BNT Desk: बिहार के कोसी क्षेत्र के केंद्र सहरसा के निवासियों के लिए एक बड़ी और सुखद खबर है। पिछले कई दशकों से हवाई सेवा का इंतजार कर रहे लोगों का सपना अब हकीकत में बदलने जा रहा है। सहरसा हवाई अड्डे के कायाकल्प की प्रक्रिया तेज हो गई है। अगले साल तक यहाँ से छोटे और मध्यम आकार के विमानों की आवाजाही शुरू होने की उम्मीद है।
आर्थिक और व्यापारिक गतिविधियों को मिलेगी नई उड़ान
सहरसा में हवाई सेवा शुरू होने का असर केवल यात्रा तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह पूरे कोसी क्षेत्र की अर्थव्यवस्था के लिए ‘गेम चेंजर’ साबित होगा।
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व्यापार: व्यवसायियों को दिल्ली, कोलकाता और अन्य बड़े शहरों तक पहुँचने में कम समय लगेगा, जिससे क्षेत्रीय व्यापार को गति मिलेगी।
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पर्यटन: बेहतर हवाई संपर्क से कोसी क्षेत्र के सांस्कृतिक और धार्मिक पर्यटन स्थलों की ओर पर्यटकों का आकर्षण बढ़ेगा।
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रोजगार: एयरपोर्ट के संचालन से स्थानीय स्तर पर सुरक्षा, लॉजिस्टिक्स और ट्रांसपोर्टेशन जैसे क्षेत्रों में रोजगार के सैकड़ों नए अवसर पैदा होंगे।
15 किलोमीटर के दायरे में हुआ सर्वे
हवाई सेवा के संचालन में सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षा होती है। इसके लिए पिछले साल सितंबर में ओएलएस (Obstacle Limitation Surfaces) के तहत हवाई अड्डे के आसपास के 15 किलोमीटर क्षेत्र का गहन सर्वे किया गया था।
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भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) की तीन सदस्यीय टीम ने पाँच दिनों तक इमारतों, मोबाइल टावरों और हाई-टेंशन बिजली के तारों की जांच की।
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टीम ने राय टोला से लेकर बैजनाथपुर तक के उन सभी अवरोधों की पहचान की जो विमानों की लैंडिंग और टेक-ऑफ में बाधा बन सकते थे।
38.14 करोड़ का बजट और ई-टेंडर की प्रक्रिया
एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया ने इस पूरे प्रोजेक्ट के लिए ईपीसी (Engineering, Procurement, and Construction) मोड पर ई-निविदा जारी कर दी है।
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टेंडर की तारीख: निविदा 16 जून को खोली जाएगी, जिसके बाद चयनित कंपनी को निर्माण का जिम्मा सौंपा जाएगा।
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अनुमानित लागत: इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर कुल 38.14 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।
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समय सीमा: निर्माण कार्य शुरू होने के बाद इसे 15 महीने के भीतर पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
कैसा होगा सहरसा का नया एयरपोर्ट?
सहरसा हवाई अड्डे को कोड-2बी श्रेणी के विमानों के संचालन के लिए विकसित किया जा रहा है। इसके मास्टर प्लान में निम्नलिखित आधुनिक सुविधाएँ शामिल हैं:
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रनवे: यहाँ 1000 मीटर लंबा और 30 मीटर चौड़ा रनवे बनाया जाएगा, जो छोटे एटीआर विमानों के लिए उपयुक्त होगा।
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टर्मिनल भवन: यात्रियों की सुविधा के लिए 1580 वर्ग मीटर का दो मंजिला भव्य टर्मिनल भवन बनेगा। यह प्री-फैब्रिकेटेड स्टील स्ट्रक्चर से निर्मित होगा।
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एटीसी टावर: विमानों के दिशा-निर्देशन के लिए 165 वर्ग मीटर का आधुनिक एटीसी (Air Traffic Control) टावर स्थापित किया जाएगा।
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सुरक्षा: आगजनी जैसी घटनाओं से निपटने के लिए 451 वर्ग मीटर का एक समर्पित फायर स्टेशन भी परिसर में बनाया जाएगा।
सहरसा एयरपोर्ट का विकास बिहार सरकार और केंद्र सरकार की ‘उड़े देश का आम नागरिक’ (UDAN) योजना को मजबूती प्रदान करेगा। कोसी के लोगों के लिए अब पटना या दरभंगा एयरपोर्ट तक घंटों का सफर तय करना अनिवार्य नहीं रहेगा। आधुनिक एटीसी टावर और बेहतर बुनियादी ढांचे के साथ सहरसा जल्द ही बिहार के विमानन मानचित्र (Aviation Map) पर चमकता नजर आएगा।