतिकार हैं, जो बिहार की राजनीति और जमीनी मुद्दों पर लिखते हैं। वे स्पष्ट और तथ्य आधारित विश्लेषण के...
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पूर्णिया: बिहार की राजनीति में शुक्रवार को एक ऐसा भावुक पल देखने को मिला जिसे वहां मौजूद लोग शायद लंबे समय तक नहीं भूल पाएंगे। मुख्यमंत्री Nitish Kumar की ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान मंच पर बिहार सरकार की मंत्री Leshi Singh अचानक भावुक हो गईं और बोलते-बोलते रो पड़ीं।

सैकड़ों लोगों से भरे मंच पर जब लेशी सिंह बोलने के लिए माइक के सामने आईं तो शुरुआत में उन्होंने सामान्य तरीके से बात शुरू की। लेकिन कुछ ही पलों बाद उनकी आवाज़ भर्रा गई। आंखें नम हो गईं।

उन्होंने कहा —
“नीतीश कुमार मेरे लिए कृष्ण बनकर आए हैं।”

इतना कहते ही वे खुद को संभाल नहीं सकीं और रोते हुए अपनी कुर्सी पर बैठ गईं।

यह दृश्य इसलिए भी खास था क्योंकि सीमांचल की राजनीति में लेशी सिंह को एक बेहद मजबूत नेता माना जाता है। उन्हें अक्सर “आयरन लेडी” कहा जाता है, जो पिछले ढाई दशकों से राजनीतिक संघर्षों और चुनौतियों के बीच खड़ी रही हैं।

कौन हैं Leshi Singh?

लेशी सिंह का जन्म 5 जनवरी 1974 को पूर्णिया जिले के सरसी गांव में हुआ था। उनके पति बूटन सिंह समता पार्टी के जिला स्तर के बड़े नेता थे।

शुरुआत में लेशी सिंह का राजनीति से कोई सीधा संबंध नहीं था। वे परिवार और अपने चार बच्चों की परवरिश में व्यस्त थीं। लेकिन साल 2000 में एक ऐसी घटना हुई जिसने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी।

इसी वर्ष पूर्णिया कोर्ट परिसर में दिनदहाड़े उनके पति बूटन सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह घटना पूरे इलाके में सनसनी बन गई थी।

पति की हत्या के बाद परिवार, बच्चों और राजनीतिक विरासत—तीनों की जिम्मेदारी अचानक उनके कंधों पर आ गई। उसी समय उन्होंने राजनीति में कदम रखने का फैसला किया।

राजनीति में एंट्री और लगातार जीत

लेशी सिंह ने साल 2000 में समता पार्टी के टिकट पर धमदाहा विधानसभा से चुनाव लड़ा और पहली ही बार जीत हासिल कर ली। उस समय पार्टी का नेतृत्व George Fernandes और Nitish Kumar कर रहे थे।

इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।

वे लगातार चुनाव जीतती रहीं और 2005, 2010, 2015 और 2020 में भी धमदाहा की जनता ने उन्हें विधानसभा भेजा। हाल के चुनाव में उन्होंने रिकॉर्ड मतों से जीत हासिल की और एक बार फिर मंत्रिमंडल में जगह बनाई।

दिलचस्प बात यह है कि धमदाहा क्षेत्र में उनकी जाति की आबादी ज्यादा नहीं है। यहां मुस्लिम और यादव मतदाताओं की बड़ी संख्या है। इसके बावजूद वे लगातार चुनाव जीतती रही हैं।

स्थानीय लोग कहते हैं कि लेशी सिंह ने खुद को नेता से ज्यादा इलाके की बहू और बेटी के रूप में स्थापित किया।

कई बार हुए जानलेवा हमले

पिछले 24 वर्षों में लेशी सिंह पर कई बार जानलेवा हमले भी हुए हैं। चुनावी रैलियों और राजनीतिक कार्यक्रमों के दौरान उन्हें निशाना बनाने की कोशिश की गई, लेकिन हर बार वे बच निकलीं और राजनीति में सक्रिय रहीं।

सीमांचल और कोसी इलाके में लोग उन्हें सम्मान से “मैडम” कहकर बुलाते हैं।

नीतीश कुमार से 25 साल पुराना रिश्ता

लेशी सिंह और मुख्यमंत्री Nitish Kumar का राजनीतिक संबंध करीब 25 साल पुराना माना जाता है।

पति की हत्या के बाद जब वे राजनीति में आईं तो उन्हें समता पार्टी से टिकट मिला और यहीं से उनका राजनीतिक सफर शुरू हुआ।

बाद में उन्हें बिहार सरकार में मंत्री भी बनाया गया। अलग-अलग समय में उन्हें समाज कल्याण, आपदा प्रबंधन और खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण जैसे विभागों की जिम्मेदारी मिली।

दोनों नेताओं के बीच रिश्ता सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं माना जाता। कई मौकों पर मुख्यमंत्री व्यक्तिगत रूप से उनके परिवार से जुड़े कार्यक्रमों में भी शामिल हुए हैं।

आखिर क्यों भावुक हो गईं?

पूर्णिया के मंच पर लेशी सिंह के आंसुओं के पीछे भी यही लंबा रिश्ता माना जा रहा है।

राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि मुख्यमंत्री Nitish Kumar के भविष्य को लेकर चल रही अटकलों के बीच यह पल आया। ऐसे में लेशी सिंह के लिए यह सिर्फ एक राजनीतिक क्षण नहीं बल्कि निजी भावनाओं से जुड़ा हुआ पल बन गया।

जब उन्होंने मंच से कहा —
“नीतीश कुमार मेरे लिए कृष्ण बनकर आए हैं।”

तो वह दरअसल उनके 25 साल के राजनीतिक और व्यक्तिगत रिश्ते की अभिव्यक्ति थी।

सीमांचल की जिस नेता को लोग “आयरन लेडी” कहते हैं, वही नेता उस मंच पर भावुक होकर रो पड़ीं।

और शायद यही दिखाता है कि राजनीति के कठोर चेहरे के पीछे भी भावनाएं होती हैं।

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Parambir Singh एक पत्रकार और डिजिटल मीडिया रणनीतिकार हैं, जो बिहार की राजनीति और जमीनी मुद्दों पर लिखते हैं। वे स्पष्ट और तथ्य आधारित विश्लेषण के लिए जाने जाते हैं और डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर प्रभावी कंटेंट निर्माण का अनुभव रखते हैं।