बिहार विधान परिषद में नई पारी का आगाज: पवन सिंह समेत 10 नए सदस्यों ने ली शपथ

BiharNewsAuthor
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BNT Desk: आज 1 जुलाई 2026 की शाम बिहार की सियासत के लिए एक महत्वपूर्ण दिन रहा। पटना में स्थित विधान परिषद एनेक्सी के मुख्य सभागार में आयोजित एक गरिमामयी समारोह में विधान परिषद के 10 नवनिर्वाचित सदस्यों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली। विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने सभी नवनिर्वाचित सदस्यों को सदस्यता की शपथ दिलाई।

भोजपुरी सुपरस्टार पवन सिंह की संसदीय पारी

इस शपथ ग्रहण समारोह में सबसे अधिक चर्चा भोजपुरी सिनेमा के ‘पावर स्टार’ पवन सिंह की रही। भारतीय जनता पार्टी (BJP) द्वारा उच्च सदन में भेजे जाने के बाद पवन सिंह ने आज पहली बार एक जनप्रतिनिधि के रूप में अपनी संसदीय पारी शुरू की। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि भाजपा ने उन्हें विधान परिषद भेजकर शाहाबाद और भोजपुरी बेल्ट में अपने सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को साधने की एक बड़ी रणनीति तैयार की है। अब पवन सिंह केवल एक सेलिब्रिटी नहीं, बल्कि नीति-निर्धारक के रूप में बिहार की समस्याओं और विकास के मुद्दों को सदन में उठाएंगे।

शपथ लेने वाले प्रमुख सदस्य

आज शपथ लेने वाले 10 सदस्यों में सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों का प्रतिनिधित्व शामिल है। मुख्य रूप से निम्नलिखित सदस्यों ने उच्च सदन में अपनी जगह बनाई:

  • भारतीय जनता पार्टी (BJP): पवन सिंह, संजय प्रकाश मयूख, अनिल ठाकुर और शीला पंडित।

  • जनता दल (यूनाइटेड) (JDU): निशांत कुमार, भारती मेहता, शिवानी देवी प्रजापति और ललन प्रसाद।

  • लोक जनशक्ति पार्टी (रामविलास): अशरफ अंसारी।

  • राष्ट्रीय जनता दल (RJD): डॉ. सुनील कुमार सिंह।

 

निर्विरोध निर्वाचन और महत्व

यह चुनाव इसलिए भी खास रहा क्योंकि इन 10 सीटों के लिए केवल 10 ही नामांकन दाखिल हुए थे, जिसके चलते सभी उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित किए गए। शपथ लेने वाले 10 सदस्यों में से 8 सदस्य ऐसे हैं जो पहली बार सदन की सदस्यता ले रहे हैं।

इस अवसर पर जदयू के वरिष्ठ नेता ललन प्रसाद ने पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा रिक्त की गई सीट से अपनी जिम्मेदारी संभाली है, वहीं राजद ने अपने मुखर नेता डॉ. सुनील कुमार सिंह पर पुनः विश्वास जताकर उच्च सदन में विपक्ष की आवाज को मजबूती देने का संदेश दिया है।

भविष्य की राजनीति का संकेत

यह शपथ ग्रहण समारोह महज एक संवैधानिक औपचारिकता नहीं, बल्कि बिहार की बदलती राजनीतिक बिसात का संकेत है। जहां एक ओर सत्ता पक्ष (NDA) अपनी प्रशासनिक मजबूती और जनाधार विस्तार पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, वहीं दूसरी ओर विपक्ष भी सदन में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए तैयार है। यह नया ‘मिजाज’ आने वाले दिनों में बिहार की विकास योजनाओं और राज्य की राजनीति पर गहरा प्रभाव डालेगा।

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