पटना: UCC पर जारी बयानबाजी के बीच पटना में जुटेंगे JDU के MLA-MLC, नीतीश कुमार करेंगे प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन

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BNT Desk: बिहार में समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर पिछले कुछ दिनों से जारी राजनीतिक बयानबाजी के बीच जनता दल यूनाइटेड (JDU) के सभी विधायक और विधान पार्षद शुक्रवार को पटना में एक विशेष संसदीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में जुटेंगे। कार्यक्रम का आयोजन पार्टी के कर्पूरी सभागार में किया जाएगा और इसका उद्घाटन JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार करेंगे। कार्यक्रम में पार्टी के विधायकों और विधान पार्षदों को सदन की कार्यवाही, संसदीय नियमों और जनप्रतिनिधियों की भूमिका से जुड़े विभिन्न विषयों पर प्रशिक्षण दिया जाएगा।

 

सभी JDU विधायक और विधान पार्षद होंगे शामिल

JDU की ओर से आयोजित इस विशेष ओरिएंटेशन कार्यक्रम में पार्टी के सभी विधायक और विधान परिषद सदस्य शामिल होंगे। इसके अलावा पार्टी के वरिष्ठ नेता भी कार्यक्रम में मौजूद रहेंगे। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक कार्यक्रम की शुरुआत सुबह 11 बजे से होगी और यह दिनभर चलने वाला प्रशिक्षण कार्यक्रम होगा। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य विधायकों और विधान पार्षदों को संसदीय कार्यप्रणाली की व्यावहारिक जानकारी देना है, ताकि वे सदन के भीतर अपनी जिम्मेदारियों और उपलब्ध संसदीय प्रक्रियाओं को बेहतर तरीके से समझ सकें। कार्यक्रम में विशेषज्ञों की ओर से अलग-अलग सत्र आयोजित किए जाएंगे।

 

सदन की कार्यवाही और सदस्यों की भूमिका पर फोकस

प्रशिक्षण कार्यक्रम में सबसे प्रमुख विषय सदन की कार्यवाही और उसमें निर्वाचित सदस्यों की भूमिका होगी। विधायकों और विधान पार्षदों को बताया जाएगा कि विधानसभा और विधान परिषद की कार्यवाही किस तरह संचालित होती है और सदस्य किन संसदीय नियमों के तहत अपनी बात रख सकते हैं। जनप्रतिनिधियों के लिए सदन में मुद्दे उठाने के अलग-अलग माध्यम होते हैं। ऐसे में प्रशिक्षण के दौरान इन प्रक्रियाओं की जानकारी देने पर जोर रहेगा। इससे सदस्यों को अपने क्षेत्र से जुड़े विषयों को निर्धारित संसदीय प्रक्रिया के माध्यम से उठाने की जानकारी मिलेगी।

 

कानून बनने की प्रक्रिया भी समझेंगे जनप्रतिनिधि

कार्यक्रम के दूसरे प्रमुख विषय में कानून बनने की प्रक्रिया शामिल है। विधेयक से लेकर कानून बनने तक की संसदीय प्रक्रिया को प्रशिक्षण के दौरान समझाया जाएगा। विधायकों और विधान पार्षदों के लिए यह जानना महत्वपूर्ण होता है कि किसी प्रस्तावित कानून पर सदन में किस तरह चर्चा होती है, उस पर विचार-विमर्श की प्रक्रिया क्या होती है और विधायी कामकाज में सदस्यों की भूमिका किस स्तर पर होती है। प्रशिक्षण में इसी तरह के संसदीय पहलुओं पर विशेषज्ञ जानकारी देंगे। JDU की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम को पार्टी के जनप्रतिनिधियों की संसदीय समझ को व्यवस्थित तरीके से मजबूत करने की पहल के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, कार्यक्रम का घोषित फोकस संसदीय कार्यप्रणाली का प्रशिक्षण है।

 

शून्यकाल और संकल्प के जरिए मुद्दे उठाने की जानकारी

प्रशिक्षण में शून्यकाल और संकल्प के माध्यम से सदन में मुद्दे उठाने की प्रक्रिया भी शामिल है। जनप्रतिनिधियों के लिए यह महत्वपूर्ण संसदीय माध्यम हैं, जिनके जरिए वे अपने क्षेत्र या व्यापक जनहित से जुड़े विषयों को सदन के सामने रख सकते हैं। कार्यक्रम में सदस्यों को यह बताया जाएगा कि अलग-अलग संसदीय प्रक्रियाओं के तहत किस तरह मुद्दे उठाए जा सकते हैं और इसके लिए किन नियमों का पालन करना होता है। पार्टी की ओर से इससे जुड़े व्यावहारिक पहलुओं पर भी जानकारी देने की तैयारी है।

 

बजट और अर्थव्यवस्था पर भी मिलेगा प्रशिक्षण

संसदीय प्रशिक्षण के पांच प्रमुख विषयों में बजट और अर्थव्यवस्था को भी शामिल किया गया है। विधायकों और विधान पार्षदों को बजट से जुड़े विषयों तथा सरकार के वित्तीय कामकाज को समझने के बारे में जानकारी दी जाएगी। बजट पर चर्चा सदन की महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में शामिल होती है। ऐसे में जनप्रतिनिधियों को बजट और आर्थिक विषयों से जुड़े संसदीय पहलुओं की जानकारी देने का उद्देश्य उन्हें वित्तीय मामलों पर सदन में होने वाली चर्चा को समझने में मदद करना है।

 

नए बदलाव और तकनीक का इस्तेमाल

प्रशिक्षण कार्यक्रम में संसदीय कामकाज में हो रहे नए बदलाव और तकनीक के इस्तेमाल पर भी चर्चा होगी। बदलते समय के साथ सदन की कार्यप्रणाली में डिजिटल साधनों और तकनीकी माध्यमों का इस्तेमाल बढ़ा है। ऐसे में जनप्रतिनिधियों को आधुनिक संसदीय प्रक्रियाओं और तकनीकी संसाधनों की जानकारी देने को भी कार्यक्रम का हिस्सा बनाया गया है। JDU के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने पहले बताया था कि पार्टी अपने विधायकों और विधान पार्षदों के लिए विशेषज्ञों के माध्यम से प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित कर रही है। कार्यक्रम का उद्देश्य सदस्यों को सदन में प्रश्न पूछने और अपने विधानसभा क्षेत्र से जुड़े विकास के मुद्दों को प्रभावी तरीके से रखने की संसदीय प्रक्रिया समझाना है। कार्यक्रम के संचालन में PRS Legislative Research के विशेषज्ञों की भूमिका बताई गई है।

 

UCC पर भी बनी हुई है राजनीतिक नजर

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम ऐसे समय हो रहा है जब बिहार में UCC को लेकर JDU के रुख पर राजनीतिक चर्चा चल रही है। हाल में JDU ने कहा है कि वह UCC के प्रस्तावित प्रावधानों का पहले अध्ययन करेगी और उसके बाद इस विषय पर आगे की बातचीत की जाएगी। पार्टी के नेताओं की ओर से केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से इस मुद्दे पर चर्चा करने की बात भी सामने आई है।  इसी वजह से पटना में होने वाली JDU की इस बैठक और प्रशिक्षण कार्यक्रम पर राजनीतिक नजर भी बनी हुई है। हालांकि, कार्यक्रम का घोषित एजेंडा मुख्य रूप से संसदीय प्रशिक्षण है। UCC पर पार्टी की आगे की स्थिति क्या होगी, यह अलग राजनीतिक विमर्श का विषय है।

फिलहाल JDU के विधायकों और विधान पार्षदों को संसदीय प्रक्रियाओं से जुड़े पांच प्रमुख क्षेत्रों—सदन की कार्यवाही और सदस्यों की भूमिका, कानून बनने की प्रक्रिया, शून्यकाल और संकल्प के माध्यम से मुद्दे उठाना, बजट एवं अर्थव्यवस्था तथा नए बदलाव और तकनीक के इस्तेमाल—पर प्रशिक्षण दिया जाएगा। कार्यक्रम का उद्घाटन नीतीश कुमार करेंगे और पार्टी के वरिष्ठ नेता भी इसमें शामिल होंगे।

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