BNT Desk: पटना में कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए अग्निशमन विभाग ने एक नई पहल की है। अब शहर के सभी कोचिंग सेंटरों की फायर सेफ्टी जांच डिजिटल और पारदर्शी तरीके से की जाएगी।
QR कोड आधारित नई व्यवस्था की मुख्य बातें
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डिजिटल मॉनिटरिंग: अब पारंपरिक कागजी कार्रवाई के बजाय, प्रत्येक कोचिंग के लिए एक QR कोड आधारित सिस्टम तैयार किया गया है।
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ऑनलाइन फॉर्म (SOP): QR कोड स्कैन करते ही तीन पन्नों का एक ऑनलाइन फॉर्म खुलेगा, जिसमें संस्थान को अपनी पूरी जानकारी और सुरक्षा संबंधी विवरण दर्ज करना होगा।
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सत्यापन और प्रमाणीकरण: दी गई जानकारी के सत्यापन के बाद, विभाग संस्थान को एक विशिष्ट QR कोड जारी करेगा, जिसे कोचिंग के मुख्य प्रवेश द्वार पर लगाना अनिवार्य होगा।
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सुरक्षा ऑडिट: फॉर्म भरने के बाद विभाग की टीम भौतिक निरीक्षण (Physical Inspection) करेगी। सभी मानक पूरे होने पर ही संस्थान को ‘फायर सेफ्टी ऑडिट सर्टिफिकेट’ मिलेगा।
विभाग की सख्ती और वर्तमान स्थिति
अग्निशमन विभाग के आंकड़ों के अनुसार पटना में स्थिति चिंताजनक है, जिसे सुधारने के लिए विभाग अब सख्त कदम उठा रहा है:
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कोचिंग का आंकड़ा: जिले में कुल 1,256 कोचिंग संस्थान हैं, जिनमें से केवल 529 पंजीकृत हैं।
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ऑडिट की प्रगति: अब तक केवल 350 संस्थानों का फायर सेफ्टी ऑडिट पूरा हो पाया है।
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नोटिस: मानकों में कमी पाए जाने पर 247 कोचिंग संस्थानों को नोटिस जारी किया गया है। इन्हें 10 दिनों के भीतर सुरक्षा इंतजाम पूरे करने का अल्टीमेटम दिया गया है, अन्यथा उन्हें सील करने जैसी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पाई गई गंभीर खामियां
निरीक्षण के दौरान कई कोचिंग सेंटरों में सुरक्षा के प्रति भारी लापरवाही देखी गई:
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निकास का संकट: 165 संस्थानों में आने-जाने के लिए केवल एक ही संकरा रास्ता है, जो आपातकालीन स्थिति में खतरनाक साबित हो सकता है।
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उपकरणों का अभाव: 106 संस्थानों में फायर सेफ्टी सिस्टम अत्यंत खराब स्थिति में है; कई जगहों पर या तो अग्निशमन यंत्र (Fire Extinguishers) नहीं हैं या वे काम करने की स्थिति में नहीं हैं।
अग्निशमन विभाग का मानना है कि यह डिजिटल प्रणाली न केवल कोचिंग संचालकों को जवाबदेह बनाएगी, बल्कि छात्रों के लिए एक सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने में मील का पत्थर साबित होगी।