आरा: भोजपुर के बिलौटी गांव में बाढ़ का कहर, 70 घर डूबे; बच्चों की सुरक्षा के लिए रातभर जाग रहे विस्थापित परिवार

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BNT Desk: भोजपुर जिले के आरा इलाके में बाढ़ ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। बिलौटी गांव में बाढ़ का पानी घुसने से करीब 70 घर प्रभावित हुए हैं। कई परिवारों के सामने रहने और खाने-पीने के साथ सबसे बड़ी चिंता छोटे बच्चों की सुरक्षा को लेकर बनी हुई है। पानी से घिरे परिवार रातभर जागकर बच्चों की निगरानी करने को मजबूर हैं।

 

70 घरों में घुसा बाढ़ का पानी

बिलौटी गांव में बाढ़ की स्थिति लगातार परेशानी का कारण बनी हुई है। गांव के करीब 70 घर बाढ़ के पानी की चपेट में आ गए हैं। घरों में पानी घुसने के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की मजबूरी बनी हुई है। जिन परिवारों ने अपने घर छोड़कर ऊंचे स्थानों पर शरण ली है, उनके सामने भी कई तरह की समस्याएं हैं। रहने के लिए पर्याप्त जगह नहीं है और बच्चों को पानी से दूर रखना बड़ी चुनौती बन गया है।

 

बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए रातभर जाग रहे परिवार

बाढ़ के कारण विस्थापित हुए परिवारों की चिंता सबसे ज्यादा बच्चों को लेकर है। पानी से घिरे इलाकों में जहरीले जीव-जंतुओं और गहरे पानी का खतरा बना रहता है। ऐसे में परिवार के सदस्य रातभर जागकर बच्चों की निगरानी कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रात के समय स्थिति और ज्यादा मुश्किल हो जाती है। अंधेरे में पानी का स्तर और रास्ते साफ नजर नहीं आते। ऐसे में बच्चों को अकेला छोड़ना जोखिम भरा है। परिवारों को डर है कि किसी तरह की लापरवाही से बड़ा हादसा हो सकता है।

 

प्रशासन की बनाई सड़क भी पानी में बही

बाढ़ के बीच ग्रामीणों के लिए एक और बड़ी परेशानी सामने आई है। प्रशासन की ओर से बनाई गई सड़क भी बाढ़ के पानी के तेज बहाव में बह गई। सड़क के क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीणों की आवाजाही प्रभावित हो गई है। सड़क के बह जाने के बाद राहत सामग्री पहुंचाने और लोगों को सुरक्षित स्थानों तक ले जाने में भी परेशानी बढ़ सकती है। ग्रामीणों के लिए गांव से बाहर निकलने के रास्ते सीमित हो गए हैं। इससे उनकी निर्भरता प्रशासन और राहत टीमों पर और बढ़ गई है।

 

बाढ़ के बीच ग्रामीणों की मुश्किलें बरकरार

बिलौटी गांव में पानी भरने के बाद ग्रामीणों के सामने रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना भी चुनौती बन गया है। घरों में पानी घुसने से सामान और जरूरी वस्तुओं को सुरक्षित रखना मुश्किल हो रहा है। विस्थापित परिवारों को भोजन, पीने के पानी और रहने की जगह की जरूरत है। सबसे ज्यादा परेशानी उन परिवारों को हो रही है जिनके साथ छोटे बच्चे और बुजुर्ग हैं। बाढ़ की स्थिति में उन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाना आसान नहीं है।

 

राहत और सुरक्षित निकासी की जरूरत

ग्रामीणों के सामने इस समय सबसे बड़ी जरूरत सुरक्षित स्थान, राहत सामग्री और आने-जाने के रास्ते की है। सड़क बह जाने के बाद प्रशासन के सामने भी प्रभावित परिवारों तक पहुंच बनाने की चुनौती बढ़ गई है। बिलौटी गांव के हालात यह दिखाते हैं कि बाढ़ सिर्फ घरों को ही नहीं डुबोती, बल्कि प्रभावित परिवारों की पूरी जिंदगी को अस्त-व्यस्त कर देती है। ग्रामीणों को उम्मीद है कि प्रशासन जल्द प्रभावित परिवारों की सुरक्षित निकासी, राहत और आवागमन की व्यवस्था सुनिश्चित करेगा।

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