नवादा:झारखंड से आए हाथियों ने मचाई तबाही; 60 वर्षीय बुजुर्ग की दर्दनाक मौत, रजौली-गोविंदपुर में दहशत

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BNT Desk: बिहार का नवादा जिला इन दिनों एक भीषण प्राकृतिक संकट से जूझ रहा है। यहाँ के जंगलों से सटे गांवों में जंगली हाथियों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि लोग अपने घरों से निकलने में भी थर-थर कांप रहे हैं। रविवार की सुबह गोविंदपुर थाना क्षेत्र के आजाद नगर मोहल्ले के लिए काल बनकर आई, जहाँ एक हाथी ने एक मासूम ग्रामीण को अपनी बर्बरता का शिकार बना लिया। इस घटना ने न केवल एक परिवार को उजाड़ दिया, बल्कि पूरे जिले की सुरक्षा व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।

सुबह की सैर बनी आखिरी सफर

मिली जानकारी के अनुसार, गोविंदपुर के आजाद नगर निवासी 60 वर्षीय बच्चू राम रविवार सुबह करीब 5 बजे घर से बाहर निकले थे। वह नित्य क्रिया के लिए घर के पास ही गए थे, तभी अंधेरे का फायदा उठाकर पीछे से एक विशालकाय हाथी उनके करीब आ गया।

इससे पहले कि बच्चू राम कुछ समझ पाते या भागने की कोशिश करते, हाथी ने उन्हें अपनी सूंड में जकड़ लिया। प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों के मुताबिक, हाथी ने उन्हें हवा में उठाकर बार-बार जमीन पर पटका और फिर अपने भारी पैरों से कुचल दिया। हमले की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बच्चू राम की घटनास्थल पर ही दर्दनाक मौत हो गई।

एक महीने में तीन शिकार

नवादा के रजौली और गोविंदपुर वन क्षेत्रों में हाथियों का हमला अब कोई नई बात नहीं रह गई है। पिछले एक महीने के भीतर हाथियों के इस झुंड ने तीन लोगों को मौत के घाट उतार दिया है।

  • माधोपुर गांव समेत दर्जनों इलाकों में हाथियों ने दर्जनों घरों को ढहा दिया है।

  • किसानों की मेहनत से उगाई गई एकड़ो फसल को हाथियों ने पैरों तले रौंद डाला है। ग्रामीणों का कहना है कि वे रात भर जागकर पहरा देते हैं, लेकिन हाथियों का झुंड कब किस तरफ से हमला कर दे, इसका कोई ठिकाना नहीं है।

वन विभाग के खिलाफ फूटा ग्रामीणों का गुस्सा

बच्चू राम की मौत के बाद ग्रामीणों का धैर्य जवाब दे गया। सैकड़ों की संख्या में लोगों ने सड़क पर उतरकर वन विभाग के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और मार्ग को जाम कर दिया। ग्रामीणों का आरोप है कि विभाग केवल खानापूर्ति कर रहा है।

“जब भी कोई मरता है, अधिकारी आते हैं और मुआवजा देने की बात करके चले जाते हैं। लेकिन हमें पैसा नहीं, सुरक्षा चाहिए। वन विभाग के पास हाथियों को रोकने का कोई ठोस प्लान नहीं है।” — एक आक्रोशित ग्रामीण

आखिर क्यों बढ़ रहा है हमला?

वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि ये हाथी पड़ोसी राज्य झारखंड के जंगलों से भटककर बिहार की सीमा में दाखिल हुए हैं। इसके पीछे मुख्य रूप से दो कारण हैं:

  1. भोजन की तलाश: जंगलों में फलदार वृक्षों की कमी के कारण हाथी गन्ने और धान की फसलों की महक से गांवों की ओर खिंचे चले आते हैं।

  2. प्राकृतिक गलियारों का विनाश: जंगलों का लगातार कटना और इंसानी बस्तियों का जंगलों के करीब बसना हाथियों के रास्ते में बाधा पैदा कर रहा है, जिससे वे हिंसक हो रहे हैं।

प्रशासनिक विफलता या संसाधनों की कमी?

प्रदर्शन कर रहे लोगों का कहना है कि वन विभाग के पास न तो हाथियों को बेहोश करने की समुचित सुविधा है और न ही प्रशिक्षित टीमें। विभाग के कर्मचारी केवल टॉर्च जलाकर और पटाखे फोड़कर हाथियों को भगाने की कोशिश करते हैं। इससे हाथी डरने के बजाय और अधिक आक्रामक हो जाते हैं और कुछ समय बाद वापस लौट आते हैं।

स्थायी समाधान की दरकार

गोविंदपुर की इस घटना ने प्रशासन को गहरी नींद से जगाने की कोशिश की है। अगर समय रहते हाथियों को उनके प्राकृतिक आवास में वापस नहीं भेजा गया या उनके लिए कोई सुरक्षित घेरा (Solar Fencing) नहीं बनाया गया, तो नवादा के जंगलों से सटे गांवों में लाशों के गिरने का यह सिलसिला रुकने वाला नहीं है। फिलहाल पुलिस और प्रशासन ने लोगों को समझा-बुझाकर जाम हटवाया है, लेकिन डर का माहौल अब भी बरकरार है।

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