बिहार: टेंडर घोटाला मामला में संजीव हंस के बाद अब दो और IAS अधिकारियों पर शिकंजा, छापेमारी से पहले हुए फरार!

BiharNewsAuthor
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BNT Desk: बिहार के चर्चित टेंडर घोटाला मामले में जांच अब और तेज हो गई है। पूर्व IAS अधिकारी संजीव हंस के बाद अब दो और IAS अधिकारियों के नाम सामने आए हैं। विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने रिशु श्री से पूछताछ के बाद मिले इनपुट के आधार पर IAS योगेश कुमार सागर, IAS अभिलाषा शर्मा और मातृसवा इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक पवन कुमार के ठिकानों पर छापेमारी की तैयारी की।

लेकिन जब SVU की टीम अधिकारियों के ठिकानों पर पहुंची तो दोनों IAS अधिकारी अपने-अपने आवास पर मौजूद नहीं मिले। टीम को दोनों जगहों पर ताला लटका हुआ मिला। इसके बाद जांच एजेंसी ने दोनों अधिकारियों को फरार घोषित कर दिया है। बताया जा रहा है कि SVU की टीम सुबह-सुबह IAS योगेश कुमार सागर के पटना के गर्दनीबाग स्थित आवास पर पहुंची थी, लेकिन वहां ताला लगा हुआ था। वहीं IAS अभिलाषा शर्मा के पटना के नेहरू पथ स्थित आवास पर भी टीम को यही स्थिति मिली जांच एजेंसी अब दोनों अधिकारियों की तलाश में जुट गई है।

 

रिशु श्री से पूछताछ के बाद बढ़ी जांच की रफ्तार

टेंडर घोटाला मामले में कारोबारी और ठेकेदार रिशु श्री पिछले तीन दिनों से SVU की रिमांड पर हैं। पूछताछ के दौरान मिले इनपुट के आधार पर जांच एजेंसी कई दस्तावेजों को खंगाल रही है आरोप है कि IAS योगेश कुमार सागर और IAS अभिलाषा शर्मा ने रिशु श्री की कंपनियों को सरकारी टेंडर दिलाने में मदद की। हालांकि मामले की जांच जारी है और आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच के बाद ही होगी।

 

कौन हैं IAS योगेश कुमार सागर?

IAS योगेश कुमार सागर बिहार कैडर के 2017 बैच के अधिकारी हैं। प्रशासनिक गलियारों में उन्हें तेज-तर्रार और तकनीक आधारित कार्यशैली के लिए जाना जाता रहा है।

उनकी प्रमुख जिम्मेदारियां रही हैं—

– फोर्ब्सगंज (अररिया) में SDO
– भागलपुर नगर निगम में नगर आयुक्त
– बिहार अर्बन इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (BUIDCO) के MD
– समाज कल्याण विभाग में निदेशक

BUIDCO में रहते हुए उन्होंने कई शहरी विकास परियोजनाओं की निगरानी की थी। इसी दौरान कई बड़े टेंडर और इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट स्वीकृत हुए थे।

 

IAS अभिलाषा शर्मा का प्रोफाइल

IAS अभिलाषा शर्मा बिहार कैडर की 2014 बैच की अधिकारी हैं।

उन्होंने कई अहम पदों पर काम किया है—

– सीतामढ़ी की जिलाधिकारी (DM)
– वित्त विभाग में संयुक्त सचिव
– जीविका परियोजना में वरिष्ठ प्रशासनिक जिम्मेदारी
– ग्रामीण विकास विभाग से जुड़ी जिम्मेदारियां

उन्हें प्रशासनिक दक्षता और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए जाना जाता रहा है।

 

कैसे शुरू हुआ पूरा विवाद?

पूरे मामले के केंद्र में कारोबारी और ठेकेदार रिशु श्री का नाम सामने आया। जांच एजेंसियों को कुछ सरकारी टेंडरों और वित्तीय लेन-देन में कथित अनियमितताओं की जानकारी मिली। आरोप है कि कुछ सरकारी परियोजनाओं में नियमों के विपरीत लाभ पहुंचाया गया और वित्तीय गड़बड़ियां हुईं। इसी आधार पर बिहार की विशेष निगरानी इकाई (SVU) ने जांच शुरू की। बाद में ED ने भी मामले में मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से जांच शुरू की। हालांकि अभी तक किसी अदालत ने इन आरोपों को साबित नहीं किया है।

 

जांच की टाइमलाइन

2024-25:
टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं की शिकायत मिलने के बाद SVU ने प्रारंभिक जांच शुरू की।

नवंबर 2025:
ED ने दोनों अधिकारियों से जुड़े दस्तावेज और सूचनाएं मांगीं। मनी लॉन्ड्रिंग एंगल से जांच शुरू हुई।

2025 के अंत में:
कई ठिकानों पर छापेमारी कर दस्तावेजों की जांच की गई।

मई 2026:
बिहार सरकार ने दोनों IAS अधिकारियों को निलंबित कर दिया। इसके बाद विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हुई।

अब इस पूरे मामले में SVU की कार्रवाई के बाद बिहार प्रशासनिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। आने वाले दिनों में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, कई और नाम सामने आने की संभावना जताई जा रही है।

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