BNT Desk : अगर लगन और अनुशासन हो तो रास्ता कितना भी अलग क्यों न हो, मंजिल हासिल की जा सकती है। केरल के गोविंद कृष्णन एम की कहानी इसका शानदार उदाहरण है। बचपन में चौथी कक्षा के बाद उन्होंने पारंपरिक स्कूल की पढ़ाई छोड़कर गुरुकुल में वेदों की शिक्षा ली। कई साल तक यजुर्वेद का अध्ययन करने के बाद उन्होंने दोबारा सामान्य शिक्षा की ओर कदम बढ़ाया, JEE Advanced पास किया, IIST से BTech की पढ़ाई पूरी की और अब ISRO के विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र में वैज्ञानिक के तौर पर काम कर रहे हैं।
चौथी के बाद शुरू हुई जिंदगी की अलग राह
गोविंद कृष्णन की कहानी केरल के पय्यन्नूर से शुरू होती है। साल 2011 में जब वह करीब 10 साल के थे, तब उनके पिता हरीश कुमार ने उन्हें त्रिशूर के Bhramaswam Madham में दाखिला दिलाया।हरीश कुमार भारतीय नौसेना में रह चुके हैं। उन्होंने अपने बेटे को पारंपरिक गुरुकुल व्यवस्था में शिक्षा दिलाने का फैसला किया। इसके बाद गोविंद ने करीब चार साल तक वहां रहकर यजुर्वेद का अध्ययन किया।
सुबह 5 बजे शुरू होता था दिन
गुरुकुल में गोविंद की दिनचर्या आज की सामान्य स्कूली जिंदगी से बिल्कुल अलग थी। उनका दिन सुबह करीब 5 बजे शुरू होता था। सुबह वे वैदिक मंत्रों के उच्चारण और आध्यात्मिक अभ्यास से दिन की शुरुआत करते थे।गुरुकुल में पढ़ाई का बड़ा हिस्सा मौखिक तरीके से होता था। विद्यार्थी गुरु से सुनकर मंत्रों और श्लोकों को याद करते थे। शुरुआत में परिवार से दूर रहना गोविंद के लिए आसान नहीं था, लेकिन धीरे-धीरे इसी जीवनशैली ने उनमें एकाग्रता और अनुशासन को मजबूत किया।
गुरुकुल के साथ फिर शुरू की सामान्य पढ़ाई
चार साल बाद गोविंद ने सामान्य स्कूल की पढ़ाई दोबारा शुरू की। हालांकि उन्होंने गुरुकुल की शिक्षा पूरी तरह नहीं छोड़ी। उन्होंने दोनों व्यवस्थाओं के बीच ऐसा संतुलन बनाया कि दिन का समय स्कूल में और सुबह-शाम का समय वैदिक शिक्षा में बीतता था।दो अलग-अलग तरह की पढ़ाई को साथ लेकर चलना आसान नहीं था, लेकिन गोविंद ने इसे अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लिया। इसका परिणाम भी शानदार रहा। उन्होंने Class 10 में सभी विषयों में A+ ग्रेड हासिल किया।
JEE Main और JEE Advanced भी किया पास
इसके बाद गोविंद ने कर्नाटक के मूडबिद्री स्थित Alva’s College में दाखिला लिया। यहां उन्होंने इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी शुरू की।मेहनत का नतीजा यह रहा कि उन्होंने JEE Main और JEE Advanced, दोनों परीक्षाएं पास कर लीं। इसके बाद उन्हें Indian Institute of Space Science and Technology यानी IIST में दाखिला मिला, जहां उन्होंने Electronics and Communication में BTech की पढ़ाई पूरी की।
अब ISRO में निभा रहे हैं बड़ी जिम्मेदारी
वेदों की शिक्षा से शुरू हुआ गोविंद का सफर आखिरकार देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम तक पहुंच गया। उन्हें ISRO के Centralised Recruitment Board की चयन प्रक्रिया के जरिए विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र के लिए चुना गया।आज वह Vikram Sarabhai Space Centre (VSSC) में वैज्ञानिक के तौर पर काम कर रहे हैं। एक तरफ बचपन में उन्होंने गुरुकुल में वेदों का अध्ययन किया और दूसरी तरफ आधुनिक विज्ञान और अंतरिक्ष तकनीक की पढ़ाई करके देश के अंतरिक्ष कार्यक्रम का हिस्सा बने।
‘आध्यात्मिकता और विज्ञान एक-दूसरे के विरोधी नहीं’
गोविंद अपनी इस पूरी यात्रा को सिर्फ पढ़ाई की उपलब्धि नहीं मानते। उनका कहना है कि आध्यात्मिकता और विज्ञान को एक-दूसरे के विरोधी के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।गोविंद के मुताबिक, आध्यात्मिकता और विज्ञान साथ चल सकते हैं। उनके लिए यह सब संतुलन और अनुशासन का खेल है।
गोविंद कृष्णन की कहानी इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने शिक्षा के दो बिल्कुल अलग रास्तों को अपने जीवन में जगह दी। गुरुकुल की परंपरा से लेकर आधुनिक विज्ञान और ISRO तक का उनका सफर बताता है कि सीखने के तरीके अलग हो सकते हैं, लेकिन मेहनत, अनुशासन और एकाग्रता हर रास्ते में सफलता की मजबूत नींव बन सकते हैं।