खगड़िया: अतिक्रमण पर चला प्रशासन का बुलडोजर; RJD जिलाध्यक्ष के पिता के स्मारक की दीवार ध्वस्त

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BNT Desk: बिहार के खगड़िया जिले में अतिक्रमणकारियों के खिलाफ जिला प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार कर लिया है। प्रशासन की ‘अतिक्रमण मुक्त खगड़िया’ मुहिम के तहत नगर थाना क्षेत्र के बलुआही इलाके में भारी पुलिस बल के साथ बुलडोजर की कार्रवाई की गई। हालांकि, यह अभियान शांतिपूर्ण नहीं रहा। कार्रवाई के दौरान स्थानीय लोगों का गुस्सा फूट पड़ा, जिससे मौके पर जमकर हंगामा, धक्का-मुक्की और पुलिस के साथ हाथापाई की नौबत आ गई। इस कार्रवाई में राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज हो गई है क्योंकि प्रशासन ने एक बड़े राजनीतिक चेहरे से जुड़े निर्माण पर भी बुलडोजर चलाया है।

राजद जिलाध्यक्ष के पिता का स्मारक बना विवाद का केंद्र

इस अतिक्रमण हटाओ अभियान की सबसे बड़ी और चर्चित कार्रवाई राजद (RJD) के जिलाध्यक्ष मनोहर कुमार यादव के पिता के स्मारक पर हुई। प्रशासन का दावा है कि यह स्मारक सरकारी जमीन का अतिक्रमण कर बनाया गया था।

  • बाउंड्री वॉल ध्वस्त: जेसीबी (JCB) की मदद से स्मारक के चारों ओर बनी बाउंड्री वॉल (चारदीवारी) को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया।

  • अन्य अवैध निर्माण: स्मारक के अलावा सरकारी जमीन पर अवैध रूप से बनाए गए चदरा के घर, पक्की दीवारें, सीढ़ियां और घर के बाहर निकले हुए छज्जों को भी प्रशासन ने जमींदोज कर दिया।

हंगामा, हाथापाई और पुलिस की कार्रवाई

जैसे ही बुलडोजर ने निर्माणों को गिराना शुरू किया, स्थानीय लोग और प्रभावित परिवार सड़कों पर उतर आए।

  1. पुलिस से झड़प: कार्रवाई का विरोध कर रहे लोगों और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई। विरोध इतना बढ़ गया कि स्थिति हाथापाई और धक्का-मुक्की तक पहुँच गई।

  2. हिरासत में एक व्यक्ति: पुलिस ने कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए हंगामा कर रहे लोगों पर सख्ती दिखाई और मौके से एक व्यक्ति को हिरासत में ले लिया है।

  3. तनावपूर्ण माहौल: बलुआही इलाके में इस कार्रवाई के बाद से भारी तनाव व्याप्त है, जिसे देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है।

प्रशासन का पक्ष

खगड़िया अंचल के अंचलाधिकारी (CO) ने इस पूरी कार्रवाई पर अपना पक्ष रखते हुए कहा कि यह कोई अचानक की गई कार्रवाई नहीं है।

  • नोटिस की अनदेखी: CO के अनुसार, सरकारी जमीन को अवैध कब्जे से मुक्त करने के लिए संबंधित लोगों को अब तक तीन बार औपचारिक नोटिस दिया गया था। प्रशासन ने उन्हें खुद से अतिक्रमण हटाने का पर्याप्त समय दिया था, लेकिन किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया।

  • माइकिंग का विरोध: कार्रवाई से पहले इलाके में माइकिंग (लाउडस्पीकर से घोषणा) कराई जा रही थी ताकि लोग सतर्क हो जाएं। CO ने आरोप लगाया कि स्थानीय कुछ लोगों ने माइकिंग करने वाले सरकारी कर्मचारी के साथ दुर्व्यवहार किया और उसे डराने-धमकाने की कोशिश की।

  • अवैध निर्माण की सूची: प्रशासन ने स्पष्ट किया कि कई लोगों ने सड़क और सरकारी जमीन को घेरकर वहां घर की सीढ़ियां, दीवारें और छज्जे निकाल लिए थे, जिससे आवाजाही में दिक्कत हो रही थी।

स्थानीय लोगों और राजद नेता की प्रतिक्रिया

दूसरी ओर, स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन ने बिना उचित समय दिए और भेदभावपूर्ण तरीके से यह कार्रवाई की है। राजद जिलाध्यक्ष मनोहर कुमार यादव के समर्थकों में इस बात को लेकर काफी नाराजगी है कि उनके पिता के स्मारक को निशाना बनाया गया। समर्थकों का कहना है कि यह केवल अतिक्रमण हटाना नहीं बल्कि राजनीतिक द्वेष से प्रेरित कार्रवाई है। हालांकि, प्रशासन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे विशुद्ध रूप से कानूनी प्रक्रिया बताया है।

खगड़िया की एक पुरानी समस्या

खगड़िया नगर क्षेत्र में अतिक्रमण एक गंभीर समस्या रही है। सड़कों के किनारे अवैध निर्माण के कारण शहर में अक्सर ट्रैफिक जाम की स्थिति बनी रहती है। जिला प्रशासन ने अब साफ कर दिया है कि सरकारी जमीन पर कब्जा करने वाला व्यक्ति चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, उसके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी। आने वाले दिनों में जिले के अन्य इलाकों में भी इसी तरह के अभियान चलाए जाने की संभावना है।

कानून का राज या राजनीतिक विवाद?

खगड़िया की यह घटना एक बार फिर प्रशासन और रसूखदार लोगों के बीच के टकराव को दर्शाती है। जहाँ एक तरफ प्रशासन इसे नियम और कायदे की जीत बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय लोग इसे पुलिसिया दमन करार दे रहे हैं। राजद जिलाध्यक्ष के पिता के स्मारक पर चले बुलडोजर ने इस मामले को राजनीतिक रंग दे दिया है। अब देखना यह होगा कि आने वाले समय में यह विवाद क्या मोड़ लेता है और क्या प्रशासन इसी तरह निष्पक्ष रूप से पूरे शहर को अतिक्रमण मुक्त करा पाता है।

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