पटना: बाढ़ का खतरा अभी टला नहीं, गंगा का पानी घटा लेकिन पुनपुन-बागमती ने बढ़ाई चिंता

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BNT Desk: पटना में बाढ़ का खतरा अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। गंगा समेत बिहार की कई प्रमुख नदियां सोमवार सुबह तक अलग-अलग स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। हालांकि गंगा के कई घाटों और जलमापक केंद्रों पर जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन पुनपुन और बागमती में बढ़ते पानी ने निचले इलाकों की चिंता एक बार फिर बढ़ा दी है। जल संसाधन विभाग की ओर से सुबह छह बजे जारी आंकड़ों के मुताबिक स्थिति में कुछ राहत जरूर मिली है, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है।

 

पटना में गंगा अब भी खतरे के निशान से ऊपर

पटना के दीघा में गंगा का जलस्तर 50.81 मीटर दर्ज किया गया। यहां खतरे का निशान 50.45 मीटर है। यानी नदी 0.36 मीटर ऊपर बह रही है। वहीं गांधी घाट पर गंगा का जलस्तर 49.61 मीटर रहा, जो खतरे के निशान से 1.01 मीटर अधिक है। हथिदह में भी गंगा का पानी 42.82 मीटर पर दर्ज किया गया, जबकि यहां खतरे का निशान 41.76 मीटर है। इसका मतलब है कि हथिदह में भी नदी खतरे के निशान से 1.06 मीटर ऊपर बह रही है। हालांकि इन स्थानों पर जलस्तर में गिरावट का रुख दर्ज किया जा रहा है, जिससे प्रशासन और लोगों को कुछ राहत मिली है।

 

कई घाटों पर अभी सामान्य नहीं हुए हालात

पटना और आसपास के इलाकों में गंगा का पानी कई स्थानों पर अभी भी खतरे के निशान से ऊपर बना हुआ है। गांधी घाट, दीघा घाट और बांकाघाट जैसे इलाकों में नदी की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। बाढ़ प्रबंधन सुधार सहायता केंद्र के आंकड़ों के अनुसार बांकाघाट में गंगा का जलस्तर 48.59 मीटर और पंडारक में 43.08 मीटर दर्ज किया गया है। जलस्तर में कमी के बावजूद नदी किनारे रहने वाले लोगों के लिए स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है। निचले इलाकों में नदी का पानी बढ़ने या घटने का असर तेजी से दिखाई देता है। ऐसे में जलस्तर में मामूली बदलाव भी गांवों और जलभराव वाले क्षेत्रों में परेशानी बढ़ा सकता है।

 

मुंगेर, भागलपुर और कहलगांव में भी पानी ऊपर

बिहार के दूसरे हिस्सों में भी गंगा का जलस्तर कई जगह खतरे के निशान से ऊपर है। मुंगेर में नदी का जलस्तर 39.38 मीटर दर्ज किया गया। भागलपुर में यह 34.18 मीटर और कहलगांव में 32.49 मीटर रहा। इन सभी स्थानों पर पानी खतरे के निशान से ऊपर दर्ज किया गया है। हालांकि कई केंद्रों पर जलस्तर में कमी का सिलसिला जारी है। इससे बाढ़ प्रभावित इलाकों में धीरे-धीरे राहत मिलने की उम्मीद है। प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती यह है कि जलस्तर घटने के दौरान भी निचले इलाकों में जमा पानी लंबे समय तक परेशानी पैदा कर सकता है। इसलिए केवल नदी के मुख्य जलस्तर में कमी को स्थिति पूरी तरह सामान्य होने का संकेत नहीं माना जा सकता।

 

बक्सर में खतरे से नीचे, फरक्का में ऊपर

बक्सर में गंगा का जलस्तर 59.42 मीटर दर्ज किया गया है। यहां खतरे का निशान 60.32 मीटर है। यानी बक्सर में नदी खतरे के निशान से 0.90 मीटर नीचे है। हालांकि जलस्तर चेतावनी स्तर से ऊपर बना हुआ है, इसलिए यहां भी निगरानी जारी रखना जरूरी है। दूसरी ओर फरक्का में गंगा का जलस्तर 23.80 मीटर दर्ज किया गया, जो खतरे के निशान से 1.55 मीटर अधिक है। इससे साफ है कि गंगा की स्थिति बिहार के अलग-अलग हिस्सों में एक जैसी नहीं है। कहीं पानी घट रहा है तो कहीं नदी अब भी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।

 

वाराणसी और प्रयागराज में राहत के संकेत

गंगा के ऊपरी हिस्सों की बात करें तो वाराणसी और प्रयागराज में नदी का जलस्तर खतरे के निशान से नीचे है। दोनों जगह पानी घटने का रुख राहत देने वाला माना जा रहा है। इसके बावजूद बिहार के लिए स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं कही जा सकती। खासकर पुनपुन और बागमती नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी ने निचले इलाकों में चिंता बढ़ा दी है। इन नदियों के आसपास बसे गांवों और जलभराव वाले क्षेत्रों में लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।

 

पुनपुन और बागमती ने बढ़ाई चिंता

गंगा का जलस्तर कई जगह घटने के बावजूद पुनपुन और बागमती का बढ़ता पानी प्रशासन के लिए चुनौती बना हुआ है। निचले इलाकों में इन नदियों का पानी पहुंचने से पहले से जलभराव झेल रहे लोगों की परेशानी और बढ़ सकती है। ऐसे में नदी किनारे बसे गांवों, निचले क्षेत्रों और जलभराव वाले इलाकों में लगातार निगरानी जरूरी है। प्रशासन को जलस्तर के साथ-साथ तटबंधों, सड़कों और प्रभावित बस्तियों की स्थिति पर भी नजर रखनी होगी।

 

लोगों से सतर्क रहने की अपील

गंगा के तेवर कुछ नरम जरूर पड़े हैं, लेकिन बिहार में बाढ़ का खतरा अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। जलस्तर में मामूली उतार-चढ़ाव भी निचले इलाकों में मुश्किलें बढ़ा सकता है। ऐसे में लोगों को नदी के किनारे जाने से बचने, जलभराव वाले रास्तों पर सावधानी बरतने और प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देशों का पालन करने की जरूरत है। प्रशासन के लिए भी अगले कुछ दिनों तक जलस्तर की लगातार निगरानी महत्वपूर्ण रहेगी। फिलहाल स्थिति में आंशिक राहत है, लेकिन पूरी तरह खतरा टलने में अभी समय लग सकता है।

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