मोतिहारी में नशे का ‘इंटरनेशनल सिंडिकेट’: रक्सौल के रास्ते आ रहा मौत का सामान, दिव्यांग और बच्चे बने ‘कैरियर’

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BNT Desk: बिहार के पूर्वी चंपारण का जिला मुख्यालय मोतिहारी कभी अपनी उत्कृष्ट शिक्षा और समृद्ध संस्कृति के लिए पूरे प्रदेश में मशहूर था। लेकिन आज यहाँ की फिजाओं में एक ऐसा जहर घुल चुका है जो दिखाई तो नहीं देता, पर इसकी चीखें उजड़ते परिवारों और बर्बाद होते युवाओं के रूप में सुनाई दे रही हैं। ‘ek akhabar’ की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट ने उस डरावनी हकीकत को उजागर किया है, जिसे अब तक नजरअंदाज किया जा रहा था।

मौत के सामान का ‘गेटवे’

यह कोई स्थानीय स्तर का छोटा धंधा नहीं, बल्कि एक सुनियोजित इंटरनेशनल सिंडिकेट है। नेपाल की खुली सीमा का फायदा उठाकर मौत का यह सामान रक्सौल के रास्ते मोतिहारी में दाखिल हो रहा है। शराबबंदी के बाद बिहार में ‘सूखे नशे’ यानी स्मैक, हेरोइन और ब्राउन शुगर की मांग में जबरदस्त इजाफा हुआ है। अब यह नशा सिर्फ महानगरों तक सीमित नहीं है, बल्कि आपके मोहल्ले के स्कूल और कॉलेजों तक अपनी पैठ बना चुका है।

मासूमों और दिव्यांगों को बनाया ढाल

पुलिस की बढ़ती दबिश को देखते हुए इस सिंडिकेट ने बेहद चौंकाने वाला और घिनौना तरीका अपनाया है। पुलिस को चकमा देने के लिए अब महिलाओं, छोटे बच्चों और यहाँ तक कि दिव्यांगों (Disabled persons) को ड्रग्स पहुँचाने का जरिया (कैरियर) बनाया जा रहा है। सुरक्षा एजेंसियों को इन पर शक नहीं होता, जिसका फायदा उठाकर ये अपराधी शहर के कोने-कोने में नशे की पुड़ियाँ पहुँचा रहे हैं।

शहर के प्रमुख ‘हॉटस्पॉट’

रिपोर्ट के मुताबिक, मोतिहारी के कई प्रमुख स्थान अब नशेड़ियों और डीलरों के मिलन स्थल बन गए हैं। यहाँ शाम होते ही युवाओं का जमावड़ा लगने लगता है:

  • एमएस कॉलेज ग्राउंड और गांधी मैदान: यहाँ छात्र पढ़ाई के बजाय नशे की तलाश में पहुँच रहे हैं।

  • बलुआ चौक और छतौनी चौक: ये इलाके नशे की सप्लाई के मुख्य केंद्र बन चुके हैं।

  • मनरेगा पार्क: शाम ढलते ही यहाँ का नजारा भयावह हो जाता है।

एक होनहार छात्र की बर्बादी

अखबार की रिपोर्ट में शहर के एक नामी कॉलेज के छात्र रवीश की कहानी ने सबको झकझोर दिया है। रवीश पढ़ाई में अव्वल था, लेकिन दोस्तों के साथ ‘चखने’ के शौक ने उसे नशे का गुलाम बना दिया। धीरे-धीरे उसकी पढ़ाई के पैसे नशे की पुड़ियों में जाने लगे और जब पैसे खत्म हुए, तो उसने पहले झूठ बोला और फिर चोरी करना शुरू कर दिया। यह कहानी अकेले रवीश की नहीं, बल्कि हजारों बिहारी युवाओं की है।

विशेषज्ञों की चेतावनी

सदर अस्पताल की मनोवैज्ञानिक डॉ. नगमा जमीं के अनुसार, युवाओं में बढ़ता यह नशा जिसे ‘मंकी ड्रग्स’ या MD ड्रग भी कहा जाता है, बेहद खतरनाक है। यह दिमाग के डोपामाइन (Dopamine) लेवल को अप्राकृतिक रूप से बढ़ा देता है। इसके बाद इंसान का दिमाग बिना नशे के स्थिर नहीं रह पाता और उसे केवल नशे में ही सुकून मिलता है।

पुलिसिया कार्रवाई

पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है, लेकिन नशे का जाल इतना गहरा है कि हर कार्रवाई कम पड़ रही है। अकेले मार्च महीने में जब्त किए गए नशे के आंकड़े देखें:

  • गांजा: लगभग 100 किलो

  • स्मैक: 500 ग्राम

  • हेरोइन: 400 ग्राम

  • प्रतिबंधित कफ सिरप: 85 लीटर

  • ब्राउन शुगर: 9.25 ग्राम

समाज को जागने की जरूरत

मोतिहारी की यह भयावह स्थिति पूरे बिहार का आईना है। सूखा नशा दिन-ब-दिन जड़ें जमा रहा है और सरकारी तंत्र के पास इसे रोकने का कोई ठोस स्थायी उपाय नजर नहीं आ रहा है। यदि आज समाज, परिवार और स्कूल मिलकर इस लड़ाई में आगे नहीं आए, तो आने वाली पीढ़ियों का भविष्य पूरी तरह अंधकारमय हो जाएगा।

https://www.youtube.com/watch?v=NzvS6UksPnc

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