बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले से बड़ी खबर सामने आई है। यहाँ के जिलाधिकारी (DM) धर्मेंद्र कुमार ने भ्रष्टाचार और सरकारी कामकाज में जालसाजी के मामले में दो राजस्व कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें बर्खास्त कर दिया है। इस कार्रवाई से जिले के अन्य सरकारी कर्मचारियों में हड़कंप मच गया है। प्रशासन ने साफ संकेत दिया है कि अब किसी भी भ्रष्ट अधिकारी या कर्मी को बख्शा नहीं जाएगा।
रिश्वतखोरी में ‘रंगे हाथ’ पकड़ा गया कर्मी
बर्खास्त किए गए पहले कर्मचारी का नाम जगई राम है, जो ठकराहा में तैनात था। जगई राम को 1 नवंबर 2017 को निगरानी की टीम ने रामनगर अंचल में 5,000 रुपये की रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था। आरोप था कि उसने महूई निवासी रविकेश पांडेय से जमीन की रसीद काटने के लिए 10,000 रुपये की मांग की थी। हालांकि, विभागीय जांच में उसका झूठ पकड़ा गया। रिश्वतखोरी के इस मामले में डीएम ने सुनवाई के बाद जगई राम को सरकारी सेवा के अयोग्य मानते हुए बर्खास्त कर दिया है।
जालसाजी और रिकॉर्ड से छेड़छाड़ का गंभीर मामला
दूसरे मामले में, पिपरासी अंचल में तैनात राजस्व कर्मचारी अब्दुल समद को बर्खास्त किया गया है। अब्दुल समद पर बगहा-1 अंचल में राजस्व कार्य और दस्तावेजों में छेड़छाड़ तथा जालसाजी का गंभीर आरोप था। समद ने अपने कार्यकाल के दौरान एक साथ 52 साल की रसीद काट दी थी। इसके अलावा, उन पर सरकारी रिकॉर्ड फाड़ने और जमाबंदी में जालसाजी के आरोप भी साबित हुए। मामला बेहद पेचीदा और गंभीर था, जिसके बाद डीएम ने उन्हें तुरंत प्रभाव से बर्खास्त कर दिया।
प्रशासन का कड़ा संदेश
डीएम धर्मेंद्र कुमार की इस कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि प्रशासन भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रहा है। दोनों राजस्व कर्मियों की नौकरी जाने से सरकारी गलियारों में यह संदेश गया है कि भविष्य में लापरवाही और भ्रष्टाचार करने वालों पर ऐसी ही सख्त कार्रवाई होगी। इस कार्रवाई ने जनता के बीच प्रशासन की छवि को और मजबूत किया है।