AI और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन पर बड़ा कदम: भारत-अमेरिका ने साइन किया ‘Pax Silica’ समझौता क्या है Pax Silica समझौता?

भारत और अमेरिका ने सेमीकंडक्टर और AI सप्लाई चेन को सुरक्षित करने के लिए ऐतिहासिक ‘Pax Silica’ समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। इसका उद्देश्य चीन जैसी "दबाव वाली निर्भरता" को खत्म कर भरोसेमंद तकनीकी इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करना है। यह समझौता भारत को वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने और रणनीतिक निवेश लाने में मील का पत्थर साबित होगा।

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BNT Desk: भारत और अमेरिका ने ट्रेड रिश्तों में नरमी के संकेतों के बीच शुक्रवार को ‘Pax Silica’ समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसका मकसद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन को सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना है। हाल ही में अमेरिका ने 25% अतिरिक्त टैरिफ वापस लिए थे और दोनों देश अगले महीने अंतरिम व्यापार समझौता करने की तैयारी में हैं। ऐसे समय में यह समझौता रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।

अमेरिका ने क्या कहा?

भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने साइनिंग सेरेमनी में कहा कि Pax Silica “कोएर्सिव डिपेंडेंसी” यानी दबाव वाली निर्भरता को खत्म कर भरोसेमंद साझेदारी को बढ़ावा देगा। उनके मुताबिक भारत की इंजीनियरिंग क्षमता और प्रतिभा इस गठबंधन के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि शांति और मजबूती साथ-साथ चलती हैं, और भारत इस बात को समझता है।

किन क्षेत्रों पर रहेगा फोकस?

अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, इस पहल के तहत संवेदनशील तकनीकों और महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर को उन देशों के प्रभाव से बचाया जाएगा जिन पर भरोसा नहीं है। इसमें ICT सिस्टम, फाइबर-ऑप्टिक केबल, डेटा सेंटर, फाउंडेशनल AI मॉडल और एप्लिकेशन शामिल होंगे। साथ ही, संयुक्त उद्यम और रणनीतिक निवेश के नए अवसर भी तलाशे जाएंगे।

भारत को क्या फायदा?

भारत अभी वैश्विक स्तर की AI इंफ्रास्ट्रक्चर क्षमता विकसित करने की प्रक्रिया में है। Pax Silica के तहत अमेरिकी कंपनियों के निवेश और तकनीकी सहयोग से भारत को बड़ा लाभ मिल सकता है। हाल के महीनों में अमेरिकी कंपनियों ने भारतीय AI इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश की प्रतिबद्धता जताई है।

चीन फैक्टर भी अहम

पश्चिमी देशों को चीन पर अत्यधिक निर्भरता की चिंता है, वहीं भारत भी अपनी महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर में चीन की भूमिका को लेकर सतर्क है। अमेरिका-चीन ट्रेड वॉर के बीच सप्लाई चेन में बदलाव हो रहा है, और भारत खुद को एक बड़े मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।

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