BNT Desk: बिहार सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल की उपलब्धता सुनिश्चित करने और बुनियादी ढांचों को आधुनिक बनाने के लिए एक अत्यंत महत्वाकांक्षी योजना पर काम कर रही है। राज्य की सभी जलापूर्ति योजनाओं को अब सौर ऊर्जा (Solar Energy) से जोड़ने की तैयारी की जा रही है। इस पहल की औपचारिक शुरुआत अगस्त माह से चरणबद्ध तरीके से की जाएगी। यह कदम ग्रामीण इलाकों में जलापूर्ति की बिजली पर निर्भरता को कम करने के लिए मील का पत्थर साबित होगा।
बिजली कटौती और बिल से मिलेगी राहत
विभागीय अधिकारियों के अनुसार, वर्तमान में संचालित कई नल-जल योजनाएं अक्सर बिजली आपूर्ति बाधित होने के कारण ठप हो जाती हैं, जिससे ग्रामीणों को पानी के लिए परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा, बिजली के भारी-भरकम बिलों का भुगतान करना भी योजनाओं के संचालन में एक बड़ी आर्थिक चुनौती बन गया है। सोलर सिस्टम के लगने से पंपों को चलाने के लिए आवश्यक बिजली सौर ऊर्जा के माध्यम से मिलेगी। इससे बिजली कटौती का जलापूर्ति पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा और गांवों में नियमित एवं निर्बाध जलापूर्ति सुनिश्चित हो सकेगी। साथ ही, इससे सरकारी खजाने पर पड़ने वाला बिजली बिल का आर्थिक बोझ भी काफी हद तक कम हो जाएगा।
PHED की कार्ययोजना और सर्वे
जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) ने इस बदलाव को धरातल पर उतारने के लिए एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभाग का लक्ष्य राज्य की सभी संचालित नल-जल योजनाओं का बारीकी से आकलन करना है। सर्वे के दौरान यह देखा जाएगा कि किन-किन स्थानों पर सोलर पैनल और आवश्यक उपकरणों को स्थापित करने के लिए पर्याप्त जगह उपलब्ध है। जहां भी तकनीकी रूप से अनुकूल स्थिति होगी, वहां सौर ऊर्जा के उपकरण प्राथमिकता के आधार पर लगाए जाएंगे।
तकनीक और बैटरी बैकअप का तालमेल
विभाग ने इस बात का विशेष ध्यान रखा है कि सौर ऊर्जा आधारित व्यवस्था खराब मौसम में भी विफल न हो। इसके लिए आवश्यकतानुसार प्रत्येक संयंत्र के साथ अत्याधुनिक बैटरी बैकअप की व्यवस्था की जाएगी। इससे बादल छाए रहने या बारिश के दिनों में, जब धूप कम होती है, तब भी जलापूर्ति बाधित नहीं होगी। विभाग का मानना है कि सौर ऊर्जा पर आधारित यह नई व्यवस्था न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि नल-जल योजनाओं के संचालन को अधिक किफायती, टिकाऊ और विश्वसनीय बनाने में भी मदद करेगी।
ऊर्जा क्षेत्र में बिहार की नई पहल
बिहार में पिछले कुछ समय से सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कई बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम किया जा रहा है। सरकार का दृष्टिकोण राज्य को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना और हरित ऊर्जा (Green Energy) को बढ़ावा देना है। पिछले दिनों उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बीपीएल (BPL) परिवारों को मुफ्त सौर ऊर्जा पैनल उपलब्ध कराने की घोषणा की थी, जिससे गरीब परिवारों को भी बिजली संकट से राहत मिल सके। अब नल-जल योजनाओं को सीधे सौर ऊर्जा से जोड़ने का निर्णय इस श्रृंखला में एक और बड़ा कदम है।
ग्रामीण विकास के लिए एक दूरदर्शी कदम
यह पहल ग्रामीण बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की एक व्यापक नीति का हिस्सा है। पारंपरिक बिजली व्यवस्था पर निर्भरता कम करके सोलर सिस्टम की ओर बढ़ना राज्य के लिए एक दूरगामी परिणाम देने वाला निर्णय है। इससे भविष्य में रखरखाव का खर्च कम होगा और योजनाओं का प्रबंधन अधिक सुगमता से हो सकेगा। पीएचईडी का मानना है कि सौर ऊर्जा का यह विस्तार न केवल ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता को पूरा करेगा, बल्कि यह आत्मनिर्भर बिहार के निर्माण में भी सहायक सिद्ध होगा। आने वाले महीनों में, जब यह परियोजना धरातल पर उतरेगी, तो बिहार के ग्रामीण इलाकों में जल संकट की समस्याओं का स्थायी समाधान मिलना शुरू हो जाएगा।