बिहार में सड़क दुर्घटनाओं पर सख्त नियम: 24 घंटे में वापस मिलेगी गाड़ी, घायलों का ₹1.5 लाख तक मुफ्त इलाज

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BNT Desk: बिहार सरकार ने सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने और पीड़ितों को त्वरित न्याय व चिकित्सा सहायता प्रदान करने के लिए कई ऐतिहासिक फैसले लिए हैं। राज्य परिवहन विभाग और गृह विभाग ने मिलकर नई गाइडलाइंस जारी की हैं, जो न केवल घायलों की जान बचाने पर केंद्रित हैं, बल्कि पुलिसिया कार्रवाई और गाड़ी जब्ती की प्रक्रिया को भी आसान बनाती हैं। अक्सर देखा जाता है कि दुर्घटना के बाद थानों में गाड़ियाँ महीनों सड़ती रहती हैं, जिससे लोगों को काफी परेशानी होती है। अब सरकार ने इस समस्या का समाधान निकाल लिया है।

24 घंटे में गाड़ी लौटाना अनिवार्य

बिहार के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक के निर्देशों के अनुसार, अब सड़क दुर्घटना के बाद जब्त की गई गाड़ियों को लेकर पुलिस मनमानी नहीं कर पाएगी।

  • नया नियम: यदि कोई गाड़ी किसी सड़क हादसे में शामिल है और उसके दस्तावेज सही हैं, तो पुलिस को जांच की औपचारिकताएं पूरी कर 24 घंटे के भीतर गाड़ी उसके मालिक को लौटानी होगी।

  • क्यों लिया गया यह फैसला?: थानों में जमा गाड़ियों के कारण परिसर में कबाड़ जमा हो जाता है और गाड़ी मालिकों को अदालतों के चक्कर काटने पड़ते हैं। इस नियम से आम आदमी को बड़ी राहत मिलेगी।

गाड़ी न मिलने पर यहाँ करें शिकायत

अगर आपकी गाड़ी दुर्घटना के बाद पुलिस ने जब्त की है और 24 घंटे बीत जाने के बाद भी उसे नहीं छोड़ा गया है, तो आपको परेशान होने की जरूरत नहीं है। सरकार ने इसके लिए एक विशेष हेल्पलाइन नंबर जारी किया है।

शिकायत नंबर: 9031829356

यदि पुलिस अधिकारी नियमों का उल्लंघन करते हैं, तो आप इस नंबर पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं। इस शिकायत पर मुख्यालय स्तर से संज्ञान लिया जाएगा और संबंधित थाना प्रभारी से जवाब मांगा जाएगा।

घायलों के लिए ₹1.5 लाख तक का मुफ्त इलाज

सड़क हादसे में सबसे महत्वपूर्ण समय ‘गोल्डन ऑवर’ (दुर्घटना के ठीक बाद का एक घंटा) होता है। इस दौरान इलाज मिलने से अधिकांश जान बचाई जा सकती है। सरकार ने घोषणा की है कि:

  1. कैशलेस इलाज: हादसे में घायल व्यक्ति का 1.5 लाख रुपये तक का इलाज बिल्कुल मुफ्त होगा।

  2. अस्पताल की जिम्मेदारी: राज्य के सभी सरकारी और चयनित निजी अस्पतालों को निर्देश दिया गया है कि वे पैसे की प्रतीक्षा किए बिना तत्काल घायलों का इलाज शुरू करें।

  3. मुआवजा प्रक्रिया: यदि दुर्घटना में मौत हो जाती है, तो परिजनों को मिलने वाली अंतरिम राहत राशि की प्रक्रिया को भी और तेज कर दिया गया है।

पुराने ई-चालान पर होगी कड़ी कार्रवाई

परिवहन विभाग ने उन वाहन मालिकों को भी चेतावनी दी है जिन्होंने लंबे समय से अपना ई-चालान (E-Challan) नहीं भरा है।

  • ब्लैक लिस्टिंग: अब पुराने और पेंडिंग चालान वाले वाहनों को ‘ब्लैक लिस्ट’ में डाल दिया जाएगा।

  • सुविधाएं होंगी बंद: एक बार गाड़ी ब्लैक लिस्ट होने के बाद, आप उस गाड़ी का फिटनेस सर्टिफिकेट, प्रदूषण प्रमाण पत्र (PUC) या इंश्योरेंस रिन्यू नहीं करा पाएंगे।

  • वसूली अभियान: सड़क सुरक्षा समितियों को निर्देश दिया गया है कि वे विशेष अभियान चलाकर बकाया चालान की वसूली करें।

हादसों को रोकने के लिए ‘ब्लैक स्पॉट’ की पहचान

सरकार केवल राहत पर ही नहीं, बल्कि रोकथाम पर भी काम कर रही है। राज्य के सभी जिलों में ऐसे ‘ब्लैक स्पॉट’ (जहाँ बार-बार दुर्घटनाएं होती हैं) की पहचान की गई है। इन जगहों पर:

  • सड़क की बनावट में सुधार किया जा रहा है।

  • चेतावनी बोर्ड और रिफ्लेक्टर लगाए जा रहे हैं।

  • रात के समय पुलिस गश्त और लाइटिंग की व्यवस्था बढ़ाई जा रही है।

आम जनता के लिए जरूरी सुझाव

इन नियमों का लाभ उठाने और सुरक्षित रहने के लिए नागरिकों को कुछ बातों का पालन करना चाहिए:

  1. हेलमेट और सीटबेल्ट: यह न केवल नियम है बल्कि आपकी जान की सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।

  2. दस्तावेज अपडेट रखें: अपनी गाड़ी का इंश्योरेंस और प्रदूषण प्रमाण पत्र हमेशा वैध रखें, ताकि दुर्घटना की स्थिति में आपको क्लेम मिलने में दिक्कत न हो।

  3. मददगार बनें: यदि आप किसी को सड़क पर घायल देखें, तो उसे अस्पताल पहुँचाने में मदद करें। ‘गुड सेमेरिटन’ (नेक मददगार) को अब पुलिस पूछताछ के नाम पर परेशान नहीं करेगी, बल्कि पुरस्कृत करेगी।

सुगम और सुरक्षित सफर की ओर बिहार

बिहार सरकार की यह पहल सराहनीय है। 24 घंटे में गाड़ी लौटाने का नियम पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता लाएगा, वहीं 1.5 लाख रुपये तक के मुफ्त इलाज की सुविधा गरीबों के लिए वरदान साबित होगी। हेल्पलाइन नंबर 9031829356 का होना जनता में सुरक्षा का भाव पैदा करता है। अब जरूरत है कि इन नियमों का जमीनी स्तर पर कड़ाई से पालन हो, ताकि बिहार की सड़कें सबके लिए सुरक्षित बन सकें।

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