BNT Desk: रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार को भारत पहुंच गए हैं। BRICS Summit 2026 के दौरान उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अहम द्विपक्षीय बैठक होने वाली है। दोनों नेताओं के बीच होने वाली इस मुलाकात पर पूरी दुनिया की नजर है। बैठक में भारत और रूस के बीच व्यापार, रक्षा, निवेश, दवा उद्योग और ऊर्जा सहयोग समेत कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। पुतिन के भारत पहुंचने के साथ ही दिल्ली में BRICS सम्मेलन की गतिविधियां तेज हो गई हैं। भारत इस साल BRICS की अध्यक्षता कर रहा है और 12-13 सितंबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में शिखर सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है।
भारत पहुंचे राष्ट्रपति पुतिन, भारत मंडपम पहुंचे
रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन शुक्रवार को दिल्ली पहुंचे। इसके बाद वह भारत मंडपम भी पहुंचे, जहां BRICS Summit से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठक शुक्रवार दोपहर करीब 3:30 बजे होने की उम्मीद जताई गई थी। पुतिन के साथ रूस का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी भारत आया है। यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद यह पहली बार है जब पुतिन रूस के बाहर किसी BRICS शिखर सम्मेलन में व्यक्तिगत रूप से हिस्सा ले रहे हैं।
रक्षा और ऊर्जा सहयोग पर होगी खास चर्चा
प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन की बैठक में भारत-रूस संबंधों से जुड़े कई अहम मुद्दों पर बातचीत हो सकती है। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग लंबे समय से महत्वपूर्ण रहा है। ऐसे में S-400 एयर डिफेंस सिस्टम की शेष डिलीवरी और भविष्य के रक्षा सहयोग पर चर्चा की संभावना है।
क्रेमलिन के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने पहले कहा था कि दोनों देश ब्रह्मोस मिसाइलों के अपग्रेड को लेकर भी बातचीत कर रहे हैं। इसके अलावा रूस की ओर से Su-57 लड़ाकू विमानों की संभावित आपूर्ति के प्रस्ताव पर भी चर्चा जारी है।
रक्षा क्षेत्र के अलावा व्यापार, निवेश, फार्मास्युटिकल सेक्टर और ऊर्जा सहयोग भी बैठक के प्रमुख मुद्दों में शामिल हो सकते हैं। बदलते वैश्विक हालात के बीच भारत और रूस के आर्थिक संबंधों को मजबूत करना भी दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
सात साल बाद भारत आएंगे शी जिनपिंग
BRICS Summit के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की एक और महत्वपूर्ण द्विपक्षीय मुलाकात पर दुनिया की नजर है। चीन ने पुष्टि की है कि राष्ट्रपति शी जिनपिंग 12 और 13 सितंबर को BRICS सम्मेलन में हिस्सा लेने भारत आएंगे। शी जिनपिंग करीब सात साल बाद भारत की यात्रा पर आ रहे हैं। उनके शनिवार को दोपहर करीब 12:25 बजे दिल्ली पहुंचने की उम्मीद है। इसके बाद शाम को प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय बैठक होने की संभावना है। भारत और चीन के बीच सीमा, व्यापार और द्विपक्षीय संबंधों को लेकर कई महत्वपूर्ण मुद्दे हैं। ऐसे में दोनों नेताओं की मुलाकात को काफी अहम माना जा रहा है।
BRICS में कई बड़े देशों के नेता होंगे शामिल
इस सम्मेलन में रूस और चीन के राष्ट्राध्यक्षों के अलावा कई अन्य देशों के शीर्ष नेता भी शामिल हो रहे हैं। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो और मिस्र के राष्ट्रपति अब्देल फतह अल-सीसी समेत कई नेताओं की मौजूदगी रहेगी।
इसके अलावा मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम, अबू धाबी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान, इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद अली और वियतनाम के प्रधानमंत्री ले मिन्ह हंग भी सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले प्रमुख नेताओं में शामिल हैं।
BRICS में सीमा पार भुगतान पर बढ़ेगा सहयोग
भारत की अध्यक्षता में BRICS के वित्तीय एजेंडे में सीमा पार भुगतान और स्थानीय मुद्राओं में लेनदेन को भी प्राथमिकता दी जा रही है। BRICS के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक गवर्नरों की बैठक में क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट सिस्टम को आपस में जोड़ने और स्थानीय मुद्राओं में व्यापार तथा निवेश को बढ़ावा देने पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, व्यापारिक तनाव और बदलते भू-राजनीतिक माहौल के बीच सदस्य देशों की आर्थिक मजबूती बढ़ाना है।
वैश्विक तनाव के बीच अहम सम्मेलन
इस बार BRICS Summit ऐसे समय हो रहा है, जब दुनिया कई बड़े भू-राजनीतिक संकटों से गुजर रही है। यूक्रेन युद्ध के अलावा ईरान से जुड़े घटनाक्रम और अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के दूसरे कार्यकाल के कारण वैश्विक राजनीति में भी कई बदलाव देखने को मिल रहे हैं। ऐसे समय में भारत में होने वाली BRICS बैठक को केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं माना जा रहा है। सम्मेलन में वैश्विक दक्षिण की भूमिका, आर्थिक सहयोग, व्यापार, वित्तीय व्यवस्था और बदलते अंतरराष्ट्रीय समीकरणों पर भी चर्चा होने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री मोदी और पुतिन की मुलाकात तथा अगले दिन मोदी-शी जिनपिंग बैठक इस पूरे सम्मेलन की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में शामिल होंगी। दोनों बैठकों से भारत के रूस और चीन के साथ संबंधों को लेकर आगे की दिशा के संकेत मिलने की उम्मीद है।