BNT Desk: पटना के मुसल्लमपुर हाट से शुरू हुआ दो कोचिंग संस्थानों का विवाद अब बिहार की सीमाओं को पार कर चुका है। यह मामला अब केवल दो शिक्षकों या संस्थानों के बीच की प्रतिस्पर्धा नहीं रह गया है, बल्कि यह बिहार की राजनीति, शिक्षा जगत और कानून व्यवस्था के लिए एक बड़ा मुद्दा बन गया है।
ज्ञान बिंदु GS अकादमी के संचालक रौशन आनंद और खान ग्लोबल स्टडीज के बीच का विवाद तब एक दुखद मोड़ पर आ पहुंचा, जब रौशन आनंद के छोटे भाई प्रिंस यादव की नेपाल के विराटनगर में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।
विवाद की शुरुआत और प्रिंस यादव की मौत
2 जून 2026 को पटना के कोचिंग हब मुसल्लमपुर हाट में दो बड़े संस्थानों के बीच शुरू हुआ वाकयुद्ध जल्द ही पुलिस केस और गंभीर आरोपों में बदल गया। इसी गहमागहमी के बीच, रौशन आनंद के भाई प्रिंस यादव का शव नेपाल के एक होटल में मिला।
इस घटना ने आग में घी का काम किया। जेल से जमानत पर बाहर आने के बाद रौशन आनंद ने सीधे तौर पर खान सर (फैजल खान) पर अपने भाई की हत्या का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि उन्हें ‘सनातनी’ होने की वजह से निशाना बनाया जा रहा है। इन आरोपों ने राज्य के शिक्षा जगत और आम लोगों के बीच बड़ी बहस छेड़ दी है।
शिक्षकों की अलग-अलग राय
इस विवाद ने बिहार के चर्चित शिक्षकों के बीच भी विभाजन पैदा कर दिया है। सोशल मीडिया और वीडियो बयानों के जरिए कई बड़े नाम इस पर अपनी प्रतिक्रिया दे रहे हैं:
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विपिन सर (मैथ्स मस्ती): उन्होंने वीडियो जारी कर बताया कि उन्होंने निजी तौर पर खान सर को विवाद सुलझाने का संदेश भेजा था, लेकिन कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली। उन्होंने जोर दिया कि कोई भी व्यक्ति बिना किसी गहरी साजिश या दबाव के ऐसा कदम नहीं उठाता।
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गुरु रहमान: ‘दरोगा गुरु’ के नाम से मशहूर रहमान ने इसे इतिहास की अनोखी घटना बताया, जहां कोचिंग के वर्चस्व की लड़ाई में किसी परिवार ने अपना सदस्य खो दिया। उन्होंने रौशन आनंद को पूर्ण समर्थन देने का आश्वासन दिया है।
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अलख पांडे (Physics Wallah): अलख पांडे ने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए संतुलन बनाने की कोशिश की। उन्होंने खान सर के शिक्षा को सुलभ बनाने के योगदान की सराहना की, लेकिन साथ ही स्पष्ट किया कि प्रिंस यादव की मौत की सच्चाई हर हाल में बाहर आनी चाहिए और दोषियों को बख्शा नहीं जाना चाहिए।
राजनीति के गलियारे में हलचल
कोचिंग विवाद का असर अब सत्ता और विपक्ष के बीच भी दिखने लगा है:
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तेजस्वी यादव की मांग: नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पूरे मामले की CBI जांच की मांग की है। उन्होंने राज्य पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए इसे गंभीर साजिश करार दिया है।
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चिराग पासवान का रुख: केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी निष्पक्ष जांच पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सत्य का सामने आना जरूरी है और किसी भी निर्दोष को फंसाया नहीं जाना चाहिए।
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सत्ता पक्ष की प्रतिक्रिया: जेडीयू के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय कुमार झा ने दुख जताते हुए कहा कि सरकार मामले की गंभीरता को समझ रही है और जांच रिपोर्ट आने के बाद ही दूध का दूध और पानी का पानी होगा।
अनसुलझे सवाल और भविष्य की चुनौती
फिलहाल, इस पूरे मामले में कई सवाल हवा में तैर रहे हैं:
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क्या प्रिंस यादव की मौत का सीधा संबंध कोचिंग विवाद से है?
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क्या रौशन आनंद द्वारा लगाए गए हत्या के आरोप सच हैं, या यह सिर्फ एक सियासी मोड़ है?
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कोचिंग संस्थानों के बीच वर्चस्व की यह लड़ाई क्या शिक्षा की गुणवत्ता को प्रभावित कर रही है?
इन सवालों के जवाब केवल विस्तृत पुलिसिया जांच और फोरेंसिक रिपोर्ट से ही मिल सकते हैं।
क्या खत्म होगा वर्चस्व का यह खेल?
पटना की कोचिंग इंडस्ट्री, जिसे बिहार का ‘शिक्षा मंदिर’ माना जाता है, आज कटघरे में है। शिक्षा जगत की इस कड़वाहट ने न केवल छात्रों के भविष्य पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि संस्थान चलाने वालों की नैतिकता पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है। अब सभी की निगाहें जांच एजेंसियों पर टिकी हैं। बिहार की जनता यह देखना चाहती है कि क्या न्याय की जीत होगी या यह मामला सिर्फ एक और राजनीतिक विवाद बनकर रह जाएगा।