BNT Desk: भागलपुर, नवगछिया और आसपास के जिलों के लाखों लोगों के लिए एक बहुत ही राहत भरी खबर सामने आई है। लंबे समय से आम जनता और व्यापारियों के लिए मुसीबत का सबब बने विक्रमशिला सेतु पर तीसरे बेली ब्रिज (अस्थायी लोहे का पुल) का ढांचा अब लगभग पूरी तरह तैयार हो चुका है। पिछले कई दिनों से यहां युद्धस्तर पर काम चल रहा था, जिसमें अब काफी तेजी आ गई है। अधिकारियों और इंजीनियरों की मानें तो अगले तीन से चार दिनों के भीतर इस तीसरे पुल का निर्माण कार्य पूरी तरह संपन्न कर लिया जाएगा।
टूट गया था मुख्य स्लैब, नाव के सहारे थे लोग
गंगा नदी पर बना विक्रमशिला सेतु इस इलाके की लाइफलाइन माना जाता है। पिछले दिनों इस पुल का एक मुख्य स्लैब (हिस्सा) अचानक टूटकर सीधे गंगा नदी में गिर गया था। इस भीषण हादसे के बाद से ही पुल पर आवागमन ठप हो गया और लोगों की मुश्किलें दिन-ब-दिन बढ़ती चली गईं।
रोजाना हजारों लोगों को घंटों लंबे महाजाम से जूझना पड़ रहा था। स्थिति इतनी खराब हो चुकी थी कि मरीजों को ले जा रही एंबुलेंस जाम में फंसी रहती थीं और आम यात्रियों को मजबूरी में नाव का सहारा लेकर जान जोखिम में डालते हुए गंगा नदी पार करनी पड़ रही थी। व्यापारिक माल ढुलाई ठप होने से कारोबारियों को करोड़ों का नुकसान हो रहा था।
2. क्यों पड़ी तीन बेली ब्रिज की जरूरत?
मुख्य स्लैब टूटने के बाद सरकार ने पूरे पुल की तकनीकी और सुरक्षा जांच करवाई। विशेषज्ञों की जांच में एक बड़ा खुलासा हुआ कि टूटे हुए हिस्से के आगे और पीछे के दो अन्य स्पैन (खंभों के बीच की दूरी) भी अंदरूनी रूप से काफी कमजोर हो चुके हैं।
चूंकि पक्के पुल को दोबारा ठीक करने में लंबा वक्त लगता, इसलिए जनता की परेशानी को देखते हुए विशेषज्ञों ने तुरंत तीन अस्थायी ‘बेली ब्रिज’ (लोहे के मजबूत रेडीमेड पुल) बनाने की सलाह दी।
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पहला और दूसरा ब्रिज: प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए दो बेली ब्रिज पहले ही बनाकर तैयार कर लिए थे।
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तीसरा और आखिरी ब्रिज: अब करीब 24 मीटर लंबे इस आखिरी और सबसे महत्वपूर्ण तीसरे ब्रिज का काम अपने अंतिम चरण में है। बुधवार को भी इंजीनियरों और मजदूरों की पूरी टीम लोहे के एंगल जोड़ने और उस पर मजबूत लोहे की प्लेटें बिछाने के काम में जुटी रही।
3. मौसम की मार के बावजूद दिन-रात चला काम
इस निर्माण कार्य के दौरान बीच में मौसम ने भी इंजीनियरों की परीक्षा ली। पिछले दिनों अचानक आए तेज आंधी-तूफान और मूसलाधार बारिश की वजह से सुरक्षा के लिहाज से काम को कुछ घंटों के लिए रोकना पड़ा था। लेकिन जैसे ही मौसम साफ हुआ, निर्माण एजेंसी ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी। अधिकारियों का दावा है कि अब यहां दिन-रात (24 घंटे) शिफ्टों में काम चल रहा है ताकि समय सीमा के भीतर जनता को राहत दी जा सके।
4. IIT पटना की टीम करेगी अंतिम जांच, तभी शुरू होगा परिचालन
पुल का निर्माण भले ही तीन-चार दिनों में पूरा हो जाएगा, लेकिन इस पर तुरंत गाड़ियां दौड़ाने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सुरक्षा के लिहाज से सबसे अहम कदम इसके बाद उठाया जाएगा।
कड़ा सुरक्षा मानक: बेली ब्रिज पूरी तरह तैयार होने के बाद IIT पटना के विशेषज्ञों की एक स्पेशल टीम भागलपुर पहुंचेगी। यह टीम तीनों बेली ब्रिज की मजबूती, वजन सहने की क्षमता (भार क्षमता) और सभी सुरक्षा मानकों की बारीकी से जांच करेगी।
जब तक IIT पटना के वैज्ञानिक इस पुल को पूरी तरह से ‘फिट और सुरक्षित’ घोषित नहीं कर देते, तब तक आम जनता के लिए पुल नहीं खोला जाएगा।
5. पहले चलेंगे हल्के वाहन, फिर मिलेगी ट्रकों को इजाजत
प्रशासन की योजना के अनुसार, हरी झंडी मिलने के बाद सबसे पहले ट्रायल (परिक्षण) के तौर पर केवल हल्के वाहनों (जैसे मोटरसाइकिल, कार और ऑटो) को ही पुल से गुजरने की अनुमति दी जाएगी। हल्के वाहनों के सफल परिचालन और पुल के व्यवहार को देखने के बाद ही धीरे-धीरे भारी वाहनों (जैसे बस और ट्रक) को इस पर से ले जाने का फैसला किया जाएगा। यदि सब कुछ योजना के मुताबिक रहा, तो बहुत जल्द भागलपुर और नवगछिया के बीच यातायात पूरी तरह सामान्य हो जाएगा और लोगों को इस भीषण समस्या से हमेशा के लिए आजादी मिल जाएगी।