BNT Desk: बिहार में NEET-UG की पुनर्परीक्षा के दौरान एक बड़े सॉल्वर गैंग का खुलासा हुआ है। पुलिस ने लखीसराय जिले के अलग-अलग परीक्षा केंद्रों से करीब दो दर्जन लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें मेडिकल कॉलेजों के छात्र और बायोमेट्रिक कंपनी के कर्मचारी शामिल हैं।
क्या था सॉल्वर गैंग का खेल?
जांच में पता चला है कि यह गैंग असली परीक्षार्थियों की जगह ‘मुन्नाभाई’ यानी फर्जी उम्मीदवारों को बैठाकर परीक्षा पास कराने की साजिश रच रहा था। लखीसराय के हसनपुर हाई स्कूल, केआरके हायर सेकेंडरी स्कूल और केंद्रीय विद्यालय केंद्रों पर यह नेटवर्क सक्रिय था।
गैंग के मुख्य सदस्य और गिरफ्तारी
-
अर्पित राज (सरगना): ANMMCH गया का मेडिकल छात्र। इससे पहले 2024 नीट पेपर लीक मामले में भी पूछताछ हो चुकी है।
-
मयंक कश्यप: PMCH पटना का थर्ड ईयर एमबीबीएस छात्र। उसने खुद को बायोमेट्रिक स्टाफ बताकर परीक्षा केंद्र में घुसने की कोशिश की थी, और इसी की गिरफ्तारी से पूरे गैंग का खुलासा हुआ।
-
अन्य गिरफ्तारियां: इसमें BHU नर्सिंग की छात्रा पूनम कुमारी, AIIMS रायबरेली के सौरभ झा, दिल्ली के इंटर्न अमन अग्रवाल समेत कई अन्य छात्र शामिल हैं।
-
बायोमेट्रिक कंपनी: इस पूरे खेल में बायोमेट्रिक कंपनी के 14 कर्मचारियों की मिलीभगत सामने आई है, जिन्हें पुलिस ने हिरासत में लिया है।
कैसे रची गई साजिश?
नीट परीक्षा के दौरान मेडिकल छात्रों को कैंपस से बाहर जाने से रोकने के लिए कॉलेजों में विशेष सेमिनार और क्विज रखे गए थे। इसके बावजूद, PMCH के छात्र मयंक कश्यप जैसे कई लोग बीमारी का बहाना बनाकर या अन्य तरीके से कॉलेज से निकल भागे और परीक्षा केंद्रों पर फर्जीवाड़ा करने पहुँच गए।
प्रशासन की आगे की कार्रवाई
पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि इस फर्जीवाड़े में कितना पैसा खर्च किया गया था और यह नेटवर्क अन्य राज्यों में कहाँ-कहाँ फैला है। बायोमेट्रिक एजेंसी की भूमिका पर भी प्रशासन ने सवाल खड़े किए हैं, क्योंकि उन्हीं के कर्मचारियों की मदद से सॉल्वर गैंग परीक्षा केंद्र के भीतर तक पहुँच पाया था।
इस घटना के बाद बिहार में NEET परीक्षा की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर से गंभीर सवाल उठने लगे हैं। पुलिस प्रशासन ने दावा किया है कि इस गिरोह के बाकी सदस्यों को भी जल्द गिरफ्तार कर लिया जाएगा।