पटना: AKU में कर्मचारियों का प्रदर्शन, कुलसचिव ने लगाए धमकी देने के आरोप; माफी तक अनशन की चेतावनी

BNT
By
8 Min Read

BNT Desk: आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय (AKU), पटना में जांच समिति के गठन को लेकर विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। सोमवार को विश्वविद्यालय परिसर में कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया और बिहार के उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव पवन कुमार सिन्हा के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि जांच के दौरान विश्वविद्यालय के अधिकारियों के साथ कथित तौर पर अमर्यादित व्यवहार किया गया और धमकीपूर्ण भाषा का इस्तेमाल किया गया। कर्मचारियों ने कहा कि जब तक विशेष सचिव माफी नहीं मांगते, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। धरनार्थियों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और आरोप सही पाए जाने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है।

 

विश्वविद्यालय परिसर में कर्मचारियों ने किया प्रदर्शन

जांच समिति के गठन और उसके कामकाज को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन और उच्च शिक्षा विभाग के बीच विवाद सामने आया है। इसी मामले को लेकर सोमवार को AKU के कर्मचारियों ने विश्वविद्यालय परिसर में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव पवन कुमार सिन्हा के इस्तीफे की मांग की। कर्मचारियों का कहना है कि विश्वविद्यालय के अधिकारियों के साथ कथित तौर पर जिस तरह का व्यवहार किया गया, वह स्वीकार्य नहीं है। धरनार्थियों ने साफ कहा कि जब तक संबंधित अधिकारी अपनी कथित टिप्पणी और व्यवहार को लेकर माफी नहीं मांगते, तब तक वे अनशन जारी रखेंगे। कर्मचारियों ने आरोपों की निष्पक्ष जांच की भी मांग की है, ताकि पूरे मामले की वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

 

कुलसचिव ने लगाए गंभीर आरोप

AKU के कुलसचिव डॉ. नीरंजन प्रसाद यादव ने जांच समिति के समन्वयक और उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव पवन कुमार सिन्हा पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कुलसचिव की ओर से भेजे गए पत्र में कथित अमर्यादित व्यवहार, आपत्तिजनक भाषा के इस्तेमाल और धमकी देने का आरोप लगाया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन का दावा है कि जांच के दौरान अधिकारियों के साथ प्रशासनिक और संस्थागत मर्यादा के अनुरूप व्यवहार नहीं किया गया। पत्र में यह भी आरोप लगाया गया है कि कुलसचिव को कथित तौर पर “हाथ तुड़वाने की धमकी” जैसी भाषा का सामना करना पड़ा। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे गंभीर विषय बताते हुए संबंधित अधिकारी के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग की है। हालांकि, ये आरोप विश्वविद्यालय प्रशासन और कुलसचिव की ओर से लगाए गए हैं। मामले में संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने आने के बाद ही पूरे विवाद की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी।

 

मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को भी भेजी गई शिकायत

मामले को लेकर विश्वविद्यालय के कुलपति ने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव को भी शिकायत भेजी है। शिकायत में जांच समिति के गठन की प्रक्रिया और उसके अधिकार क्षेत्र को लेकर सवाल उठाए गए हैं। विश्वविद्यालय प्रशासन ने आरोप लगाया है कि जांच समिति ने कथित तौर पर अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कार्रवाई की। इसके अलावा जांच के दौरान अधिकारियों के साथ अमर्यादित व्यवहार और धमकीपूर्ण भाषा के इस्तेमाल का भी उल्लेख शिकायत में किया गया है। कुलपति ने सरकार से मामले का तत्काल संज्ञान लेने और विश्वविद्यालय प्रशासन तथा कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने का अनुरोध किया है। साथ ही पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि यदि लगाए गए आरोप जांच में सही पाए जाते हैं, तो संबंधित अधिकारी के खिलाफ निलंबन समेत कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।

 

जांच समिति के गठन की वैधता पर भी सवाल

विश्वविद्यालय प्रशासन ने केवल व्यवहार को लेकर ही आपत्ति नहीं जताई है, बल्कि जांच समिति के गठन की वैधता पर भी सवाल उठाए हैं। कुलसचिव का कहना है कि कुलाधिपति या राज्यपाल की अनुमति के बिना विश्वविद्यालय के खिलाफ जांच समिति गठित किया जाना अधिकार क्षेत्र से जुड़ा मामला है। इसी आधार पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने समिति के गठन को चुनौती दी है।विश्वविद्यालय के अनुसार, राज्यपाल सचिवालय के अपर मुख्य सचिव स्तर से 27 जुलाई 2026 को जांच समिति गठित करने का आदेश जारी किया गया था। इस समिति में उच्च शिक्षा विभाग के विशेष सचिव पवन कुमार सिन्हा को समन्वयक बनाया गया था। गृह विभाग, अभियोजन निदेशालय और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को समिति का सदस्य बनाया गया था।

 

15 दिन में जांच पूरी करने का था आदेश

विश्वविद्यालय प्रशासन के मुताबिक जांच समिति के गठन के आदेश में जांच पूरी करने के लिए 15 दिनों की समय-सीमा निर्धारित की गई थी। विश्वविद्यालय का दावा है कि निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद जांच की अवधि बढ़ाने से संबंधित कोई विधिवत आदेश या पत्र उसे प्राप्त नहीं हुआ। इसके बावजूद समिति की ओर से जांच आगे बढ़ाए जाने पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने आपत्ति जताई है। प्रशासन का सवाल है कि निर्धारित समय-सीमा समाप्त होने के बाद किस आदेश के आधार पर जांच जारी रखी गई। यही मुद्दा अब विश्वविद्यालय प्रशासन और जांच समिति के बीच विवाद का एक प्रमुख कारण बन गया है।

 

समिति ने मांगे 1,344 पन्नों के दस्तावेज

कुलसचिव के पत्र के अनुसार, 12 सितंबर को सुबह करीब 11 बजे जांच समिति के सदस्य विश्वविद्यालय परिसर पहुंचे। इस दौरान समिति की ओर से विश्वविद्यालय प्रशासन से बड़ी संख्या में फाइलें और दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा गया। विश्वविद्यालय प्रशासन का दावा है कि समिति को करीब 1,344 पृष्ठों के दस्तावेज उपलब्ध कराए गए। हालांकि, दस्तावेज सौंपे जाने के बाद भी समिति की ओर से अतिरिक्त फाइलों और अभिलेखों की मांग की जाती रही। विश्वविद्यालय प्रशासन ने दस्तावेज उपलब्ध कराने की प्रक्रिया और जांच की कार्यशैली को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

 

कर्मचारियों ने आंदोलन जारी रखने की दी चेतावनी

जांच समिति को लेकर शुरू हुआ विवाद अब कर्मचारियों के प्रदर्शन तक पहुंच गया है। कर्मचारियों का कहना है कि वे विश्वविद्यालय के अधिकारियों के कथित अपमान और धमकी के आरोपों को लेकर चुप नहीं बैठेंगे। प्रदर्शनकारियों ने विशेष सचिव से माफी की मांग करते हुए कहा है कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती, आंदोलन और अनशन जारी रहेगा। कर्मचारियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ नियमों के अनुसार कार्रवाई की मांग की है। अब निगाहें राज्य सरकार और संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया पर हैं। शिकायतों और आरोपों की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि जांच समिति के गठन और उसके कामकाज को लेकर उठाए गए सवालों पर क्या निर्णय लिया जाता है।

Share This Article