BNT Desk: बिहार के पूर्वी चंपारण जिले से एक ऐसी खबर आई है जिसने पूरे राज्य को झकझोर कर रख दिया है। मोतिहारी के कुंडवा चैनपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत बड़हरवा फतेमहम्मद गांव में शुक्रवार की आधी रात एक ऐसी आग लगी, जिसने न केवल एक हंसते-खेलते परिवार की खुशियाँ छीन लीं, बल्कि तीन जिंदगियों को भी निगल लिया। इस भीषण अग्निकांड में दो मासूम बच्चों और दुकान के एक कर्मचारी की जिंदा जलकर मौत हो गई। घटना के बाद से पूरे इलाके में सन्नाटा और मातम पसरा हुआ है।
कैसे शुरू हुआ तबाही का मंजर?
बड़हरवा फतेमहम्मद गांव के निवासी राजकुमार साह का दो मंजिला मकान है, जिसके निचले हिस्से में वे एक होलसेल किराना और जनरल स्टोर चलाते थे। शुक्रवार की रात परिवार रोजाना की तरह खाना खाकर ऊपर की मंजिल पर सो गया था।
देर रात अचानक दुकान के भीतर से आग की लपटें निकलने लगीं। जब तक आसपास के ग्रामीण धुआं और आग देखकर शोर मचाते, तब तक आग ने पूरी इमारत को अपने आगोश में ले लिया था। आग इतनी विकराल थी कि दो मंजिला मकान देखते ही देखते आग के गोले में तब्दील हो गया।
हादसे में तीन जिंदगियां खाक
मकान के ऊपरी हिस्से में सो रहे परिवार को संभलने का मौका तक नहीं मिला। धुएं के गुबार और आग की लपटों के बीच फंसे तीन लोग बाहर नहीं निकल सके और दम घुटने व जलने के कारण उनकी मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों में शामिल हैं:
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रुद्र कुमार (8 वर्ष): राजकुमार साह का छोटा बेटा।
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सृष्टि कुमारी (12 वर्ष): राजकुमार साह की बेटी।
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प्रेंस कुमार (28 वर्ष): दुकान में काम करने वाला स्टाफ।
एक ही घर से तीन शव निकलने के बाद गांव का माहौल अत्यंत गमगीन हो गया है। बच्चों की असमय मौत ने हर किसी की आंखें नम कर दी हैं।
जान बचाने के लिए छत से कूदे पिता
मकान मालिक राजकुमार साह ने अपनी आंखों के सामने अपने बच्चों को खोते देखा। खुद को आग से घिरा पाकर और कोई रास्ता न देख, उन्होंने जान बचाने के लिए मकान की दूसरी मंजिल की छत से नीचे छलांग लगा दी। इस प्रयास में वे गंभीर रूप से झुलस गए और उन्हें चोटें भी आईं।
आग बुझाने की कोशिश में गांव के ही एक अन्य युवक, विजय बैठा भी झुलस गए हैं। दोनों घायलों को इलाज के लिए स्थानीय अस्पताल ले जाया गया, जहां से राजकुमार साह की नाजुक हालत को देखते हुए उन्हें मोतिहारी के बेहतर अस्पताल में रेफर कर दिया गया है।
दमकल की मशक्कत और भारी नुकसान
अगलगी की सूचना मिलते ही गांव के लोग बड़ी संख्या में जुट गए और निजी स्तर पर आग बुझाने का प्रयास किया। बाद में दमकल विभाग की कई गाड़ियां मौके पर पहुँचीं। घंटों की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया जा सका, लेकिन तब तक सब कुछ बर्बाद हो चुका था।
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आर्थिक क्षति: शुरुआती आकलन के अनुसार, इस अग्निकांड में करीब 50 लाख रुपये की संपत्ति जलकर राख हो गई है।
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सामान का नुकसान: दुकान में रखा थोक किराना का सामान, घर का कीमती फर्नीचर, लाखों की नकदी और गहने सब कुछ मिट्टी में मिल गए।
प्रशासनिक कार्रवाई और जांच
घटना की सूचना पाकर स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने तीनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। अधिकारियों ने पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया और सरकारी नियमों के तहत हर संभव मुआवजा और सहायता देने का आश्वासन दिया है।
आग लगने का कारण: स्थानीय लोगों और शुरुआती जांच के अनुसार, आग लगने की मुख्य वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है। हालांकि, अग्निशमन विभाग और पुलिस की टीम वैज्ञानिक तरीके से जांच कर रही है ताकि आग लगने के सही कारणों का पता लगाया जा सके।
सुरक्षा पर उठते सवाल
इस दर्दनाक हादसे ने एक बार फिर बिजली के उपकरणों के रखरखाव और ग्रामीण इलाकों में अग्निशमन की त्वरित उपलब्धता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। दो मासूम बच्चों की मौत ने पूरे ढाका प्रखंड को सदमे में डाल दिया है। गांव के लोग अब भी उस खौफनाक रात को याद कर सिहर उठते हैं। प्रशासन से मांग की जा रही है कि पीड़ित परिवार को उचित सहायता दी जाए ताकि वे इस भारी नुकसान से उबर सकें।