BNT Desk: बिहार और उत्तर प्रदेश के बीच संपर्क की एक महत्वपूर्ण कड़ी सोमवार शाम कुदरत के कहर और प्रशासनिक लापरवाही की भेंट चढ़ गई। बक्सर जिले के ब्रह्मपुर प्रखंड स्थित नैनीजोर गाँव के पास गंगा नदी पर बना पीपा पुल तेज आंधी के कारण ताश के पत्तों की तरह बिखर गया. पुल के तीन हिस्सों में टूट जाने से दोनों राज्यों के बीच आवागमन पूरी तरह ठप हो गया है, जिससे हजारों लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं.
तेज आंधी का दबाव नहीं झेल सका पुल
जानकारी के अनुसार, सोमवार शाम अचानक आए तेज अंधड़ ने गंगा की लहरों में हलचल पैदा कर दी. हवा का दबाव इतना अधिक था कि बिहार राज्य पुल निर्माण निगम द्वारा तैयार किया गया यह पीपा पुल इसे सहन नहीं कर सका. देखते ही देखते पुल के पीपा सेट अलग-अलग होकर तीन दिशाओं में बह गए. पुल का एक हिस्सा बिहार की तट की ओर रह गया, दूसरा उत्तर प्रदेश की ओर बह गया, जबकि तीसरा हिस्सा नदी की मुख्य धारा के बीचों-बीच अटक गया.
पुल पर मची अफरा-तफरी: बाल-बाल बचे लोग
जिस वक्त यह हादसा हुआ, उस समय पुल पर कई बाइक सवार और छोटे वाहन सवार मौजूद थे. आंधी के बीच अचानक पुल के टूटने से वहां चीख-पुकार मच गई. प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि पुल के बीचों-बीच कई वाहन फंस गए, जिससे लोगों की जान पर बन आई थी. गनीमत यह रही कि कोई बड़ा जानी नुकसान नहीं हुआ, लेकिन इस घटना ने यात्रियों के मन में दहशत पैदा कर दी है. घटना के तुरंत बाद पुल के दोनों किनारों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं.
निर्माण की गुणवत्ता पर उठे गंभीर सवाल
नैनीजोर पीपा पुल का टूटना केवल एक प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि निर्माण कार्य में बरती गई लापरवाही की ओर भी इशारा कर रहा है. स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने पुल निर्माण की गुणवत्ता को लेकर तीखा आक्रोश व्यक्त किया है. लोगों का सीधा आरोप है कि पुल के निर्माण में तय मानकों की खुली अनदेखी की गई है.
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लंगर की कमी: ग्रामीणों का कहना है कि पुल को स्थिर रखने के लिए पर्याप्त संख्या में लंगर (Anchors) नहीं लगाए गए थे.
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तकनीकी लापरवाही: लंगर न होने के कारण ही हवा के मामूली दबाव में भी पीपा सेट खिसक कर अलग हो गए.
बार-बार टूटने का सिलसिला
हैरानी की बात यह है कि नैनीजोर पुल के साथ ऐसी घटना पहली बार नहीं हुई है. गौर करने वाली बात है कि पिछले सप्ताह भी तेज आंधी के दौरान यह पुल दो हिस्सों में टूट गया था, जिससे घंटों तक यातायात बाधित रहा था. एक सप्ताह के भीतर दूसरी बार पुल का टूटना विभाग की कार्यप्रणाली पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा करता है. स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछली मरम्मत के नाम पर केवल खानापूर्ति की गई थी.
मरम्मत कार्य जारी, संपर्क फिलहाल कटा
हादसे की सूचना मिलने के बाद विभाग के कर्मचारी और तकनीकी टीम मौके पर पहुँच गई है और पुल को फिर से जोड़ने की कवायद शुरू कर दी गई है. हालांकि, नदी की तेज धारा और मौसम की अनिश्चितता को देखते हुए मरम्मत कार्य में समय लग सकता है. जब तक मरम्मत पूरी नहीं हो जाती, तब तक बिहार और उत्तर प्रदेश के इस मार्ग से आवाजाही पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी.
जवाबदेही तय होनी चाहिए
नैनीजोर पीपा पुल बक्सर और उत्तर प्रदेश के बलिया जिले को जोड़ने वाला एक लाइफलाइन मार्ग है. बार-बार पुल के क्षतिग्रस्त होने से न केवल व्यापार प्रभावित होता है, बल्कि आम जनता की सुरक्षा भी दांव पर लगी रहती है. अब सवाल यह है कि क्या प्रशासन पिछली गलतियों से सीख लेकर पुल को मजबूती से तैयार करेगा या फिर अगले तूफान में एक बार फिर ऐसे ही हादसे का इंतज़ार किया जाएगा?