NEET UG 2026: युवाओं के सपनों पर सिस्टम का प्रहार; दर्जनों पेपर लीक और लाखों टूटते अरमान, आखिर कब सुधरेगा बिहार?

BiharNewsAuthor
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BNT Desk: क्या आप सरकारी परीक्षा की तैयारी कर रहे हैं? यकीनन, एक अदद नौकरी के लिए आप अपना सुख-चैन, त्योहार और मोबाइल तक छोड़ चुके होंगे। लेकिन जरा रुकिए! जी-तोड़ मेहनत करने से पहले यह कड़वी हकीकत जान लीजिए कि आपकी तैयारी ‘पेपर लीक’ की भेंट भी चढ़ सकती है। एक रिपोर्ट के मुताबिक, देश में अब तक लगभग 65% परीक्षाएं किसी न किसी वजह से रद्द हो चुकी हैं।

 2014 से अब तक का काला सफर

साल 2014 से पेपर लीक का जो सिलसिला शुरू हुआ, वह थमने का नाम नहीं ले रहा है। NEET 2026, यूपीटीईटी 2021, रीट, एसएससी, रेलवे और बीपीएससी—ये सिर्फ परीक्षाओं के नाम नहीं हैं, बल्कि उन लाखों युवाओं की उम्मीदें हैं जो हर बार लीक की खबरों के साथ चकनाचूर हो जाती हैं। आज छात्र पढ़ाई से ज्यादा इस बात से डरता है कि कहीं उसका प्रश्नपत्र व्हाट्सएप या टेलीग्राम पर नीलाम न हो जाए।

राजद नेता की गिरफ्तारी से मचा हड़कंप

नीट पेपर लीक मामले की आंच अब सियासी गलियारों तक पहुँच गई है। दिल्ली पुलिस ने संतोष कुमार जायसवाल को गिरफ्तार किया है, जो राजद के पूर्व राष्ट्रीय महासचिव रह चुके हैं।

  • लग्जरियस लाइफ का शौक: जांच में सामने आया कि संतोष और उसका गिरोह गाजियाबाद से मेडिकल कॉलेजों में दाखिला दिलाने का काला धंधा चलाता था।

  • मोटी वसूली: अभिभावकों से लाखों रुपये वसूल कर पेपर लीक और फर्जी नामांकन का खेल खेला जा रहा था।

राजस्थान का ‘बीवाल परिवार’ और सियासी आरोप-प्रत्यारोप

सिर्फ बिहार ही नहीं, राजस्थान में भी नीट पेपर लीक के तार एक ही परिवार से जुड़े मिले हैं। दिनेश बीवाल और उसके परिवार के तीन सदस्यों की गिरफ्तारी हुई है। ताज्जुब की बात यह है कि इसी परिवार के 5 बच्चे पहले ही नीट पास कर चुके हैं, जो अब जांच के घेरे में हैं।

  • सियासी रोटी: बिहार में बीजेपी राजद पर हमलावर है, तो राजस्थान में बीजेपी नेताओं की संलिप्तता का दावा कर रही है। हकीकत यह है कि सत्ता किसी भी दल की हो, पिसता सिर्फ आम छात्र है।

क्यों नहीं रुक रहा ‘गोरखधंधा’?

एक्सपर्ट्स की मानें तो पेपर लीक अब करोड़ों का संगठित अपराध बन चुका है। इसके पीछे तीन मुख्य कारण हैं:

  1. सरकारी नौकरी की अंधी दौड़: एक नौकरी से पूरी जिंदगी बदलने की उम्मीद भ्रष्टाचार को बढ़ावा देती है।

  2. सिस्टम में बैठे ‘दीमक’: प्रिंटिंग प्रेस से लेकर कोचिंग सेंटरों और सरकारी दफ्तरों तक एक पूरा नेटवर्क तैयार है जो चंद रुपयों के लिए सवालों को बेच देता है।

  3. कड़े कानून का अभाव: जब तक अपराधियों के मन में खौफ पैदा करने वाला कानून नहीं बनेगा, तब तक युवाओं के भविष्य का मजाक बनता रहेगा।

सरकार से चुभते सवाल

एक छात्र जो दिल्ली, कोटा या पटना के छोटे से कमरे में खुद को कैद कर लेता है, जिसके मां-बाप ने खेत गिरवी रखकर या गहने बेचकर उसे पढ़ने भेजा है, उसके साथ यह मजाक क्यों? क्या ‘मेक इन इंडिया’ की बात करने वाली सरकार देख रही है कि देश का युवा ‘मेड फॉर मजबूरी’ बनता जा रहा है?

अब वक्त आ गया है कि सरकारें राजनीति से ऊपर उठकर इस कैंसर का इलाज करें। सख्त कदम उठाने की जरूरत है ताकि किसी भी युवा की मेहनत पेपर लीक की आग में न जले।

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