बिहार पुलिस के 6800 ASI को प्रमोशन, अब बनेंगे दारोगा; 1990 से पहले नियुक्त पुलिसकर्मी भी शामिल

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BNT Desk: बिहार पुलिस महकमे से जुड़ी बड़ी खबर सामने आई है। बिहार पुलिस मुख्यालय ने करीब 6,800 सहायक अवर निरीक्षकों (ASI) को पुलिस अवर निरीक्षक यानी दारोगा के पद पर प्रोन्नति देने का आदेश जारी किया है। मुख्यालय की ओर से सोमवार को जारी अधिसूचना में प्रोन्नति से जुड़ी प्रक्रिया और शर्तों को स्पष्ट किया गया है। प्रोन्नति पाने वाले पुलिसकर्मियों में बड़ी संख्या ऐसे कर्मचारियों की है, जिन्होंने अपने करियर की शुरुआत सिपाही के पद से की थी। विभाग में वर्षों तक सेवा देने और अलग-अलग स्तरों पर प्रोन्नति पाने के बाद अब ये पुलिसकर्मी दारोगा के पद तक पहुंचेंगे। खास बात यह है कि इनमें 1990 से पहले नियुक्त हुए कई पुलिसकर्मी भी शामिल हैं।

 

6800 ASI को दारोगा का कार्यकारी प्रभार

बिहार पुलिस मुख्यालय के आदेश के अनुसार, करीब 6,800 ASI को दारोगा कोटि में अस्थायी व्यवस्था के तहत कार्यकारी प्रभार दिया गया है। यह फैसला एक सितंबर 2026 और उसके बाद हुई केंद्रीय स्क्रीनिंग समिति की बैठकों में लिए गए निर्णय के आधार पर किया गया है। प्रोन्नति के बाद संबंधित पुलिस पदाधिकारी दारोगा के कार्यकारी प्रभार में काम करेंगे। इसके साथ ही उन्हें दारोगा के वेतनमान का आर्थिक लाभ भी मिलेगा। हालांकि यह आर्थिक लाभ उन्हें उसी तारीख से मिलेगा, जिस दिन वे दारोगा का पदभार ग्रहण करेंगे। इसका मतलब है कि केवल आदेश जारी होने से वेतनमान का लाभ स्वतः प्रभावी नहीं होगा। संबंधित पदाधिकारी के दारोगा का कार्यकारी प्रभार संभालने की तारीख से आर्थिक लाभ देय होगा।

 

1990 से पहले नियुक्त पुलिसकर्मी भी सूची में

इस प्रोन्नति की एक खास बात यह है कि इसमें लंबे समय से बिहार पुलिस में सेवा दे रहे कई पुलिसकर्मी शामिल हैं। इनमें ऐसे कर्मचारी भी हैं, जिनकी नियुक्ति 1990 से पहले सिपाही के पद पर हुई थी। इन पुलिसकर्मियों ने वर्षों की सेवा के दौरान विभागीय स्तर पर अलग-अलग प्रोन्नतियां हासिल कीं। अब उन्हें दारोगा के पद पर कार्यकारी जिम्मेदारी मिलने जा रही है। लंबे समय से पुलिस विभाग में काम कर रहे कर्मचारियों के लिए इसे महत्वपूर्ण प्रोन्नति माना जा रहा है। इससे अनुभवी पुलिसकर्मियों को थानों और पुलिसिंग व्यवस्था में अधिक जिम्मेदारी निभाने का अवसर मिलेगा।

केंद्रीय स्क्रीनिंग समिति के फैसले के आधार पर प्रोन्नति

मुख्यालय की ओर से जारी आदेश में बताया गया है कि प्रोन्नति का फैसला केंद्रीय स्क्रीनिंग समिति की बैठकों में लिए गए निर्णय के आधार पर किया गया है। एक सितंबर और उसके बाद हुई बैठकों में संबंधित मामलों पर विचार किया गया। समिति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पुलिस मुख्यालय ने प्रोन्नति से जुड़ा आदेश जारी किया है। अब संबंधित पुलिस पदाधिकारियों को दारोगा कोटि में कार्यकारी प्रभार ग्रहण करना होगा। इसके बाद आदेश में निर्धारित नियमों के अनुसार उन्हें दारोगा के वेतनमान का आर्थिक लाभ भी प्राप्त होगा।

 

विभागीय या आपराधिक मामला होने पर नहीं मिलेगा लाभ

पुलिस मुख्यालय ने आदेश में एक महत्वपूर्ण शर्त भी स्पष्ट की है। जिन पदाधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही, निगरानी, फौजदारी या आपराधिक मामला विचाराधीन है, उन्हें इस कार्यकारी प्रभार का लाभ नहीं मिलेगा। ऐसे मामलों में संबंधित पुलिस पदाधिकारी को दारोगा का कार्यकारी प्रभार नहीं दिया जाएगा। यानी प्रोन्नति की प्रक्रिया में संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ लंबित मामलों को भी ध्यान में रखा गया है। यह व्यवस्था इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि पुलिस विभाग में जिम्मेदार पद पर कार्यकारी प्रभार देने से पहले संबंधित पदाधिकारी की सेवा स्थिति और लंबित मामलों की जानकारी देखी जाती है।

 

थानों में बढ़ सकती है अधिकारियों की संख्या

करीब 6,800 ASI को दारोगा का कार्यकारी प्रभार मिलने के बाद राज्य की पुलिसिंग व्यवस्था पर भी इसका असर पड़ सकता है। थानों और पुलिस इकाइयों में दारोगा स्तर के अधिकारियों की उपलब्धता बढ़ने से काम के बंटवारे में मदद मिलने की उम्मीद है। दारोगा स्तर के अधिकारी कानून-व्यवस्था, प्राथमिकी से जुड़े मामलों, जांच और पुलिसिंग से संबंधित कई जिम्मेदारियां संभालते हैं। ऐसे में अनुभवी ASI को इस पद की जिम्मेदारी मिलने से विभाग के कामकाज को मजबूती मिल सकती है।

 

पुराने और लंबित मामलों के निपटारे में मदद की उम्मीद

पुलिस विभाग में बड़ी संख्या में मामलों की जांच और अन्य जिम्मेदारियां अधिकारियों के स्तर पर लंबित रहती हैं। ऐसे में दारोगा के कार्यकारी प्रभार में अधिकारियों की संख्या बढ़ने से मामलों के निपटारे की प्रक्रिया में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है। खासकर ऐसे पुलिसकर्मी जिन्होंने लंबे समय तक विभाग में काम किया है, उन्हें स्थानीय स्तर पर पुलिसिंग और जांच का अनुभव है। इसलिए उन्हें अधिक जिम्मेदारी मिलने से थानों के कामकाज में इसका फायदा मिलने की संभावना है। हालांकि इसका वास्तविक असर आने वाले समय में पुलिस इकाइयों में तैनाती और जिम्मेदारियों के वितरण के बाद स्पष्ट होगा।

 

आम लोगों को भी मिल सकता है फायदा

पुलिस मुख्यालय के इस फैसले का असर आम लोगों पर भी पड़ सकता है। यदि थानों में अधिकारियों की उपलब्धता बढ़ती है तो शिकायतों की सुनवाई, मामलों की जांच और अन्य पुलिसिंग गतिविधियों में तेजी लाने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में भी अधिक अधिकारियों की मौजूदगी पुलिस को बेहतर तरीके से काम करने में सहायता कर सकती है। हालांकि केवल प्रोन्नति से ही पुलिसिंग व्यवस्था में व्यापक सुधार सुनिश्चित नहीं होता। इसका लाभ तभी पूरी तरह दिखाई देगा, जब प्रोन्नत अधिकारियों की उचित तैनाती हो और उन्हें उनकी जिम्मेदारी के अनुसार कार्य करने का पर्याप्त अवसर मिले।

 

बिहार पुलिस में लंबे समय से सेवा दे रहे कर्मचारियों को बड़ी जिम्मेदारी

6800 ASI को दारोगा का कार्यकारी प्रभार दिए जाने का फैसला बिहार पुलिस के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसमें बड़ी संख्या में पुराने और अनुभवी पुलिसकर्मी शामिल हैं, जिन्होंने सिपाही के पद से अपनी सेवा शुरू की और विभागीय प्रोन्नति के जरिए अब दारोगा स्तर तक पहुंचे हैं। मुख्यालय ने लंबित विभागीय और आपराधिक मामलों वाले पदाधिकारियों को कार्यकारी प्रभार से अलग रखते हुए नियमों के अनुसार प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। अब संबंधित ASI के कार्यकारी दारोगा का पदभार ग्रहण करने के बाद उन्हें दारोगा के वेतनमान का आर्थिक लाभ मिलेगा। आने वाले समय में इन अधिकारियों की तैनाती और जिम्मेदारियों के आधार पर बिहार की पुलिसिंग व्यवस्था पर इस फैसले का असर देखने को मिलेगा।

 

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