“बाहुबली” की बहू भी सुरक्षित नहीं? औरंगाबाद गेस्ट हाउस में आधी रात को ‘गुंडई’, बंदूक के दम पर खुलवाए कमरे

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BNT Desk: बिहार के औरंगाबाद से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने राज्य की कानून-व्यवस्था और वीआईपी सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ सरकार सुशासन का दावा करती है, वहीं दूसरी ओर सत्ता पक्ष के विधायक की पत्नी और एक माननीय जज तक सुरक्षित नहीं हैं। सरकारी गेस्ट हाउस में आधी रात को जो ‘तांडव’ हुआ, उसने पूरे बिहार को चौंका दिया है।

आधी रात का ‘हाई-वोल्टेज’ ड्रामा

यह सनसनीखेज मामला 21 अप्रैल की देर रात (करीब 3 बजे) का है। औरंगाबाद के जिला अतिथि गृह (District Guest House) में सब कुछ शांत था, तभी गाड़ियों का एक काफिला वहां पहुंचता है। इसमें से करीब 15-20 लोग उतरते हैं, जिनका नेतृत्व खुद को युवा नेता बताने वाला नीतीश द्विवेदी कर रहा था।

एफआईआर (FIR) के मुताबिक, इन लोगों ने जबरन अंदर घुसने की कोशिश की। जब वहां तैनात स्टाफ ने यह कहकर रोका कि “सभी कमरे बुक हैं और लोग सो रहे हैं,” तो उन्हें पिस्तौल दिखाकर धमकाया गया। अपराधियों ने डरा-धमकाकर गेस्ट हाउस पर कब्जा कर लिया और कमरों की ‘तलाशी’ लेने लगे।

रूम नंबर 7: जेडीयू विधायक की पत्नी के साथ बदसलूकी

अपराधियों की हिमाकत इतनी बढ़ गई कि उन्होंने रूम नंबर 7 का दरवाजा जबरन खुलवाया। उस कमरे में जेडीयू विधायक चेतन आनंद (पूर्व सांसद आनंद मोहन के पुत्र) की पत्नी ठहरी हुई थीं।

  • खौफ का मंजर: आधी रात को अचानक हथियारबंद लोगों का कमरे में घुसना किसी भी महिला के लिए डरावना अनुभव हो सकता है।

  • विरोध: विधायक की पत्नी ने इस बदतमीजी का कड़ा विरोध किया और नाराजगी जताई, लेकिन अपराधियों पर इसका कोई असर नहीं पड़ा।

  • जज के कमरे पर हमला: इसके बाद अपराधियों ने उस कमरे को भी खुलवाने की कोशिश की जिसमें एक जज ठहरे हुए थे। हालांकि, यहां स्टाफ के विरोध और पुलिस की भनक लगने के कारण वे सफल नहीं हो पाए।

कौन है नीतीश द्विवेदी? 6000 वोट और इतनी बड़ी ‘गुंडई’!

इस पूरे कांड का मुख्य आरोपी नीतीश द्विवेदी है। उसकी प्रोफाइल किसी बड़े नेता की नहीं है, फिर भी उसका रसूख चौंकाने वाला है:

  1. सियासी बैकग्राउंड: वह पहले मुकेश सहनी की पार्टी (VIP) से जुड़ा था।

  2. चुनावी रिकॉर्ड: महाराजगंज सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा और महज 6000 वोट मिले।

  3. आर्थिक स्थिति: हलफनामे के अनुसार सालाना आय करीब 4 लाख रुपये है।

बड़ा सवाल: जिसकी घोषित आय इतनी कम है और राजनीतिक जमीन इतनी कमजोर, वह 20 गाड़ियों के काफिले और दर्जनों हथियारबंद गार्ड्स के साथ कैसे घूमता है? उसे सरकारी गेस्ट हाउस में घुसकर दबंगई करने की हिम्मत कौन दे रहा है?

पुलिस की कार्रवाई: हथियार बरामद, मुख्य आरोपी फरार

जब हंगामा बढ़ा और पुलिस मौके पर पहुंची, तो मुख्य आरोपी नीतीश द्विवेदी अंधेरे का फायदा उठाकर फरार हो गया। हालांकि, पुलिस ने उसके कुछ साथियों को गिरफ्तार किया है।

  • बरामदगी: गिरफ्तार आरोपियों के पास से पिस्तौल और जिंदा कारतूस बरामद हुए हैं।

  • सिस्टम पर सवाल: यह मामला सीधे तौर पर सिस्टम की खामी को दर्शाता है। एक अपराधी सरकारी भवन में घुसकर वीआईपी लोगों के कमरों के दरवाजे बंदूक के दम पर खुलवाता रहा और प्रशासन को भनक तक नहीं लगी।

रसूख और संरक्षण की जांच जरूरी

बिहार की जनता अब यह पूछ रही है कि क्या अब 6000 वोट पाने वाले छुटभैये नेता भी ‘बाहुबलियों’ के परिवार और जजों को निशाना बनाएंगे? आनंद मोहन की बहू और चेतन आनंद की पत्नी के साथ हुई यह घटना बताती है कि बिहार में वीआईपी कल्चर के नाम पर अपराधी किस कदर बेखौफ हैं।

औरंगाबाद का यह ‘गेस्ट हाउस कांड’ सिर्फ एक छेड़छाड़ या हंगामे का मामला नहीं है। यह सत्ता और रसूख के दुरुपयोग की पराकाष्ठा है। अगर एक विधायक की पत्नी सुरक्षित नहीं है, तो आम महिलाओं की सुरक्षा का क्या होगा? पुलिस के लिए अब नीतीश द्विवेदी की गिरफ्तारी और उसे संरक्षण देने वाले चेहरों को बेनकाब करना एक बड़ी चुनौती है।

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