पटना में 90 करोड़ का आधुनिक शवदाह गृह चर्चा में: अंतिम यात्रा की व्यवस्था भी अब निजी हाथों में

BiharNewsAuthor
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इंसान की जिंदगी में हर चीज बदलती हुई आपने देखी होगी… शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन और कई सरकारी सेवाएं भी निजी हाथों में जाती रही हैं। लेकिन अब बिहार की राजधानी पटना में अंतिम यात्रा से जुड़ी व्यवस्था भी निजी संचालन में चली गई है, जिसने एक नई बहस शुरू कर दी है। पटना के बांसघाट के पास गंगा किनारे करीब 90 करोड़ रुपये की लागत से एक आधुनिक शवदाह गृह तैयार किया गया है। इसे स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत बिहार अर्बन डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (बुडको) ने बनवाया है।

इस आधुनिक शवदाह गृह को संचालन के लिए ईशा फाउंडेशन को दिया गया है। बताया जा रहा है कि संस्था को इसे एक रुपये की लीज पर चलाने की जिम्मेदारी दी गई है।

लेकिन अब सबसे ज्यादा चर्चा इसके खर्च को लेकर हो रही है।

जहां बगल में मौजूद सरकारी विद्युत शवदाह गृह में अंतिम संस्कार का शुल्क करीब 300 रुपये है, वहीं नए आधुनिक शवदाह गृह में अंतिम संस्कार के लिए न्यूनतम करीब 3500 रुपये खर्च करने पड़ सकते हैं।

इसके अलावा लकड़ी या गैस से अंतिम संस्कार करने पर अलग खर्च देना होगा। डोम राजा, पंडित और अन्य व्यवस्थाओं के लिए भी अलग-अलग राशि तय है।

क्यों है इतना अंतर?

ईशा फाउंडेशन से जुड़े लोगों का कहना है कि यह सामान्य शवदाह गृह नहीं बल्कि आधुनिक सुविधा वाला केंद्र है।

यहां एसी वेटिंग रूम, बेहतर व्यवस्था, साफ-सफाई और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। संस्था का कहना है कि रखरखाव, बिजली और अन्य व्यवस्थाओं पर काफी खर्च आता है।

सरकारी पैसे से बना, निजी संचालन पर सवाल

इस पूरे मामले को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं कि जब यह सुविधा सरकारी पैसे से तैयार हुई है तो आम लोगों के लिए इसकी फीस कितनी होनी चाहिए?

कई लोगों का कहना है कि अंतिम संस्कार जैसी संवेदनशील व्यवस्था में सुविधा और खर्च के बीच संतुलन होना जरूरी है।

वहीं समर्थकों का तर्क है कि बेहतर सुविधा के लिए कुछ अतिरिक्त शुल्क लिया जा सकता है।

कई जिलों में विस्तार की तैयारी

बताया जा रहा है कि ईशा फाउंडेशन पहले से तमिलनाडु में कई शवदाह गृहों का संचालन कर चुका है। अब बिहार में भी संस्था को कई जगहों पर जिम्मेदारी देने की तैयारी चल रही है।

पटना के दीघा, सिमरिया घाट, भागलपुर और सहरसा जैसे स्थानों पर भी ऐसी सुविधाओं को लेकर योजना बनाई जा रही है।

पटना का यह आधुनिक शवदाह गृह अब सिर्फ एक सुविधा नहीं, बल्कि इस बात पर बहस का विषय बन गया है कि क्या इंसान की अंतिम यात्रा की व्यवस्था भी निजी मॉडल पर चलनी चाहिए या नहीं।

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