सुपौल: बेला गोठ समेत कई गांवों में कटाव से तबाही, सैकड़ों परिवार खुले आसमान के नीचे

BiharNewsAuthor
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BNT Desk: सुपौल में कोसी नदी एक बार फिर अपने रौद्र रूप में है। किशनपुर प्रखंड की दुबियाही पंचायत स्थित बेला गोठ गांव इस वक्त भीषण कटाव की त्रासदी झेल रहा है। हालात इतने भयावह हैं कि अब तक करीब 30 परिवारों के घर नदी की धारा में समा चुके हैं। सुबह का सूरज उगते ही ग्रामीणों के चेहरे पर डर साफ दिखता है कि कहीं आज उनका घर नदी में न विलीन हो जाए।

जिन आंगन में कभी खुशहाली थी, आज वहां सिर्फ मलबे के ढेर और कोसी की गर्जना सुनाई देती है। लोग अपनी आंखों के सामने अपनी जीवनभर की कमाई और सपनों को नदी में बहते देखने को मजबूर हैं।

बेघर लोगों का दर्द: खुले आसमान के नीचे जिंदगी

कटाव से प्रभावित परिवारों के पास अब सिर छिपाने की जगह नहीं बची है। जिन लोगों के घर उजड़ गए, वे अपने बचे-खुचे सामान के साथ गांव के ऊंचे स्थानों पर शरण लिए हुए हैं। बरसात के इस मौसम में:

  • महिलाएं और बच्चे खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।

  • बुनियादी सुविधाएं: भोजन, पेयजल और स्वास्थ्य सेवाएं तक पहुंचना एक बड़ी चुनौती बन गई है।

  • शिक्षा पर संकट: बच्चों की पढ़ाई पूरी तरह से ठप हो गई है।

 

केवल आश्वासन, समाधान शून्य

ग्रामीणों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा केवल औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। कुछ सप्ताह पहले अनुमंडल पदाधिकारी ने दौरे के दौरान आश्वासन दिया था, लेकिन धरातल पर न तो बांस की पायलिंग हुई और न ही तट सुरक्षा के कोई ठोस कार्य किए गए। पीड़ितों का कहना है कि यदि समय रहते प्रशासनिक सख्ती दिखाई जाती, तो आज कई घर और उपजाऊ कृषि भूमि को बचाया जा सकता था।

सिर्फ बेला गोठ ही नहीं, इन इलाकों पर भी मंडरा रहा खतरा

कोसी का कहर सिर्फ एक गांव तक सीमित नहीं है। खतरे की जद में कई और क्षेत्र भी हैं:

  • किशनपुर प्रखंड: मौजहा पंचायत का बगहा क्षेत्र।

  • सरायगढ़-भपटियाही प्रखंड: ढोली पंचायत के सियानी और ढोली गांव।

    इन गांवों के निवासी अब पूरी रात जागकर नदी की गतिविधियों पर नजर रखते हैं ताकि किसी अनहोनी से पहले खुद को सुरक्षित कर सकें।

 

‘कोसी नव निर्माण मंच’ की मांग

सामाजिक संगठन ‘कोसी नव निर्माण मंच’ ने इस स्थिति पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए सरकार से निम्नलिखित मांगें की हैं:

  1. तत्काल पुनर्वास: बेघर परिवारों को सरकारी जमीन पर सुरक्षित बसाया जाए।

  2. युद्धस्तर पर कार्य: कटावरोधी सुरक्षा कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर शुरू किया जाए।

  3. मुआवजा और सुविधाएं: पीड़ितों को तत्काल क्षति मुआवजा, राहत शिविर, तिरपाल और चिकित्सा सुविधाएं प्रदान की जाएं।

 

कब मिलेगा स्थायी समाधान?

कोसी क्षेत्र के लोगों के लिए यह कोई नई त्रासदी नहीं है। हर साल हजारों परिवार बेघर होते हैं, फिर से जीवन शुरू करते हैं और फिर अगली बाढ़ या कटाव में सब कुछ खो देते हैं। पीड़ितों को केवल राहत सामग्री की नहीं, बल्कि स्थायी समाधान की जरूरत है। आज बेला गोठ के उजड़े घर और बेघर लोग बस एक ही सवाल पूछ रहे हैं—आखिर कब तक कोसी उनके सपनों को बहाती रहेगी?

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