BNT Desk: बिहार के सारण जिले के एक छोटे से गांव गोपालपुर की बेटी दिव्यांशी सिंह ने न केवल अपने परिवार का, बल्कि पूरे राज्य का सिर गर्व से ऊंचा कर दिया है। 13 जून 2026 को हैदराबाद स्थित एयरफोर्स एकेडमी में आयोजित पासिंग आउट परेड के दौरान दिव्यांशी ने जब ‘फ्लाइंग ऑफिसर’ के रूप में कदम रखा, तो वह केवल एक कैडेट नहीं, बल्कि इतिहास की एक पन्ने का नाम बन गईं।
दिव्यांशी सिंह भारतीय वायुसेना की ग्राउंड ड्यूटी शाखा में कमीशन पाने वाली पहली एनडीए (NDA) महिला कैडेट बनकर उभरी हैं। उनकी यह उपलब्धि न केवल उनके व्यक्तिगत संघर्षों का परिणाम है, बल्कि यह उन लाखों बेटियों के लिए एक प्रेरणा है जो वर्दी पहनकर देश सेवा का सपना देखती हैं।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह से मिला ‘प्रेसिडेंट प्लाक’
दिव्यांशी की सफलता का सबसे गौरवपूर्ण क्षण वह रहा जब उन्हें देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के हाथों प्रतिष्ठित “प्रेसिडेंट प्लाक” से सम्मानित किया गया। यह सम्मान किसी भी कैडेट के लिए सबसे बड़ा सपना होता है और यह केवल उन चुनिंदा कैडेट्स को दिया जाता है जिन्होंने अपने पूरे प्रशिक्षण के दौरान असाधारण प्रदर्शन किया हो। हजारों लोगों की उपस्थिति में जब उनका नाम पुकारा गया, तो वह पल न केवल उनके लिए, बल्कि उनके परिवार और पूरे देश के लिए ऐतिहासिक बन गया।
संघर्ष और कड़ी मेहनत की दास्तान
दिव्यांशी के लिए यह मुकाम हासिल करना बिल्कुल भी आसान नहीं था। 2022 में जब भारतीय सेना में महिलाओं के लिए एनडीए के दरवाजे खुले, तो हज़ारों लड़कियों ने एक नई उम्मीद देखी थी, लेकिन उस उम्मीद को हकीकत में बदलने के लिए अटूट मेहनत की ज़रूरत थी।
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पुणे में तीन साल का अनुशासन: दिव्यांशी ने पुणे में तीन साल तक कड़ी ट्रेनिंग की। सुबह की ओस से लेकर रात के अंधेरे तक, उनका जीवन शारीरिक मेहनत, कड़े अनुशासन और मानसिक चुनौतियों के बीच बीता।
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हैदराबाद में विशेषज्ञता: पुणे में आधारभूत प्रशिक्षण के बाद, उन्होंने एयरफोर्स एकेडमी, हैदराबाद में एक साल की विशेष ट्रेनिंग पूरी की। यहाँ उन्होंने वायुसेना की ग्राउंड ड्यूटी शाखा की बारीकियों को सीखा और खुद को एक कुशल अधिकारी के रूप में तैयार किया।
देशभक्ति की पांचवीं पीढ़ी
दिव्यांशी का देश सेवा के प्रति यह जुनून उन्हें विरासत में मिला है। उनका परिवार पीढ़ियों से वर्दी पहनकर देश की रक्षा कर रहा है:
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पिता का मार्गदर्शन: दिव्यांशी के पिता भारतीय वायुसेना में जूनियर वारंट ऑफिसर के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने ही अपनी बेटी को बचपन से ही देश सेवा के संस्कार दिए।
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परिवार की परंपरा: उनके दादा और परदादा बिहार पुलिस में अपनी सेवा दे चुके हैं। दिव्यांशी अब अपने परिवार की पांचवीं पीढ़ी हैं, जो देश की सेवा की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं।
गोपालपुर गांव से आसमान की बुलंदियों तक
आज गोपालपुर गांव में उत्सव जैसा माहौल है। जिस बेटी को कभी गांव की गलियों में खेलते देखा जाता था, आज वह देश के आसमान की सुरक्षा का जिम्मा संभालने के लिए तैयार है। दिव्यांशी की यह यात्रा साबित करती है कि प्रतिभा किसी बड़े शहर या महंगे संसाधनों की मोहताज नहीं होती। जहां मेहनत, हौसला और जुनून होता है, वहां मंजिलें खुद-ब-खुद कदम चूमती हैं।
प्रेरणा का प्रतीक: हर बेटी के लिए संदेश
दिव्यांशी सिंह की कहानी सिर्फ एक सफल करियर की दास्तान नहीं है। यह उन तमाम बेटियों के लिए एक संदेश है जो अक्सर अपनी आर्थिक परिस्थितियों या सामाजिक सीमाओं के कारण बड़े सपने देखने से डरती हैं।
दिव्यांशी ने यह साबित कर दिया है कि मंजिल गांव या शहर नहीं देखती, मंजिल सिर्फ आपकी दृढ़ इच्छाशक्ति को देखती है। उन्होंने बिहार की बेटियों की एक नई पहचान गढ़ी है—एक ऐसी पहचान जो निडर है, महत्वाकांक्षी है और इतिहास रचने का साहस रखती है।
आज, जब दिव्यांशी ‘फ्लाइंग ऑफिसर’ की वर्दी पहनकर खड़ी होती हैं, तो वे केवल एक अधिकारी नहीं, बल्कि आने वाली कई पीढ़ियों के लिए एक ‘रोल मॉडल’ के रूप में चमकती हैं। बिहार को अपनी इस बेटी पर गर्व है, और पूरा देश उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करता है।