RBI का बड़ा फैसला! Repo Rate बढ़ाकर 5.50% किया, अब महंगी हो सकती है Loan की EMI

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Major move by RBI! Repo rate raised to 5.50%; loan EMIs may now become costlier.

BNT Desk : भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने महंगाई और वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों के बीच बड़ा फैसला लिया है। RBI ने Repo Rate में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी करते हुए इसे 5.50 प्रतिशत कर दिया है। इस फैसले का सीधा असर उन लोगों पर पड़ सकता है, जिन्होंने Floating Rate पर Home Loan, Car Loan या अन्य कर्ज लिया हुआ है। दर बढ़ने के साथ आने वाले समय में इनकी EMI महंगी हो सकती है।

2023 के बाद पहली बार बढ़ी Repo Rate

RBI की मौद्रिक नीति समिति यानी MPC ने Repo Rate में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी का फैसला सर्वसम्मति से लिया। खास बात यह है कि फरवरी 2023 के बाद यह पहली बार है जब केंद्रीय बैंक ने Repo Rate में बढ़ोतरी की है।इसके साथ ही RBI ने अपनी नीति के रुख में भी बदलाव किया है। केंद्रीय बैंक ने मौद्रिक नीति का रुख अब ‘Calibrated Tightening’ कर दिया है। इसका मतलब है कि अगर महंगाई का दबाव आगे भी बना रहता है, तो RBI धीरे-धीरे बाजार में उपलब्ध अतिरिक्त पैसे को कम करने की दिशा में कदम उठा सकता है।

क्यों बढ़ाई गई Repo Rate?

RBI Governor Sanjay Malhotra ने इस फैसले के पीछे कई वैश्विक चुनौतियों का जिक्र किया। इनमें West Asia में दोबारा बढ़ा तनाव, कच्चे तेल की कीमतों से जुड़ी चिंता और दुनिया भर में महंगाई का दबाव प्रमुख हैं।वैश्विक परिस्थितियों का असर भारत पर भी पड़ सकता है। खासकर कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी से देश के आयात बिल और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है। इसके अलावा रुपये की स्थिति और दुनिया भर में ब्याज दरों में होने वाले बदलाव भी RBI के लिए अहम हैं।

Loan लेने वालों पर क्या होगा असर?

Repo Rate वह दर है जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है। जब Repo Rate बढ़ता है, तो बैंकों के लिए RBI से पैसा लेना महंगा हो सकता है। इसका असर बैंक ग्राहकों तक भी पहुंच सकता है।खासकर Floating Rate Loan लेने वाले ग्राहकों को आने वाले समय में अधिक EMI का सामना करना पड़ सकता है। Home Loan, Car Loan और दूसरे कर्ज की ब्याज दरों में बढ़ोतरी होने पर या तो EMI बढ़ सकती है या फिर कर्ज चुकाने की अवधि लंबी हो सकती है।

हालांकि इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि अलग-अलग बैंक अपनी ब्याज दरों में कितना बदलाव करते हैं।

अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा असर

Repo Rate में बढ़ोतरी का असर सिर्फ कर्ज लेने वालों तक सीमित नहीं रहता। महंगे कर्ज से लोगों की खर्च करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। वहीं कंपनियों के लिए भी कर्ज लेना महंगा हो सकता है, जिसका असर निवेश और कारोबार की रफ्तार पर पड़ सकता है।दूसरी ओर, ब्याज दर बढ़ाने का एक बड़ा उद्देश्य महंगाई पर नियंत्रण रखना होता है। RBI के सामने इस समय आर्थिक विकास की रफ्तार को बनाए रखने और महंगाई पर नजर रखने के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है।

विशेषज्ञों ने क्या कहा?

बिजनेस अर्थशास्त्री Sanchita Mukherji के मुताबिक RBI का यह फैसला आर्थिक विकास को रोकने के बजाय उसकी गुणवत्ता बनाए रखने की कोशिश के तौर पर देखा जा सकता है। उनके अनुसार भारत की अर्थव्यवस्था अच्छी गति से आगे बढ़ रही है, लेकिन कच्चा तेल, वैश्विक ब्याज दरें और रुपया ऐसे तीन बाहरी कारक हैं जिन्हें RBI नजरअंदाज नहीं कर सकता।उन्होंने यह भी कहा कि नीति के रुख में बदलाव बाजार के लिए महत्वपूर्ण संकेत है। Calibrated Tightening का मतलब यह नहीं है कि RBI लगातार बड़ी-बड़ी दर बढ़ोतरी करने की घोषणा कर रहा है। बल्कि केंद्रीय बैंक आगे आने वाले आर्थिक आंकड़ों के आधार पर कदम उठाने के लिए तैयार है।अर्थशास्त्री Mitali Nikore ने भी RBI के सामने मौजूद चुनौती को रेखांकित किया। उनके मुताबिक महंगाई का दबाव और कच्चे तेल की कीमतों से पैदा होने वाली महंगाई एक तरफ चिंता बढ़ा रही है, जबकि दूसरी तरफ ऊंची ब्याज दरें कर्ज, खपत और निवेश पर असर डाल सकती हैं।

आगे क्या होगा?

RBI के इस फैसले के बाद अब बाजार की नजर आने वाले महीनों के महंगाई के आंकड़ों, कच्चे तेल की कीमतों और रुपये की स्थिति पर रहेगी। अगर महंगाई का दबाव बना रहता है, तो RBI आगे भी सख्त मौद्रिक नीति अपना सकता है।

फिलहाल आम लोगों के लिए सबसे बड़ा सवाल Loan EMI को लेकर है। अगर बैंक Repo Rate की बढ़ोतरी का असर अपनी ब्याज दरों पर डालते हैं, तो Floating Rate Loan लेने वाले ग्राहकों की जेब पर आने वाले समय में अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।

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