BNT Desk: देश के विकास कार्यों और बजटीय जरूरतों को पूरा करने के लिए भारत सरकार ने बाजार से कर्ज जुटाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी आधिकारिक सूचना के अनुसार, केंद्र सरकार 24 अप्रैल 2026 को सरकारी प्रतिभूतियों (Government Securities – G-Sec) की बड़ी नीलामी करने जा रही है। इस नीलामी के माध्यम से सरकार का लक्ष्य कुल 32,000 करोड़ रुपये जुटाने का है।
बॉन्ड्स का गणित: कहां से कितना आएगा पैसा?
सरकार ने इस 32,000 करोड़ रुपये के लक्ष्य को चार अलग-अलग श्रेणियों में विभाजित किया है। यह विभाजन निवेश की अवधि और ब्याज दर (कूपन रेट) के आधार पर किया गया है:
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मध्यम अवधि के बॉन्ड्स: सरकार 6.03% GS 2029 और 6.68% GS 2033 सिक्योरिटीज के जरिए 11,000-11,000 करोड़ रुपये जुटाएगी। यानी इन दो माध्यमों से कुल 22,000 करोड़ रुपये का फंड आएगा।
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लंबी अवधि के बॉन्ड्स: भविष्य की बड़ी योजनाओं के लिए 7.24% GS 2055 बॉन्ड्स के जरिए 5,000 करोड़ रुपये जुटाए जाएंगे।
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ग्रीन बॉन्ड्स (SGrB): पर्यावरण अनुकूल परियोजनाओं को बढ़ावा देने के लिए सरकार New GOI SGrB 2056 (सॉवरेन ग्रीन बॉन्ड्स) के माध्यम से भी 5,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य लेकर चल रही है।
प्राइमरी डीलर्स की भूमिका और कड़े नियम
सरकारी प्रतिभूतियों की नीलामी में ‘प्राइमरी डीलर्स’ (PD) रीढ़ की हड्डी की तरह काम करते हैं। ये वे संस्थाएं होती हैं जो सरकार और निवेशकों के बीच सेतु का काम करती हैं। नीलामी को सफल बनाने के लिए RBI ने इनके लिए ‘मिनिमम अंडरराइटिंग कमिटमेंट’ (MUC) तय किया है।
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शॉर्ट टर्म टारगेट: 2029 और 2033 में मैच्योर होने वाली सिक्योरिटीज के लिए प्रत्येक प्राइमरी डीलर को कम से कम 262 करोड़ रुपये की बोली लगानी अनिवार्य है।
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लॉन्ग टर्म टारगेट: 2055 और 2056 वाली प्रतिभूतियों के लिए यह न्यूनतम सीमा 120 करोड़ रुपये रखी गई है।
यह नियम इसलिए बनाया गया है ताकि नीलामी के दौरान फंड की कमी न हो और सरकार का लक्ष्य हर हाल में पूरा हो सके।
ई-कुबेर (e-Kuber) पर होगी डिजिटल नीलामी
आधुनिक बैंकिंग प्रणाली का उपयोग करते हुए यह पूरी प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल होगी।
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नीलामी की तारीख: 24 अप्रैल 2026 (शुक्रवार)।
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प्लेटफॉर्म: बोली लगाने के लिए RBI के कोर बैंकिंग सॉल्यूशन यानी e-Kuber सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा।
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समय सीमा: नीलामी के लिए समय बहुत सीमित रखा गया है। डीलर्स को सुबह 09:00 बजे से 09:30 बजे के बीच (सिर्फ 30 मिनट) अपनी इलेक्ट्रॉनिक बोलियां जमा करनी होंगी।
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पद्धति: यह नीलामी ‘मल्टीपल प्राइस-बेस्ड मेथड’ (Multiple Price-Based Method) के आधार पर की जाएगी, जिसमें अलग-अलग बोलियों के आधार पर आवंटन होगा।
डीलर्स को क्या मिलेगा लाभ?
इस महत्वपूर्ण आर्थिक प्रक्रिया में शामिल होने वाले प्राइमरी डीलर्स को उनके जोखिम और सेवाओं के बदले ‘अंडरराइटिंग कमीशन’ (Underwriting Commission) दिया जाता है। रिजर्व बैंक ने स्पष्ट किया है कि यह कमीशन सीधे डीलर्स के करंट अकाउंट में जमा कर दिया जाएगा। भुगतान उसी दिन होगा जिस दिन सरकारी सिक्योरिटीज आधिकारिक तौर पर जारी की जाएंगी। इससे बाजार में तरलता (Liquidity) बनी रहती है और बैंकिंग सिस्टम सुचारू रूप से चलता है।
क्यों जरूरी है यह नीलामी?
जब भी सरकार को बुनियादी ढांचे (Infrastructure), शिक्षा, स्वास्थ्य या अन्य कल्याणकारी योजनाओं पर खर्च करने के लिए अतिरिक्त धन की आवश्यकता होती है, तो वह बाजार से कर्ज लेती है। इसके बदले निवेशकों को सुरक्षित सरकारी बॉन्ड्स दिए जाते हैं, जिन पर उन्हें तय ब्याज मिलता है। 32,000 करोड़ रुपये की यह नीलामी भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती और सरकार की वित्तीय स्थिरता को बनाए रखने के लिए एक रणनीतिक कदम है।