BNT Desk: बिहार सरकार ने सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों की मदद को बढ़ावा देने के लिए राह-वीर योजना शुरू की है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य यह है कि सड़क हादसे के बाद लोग घायलों की मदद करने से न डरें और समय पर सहायता मिल सके। कई बार लोग कानूनी झंझट के डर से मदद नहीं करते, जिससे घायल की जान खतरे में पड़ जाती है।
राह-वीर योजना की जानकारी
प्रशिक्षण के दौरान वाहन चालकों को राह-वीर योजना के बारे में विशेष रूप से जागरूक किया गया। उन्हें बताया गया कि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति की मदद करने वाले नागरिक को सरकार की ओर से 25 हजार रुपये का सम्मान राशि दी जाती है। साथ ही गुड सेमेरिटन कानून के तहत मदद करने वाले व्यक्ति को कानूनी सुरक्षा भी मिलती है। चालकों को यह संदेश दिया गया कि दुर्घटना देखकर पीछे न हटें, बल्कि निडर होकर पीड़ित की सहायता करें।
जन-जागरूकता बढ़ाने का प्रयास
सड़क सुरक्षा के प्रति लोगों को जागरूक करने और वाहन चालकों में जिम्मेदार व्यवहार विकसित करने के उद्देश्य से परिवहन विभाग और बिहार सड़क सुरक्षा परिषद की ओर से सुरक्षित वाहन चालन का प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है। बुधवार को इस कार्यक्रम के दूसरे दिन लगभग 224 वाहन चालकों ने प्रशिक्षण में भाग लिया। बड़ी संख्या में चालकों की भागीदारी से कार्यक्रम को सफल माना जा रहा है।
वाहन चालकों की अहम भूमिका
परिवहन सचिव राज कुमार ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं के समय वाहन चालक सबसे पहले मौके पर पहुंचते हैं। ऐसे में उनकी तत्परता और मानवीय सोच किसी की जान बचा सकती है। उन्होंने कहा कि मदद के लिए आगे बढ़ने वाला चालक ही सच्चे अर्थों में “राह-वीर” बनता है।
सुरक्षित ड्राइविंग पर जोर
प्रशिक्षण के दौरान चालकों को यातायात नियमों के पालन का महत्व बताया गया। सुरक्षित गति से वाहन चलाना, लेन अनुशासन का पालन, सीट बेल्ट और हेलमेट का उपयोग, वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का इस्तेमाल न करना और थकान की स्थिति में वाहन न चलाने जैसी बातों पर विशेष जोर दिया गया।
आगे भी जारी रहेगा प्रशिक्षण
अधिकारियों ने बताया कि गुरुवार को पटना के ऑटो चालकों को सुरक्षित वाहन चालन का प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके बाद बस, ट्रक और ओला-उबर जैसे एग्रीगेटर सेवाओं से जुड़े चालकों को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
उद्देश्य सड़क दुर्घटनाओं में कमी
परिवहन विभाग का लक्ष्य सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाना और एक सुरक्षित व जिम्मेदार परिवहन व्यवस्था बनाना है। इसके लिए ऐसे जागरूकता और प्रशिक्षण कार्यक्रम भविष्य में भी लगातार चलाए जाएंगे।