20 जुलाई 1975… बिहार में एक बच्चे का जन्म हुआ।
एक तरफ देश में आपातकाल का दौर था, लोकतंत्र की लड़ाई चल रही थी और दूसरी तरफ एक समाजवादी परिवार में खुशियां आई थीं।उस बच्चे के पिता “संपूर्ण क्रांति” आंदोलन से जुड़े हुए थे। इमरजेंसी के विरोध में उन्हें जेल भी जाना पड़ा था। राजनीति उनके लिए सिर्फ सत्ता हासिल करने का रास्ता नहीं, बल्कि एक विचार और संघर्ष था।वही बच्चा आगे चलकर बिहार की राजनीति में चर्चा का केंद्र बनने वाला था। उस बच्चे का नाम था निशांत कुमार और उनके पिता थे बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार।
नीतीश कुमार की राजनीती यात्रा
नीतीश कुमार ने जेपी आंदोलन से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू की। संघर्षों से निकलकर वह बिहार की राजनीति के सबसे बड़े चेहरों में शामिल हुए। लंबे समय तक राज्य की सत्ता में उनकी मजबूत पकड़ रही।नीतीश कुमार की राजनीति की सबसे बड़ी खासियत उनकी रणनीति रही। बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाए रखी। बिहार ही नहीं, राष्ट्रीय राजनीति में भी उनकी भूमिका हमेशा चर्चा में रही।
समाजवादी थे नीतीश
लेकिन जिस पिता ने पूरी जिंदगी समाजवाद और सिद्धांतों की राजनीति की, उन्हीं पर यह आरोप भी लगता रहा कि उन्होंने परिवार को ज्यादा समय नहीं दिया। शायद यही वजह रही कि निशांत कुमार लंबे समय तक राजनीति से दूर रहे।
निशांत की का करियर
निशांत कुमार की शुरुआती पढ़ाई पटना के सेंट करेंस स्कूल से हुई। इसके बाद उन्होंने मसूरी के बोर्डिंग स्कूल से पढ़ाई पूरी की। पिता की तरह उन्होंने भी इंजीनियरिंग का रास्ता चुना और बीआईटी मेसरा से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग की पढ़ाई की।राजनीति से उनका सीधा जुड़ाव नहीं था। लेकिन समय के साथ परिस्थितियां बदलीं और निशांत कुमार का नाम राजनीतिक गलियारों में चर्चा में आने लगा।जब निशांत कुमार के जनता दल यूनाइटेड में सक्रिय होने की खबरें सामने आईं तो सोशल मीडिया पर उन्हें लेकर काफी प्रतिक्रियाएं आईं। उनके पहनावे से लेकर उनके व्यवहार तक पर सवाल उठाए गए।एक समय जब वह अपने पिता नीतीश कुमार से आशीर्वाद लेने पहुंचे थे, उस दौरान का वीडियो भी काफी वायरल हुआ था। कई लोगों ने उस पर अपनी-अपनी राय रखी।
लेकिन राजनीति में सबसे बड़ा जवाब समय देता है।
हाल के दिनों में निशांत कुमार ने स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर जिस तरह अपनी बात रखी, उससे कई लोग हैरान हुए। बीमारी और इलाज से जुड़े मुद्दों पर उनकी समझ ने लोगों का ध्यान खींचा।जब वह बिहार के सबसे बड़े अस्पतालों में से एक पीएमसीएच पहुंचे तो वहां व्यवस्था को लेकर कई सवाल सामने आए। दवाओं की कमी और अन्य समस्याओं पर उन्होंने नाराजगी जताई और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की बात कही।इसके बाद चर्चा तेज हो गई कि क्या निशांत कुमार आने वाले समय में बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था में अपनी अलग पहचान बना पाएंगे?
नीतीश कुमार ने नही किया परिवारवाद
हालांकि नीतीश कुमार हमेशा परिवारवाद की राजनीति से दूरी बनाकर चलते रहे हैं। उन्होंने कभी अपने परिवार को राजनीति में आगे बढ़ाने की कोशिश नहीं की। लेकिन बदलते हालातों में निशांत कुमार की सक्रियता बढ़ती नजर आ रही है।जनता दल यूनाइटेड में भी अब उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर चर्चाएं तेज हैं। कई लोग उन्हें पार्टी के आने वाले समय के चेहरे के तौर पर देख रहे हैं।
निशांत को मिल रहा राजनैतिक ट्रेनिंग
बताया जा रहा है कि नीतीश कुमार भी अपने बेटे को राजनीति की बारीकियां समझाने के लिए अनुभवी नेताओं और अधिकारियों के संपर्क में रख रहे हैं।
एक बेटा, जो लंबे समय तक राजनीति से दूर रहा…
एक पिता, जिसने संघर्षों के रास्ते सत्ता तक सफर तय किया…
अब वही बेटा बिहार की राजनीति में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रहा है।
कहते हैं शुरुआत में दुनिया किसी की क्षमता को नहीं पहचानती, लेकिन जब वक्त आता है तो वही इंसान अपनी पहचान खुद बना लेता है।