BNT Desk: बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और राजद नेता तेजस्वी यादव गुरुवार को पटना के सिविल कोर्ट पहुंचे। वे यहाँ ‘एमपी-एमएलए कोर्ट’ में दर्ज एक पुराने धरना-प्रदर्शन मामले में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने आए थे। कोर्ट ने मामले की सुनवाई के बाद तेजस्वी यादव को तत्काल जमानत (Bail) दे दी है। इस दौरान कोर्ट परिसर में राजद समर्थकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जिसे देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला कोरोना काल (Pandemic) के दौरान का है। उस समय बिहार में विपक्ष ने विभिन्न जन समस्याओं, स्वास्थ्य सेवाओं और मजदूरों की बदहाली को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला था।
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आंदोलन की वजह: लॉकडाउन के दौरान दूसरे राज्यों से लौट रहे मजदूरों की समस्याओं और राज्य की खराब स्वास्थ्य व्यवस्था के खिलाफ तेजस्वी यादव के नेतृत्व में बड़ा धरना-प्रदर्शन हुआ था।
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प्रशासनिक कार्रवाई: इसी प्रदर्शन के दौरान नियमों के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए तेजस्वी यादव और राजद के कई अन्य वरिष्ठ नेताओं पर एफआईआर (FIR) दर्ज की गई थी।
“लोकतंत्र में जनता की आवाज उठाना हमारा काम”
जमानत मिलने के बाद कोर्ट परिसर से बाहर निकलते हुए तेजस्वी यादव ने मीडिया से बातचीत की। उन्होंने कहा कि विपक्ष का धर्म ही जनता के दुख-दर्द को उठाना है। तेजस्वी ने कहा, “जनता की समस्याओं को लेकर हम और हमारे साथियों ने आवाज उठाई थी। इसी कारण प्रशासन ने हम पर मुकदमा किया। लोकतंत्र में अगर हम जनता के मुद्दे नहीं उठाएंगे, तो कौन उठाएगा?”
सरकार को सीधी चेतावनी: ‘पीछे नहीं हटेंगे’
तेजस्वी यादव ने साफ किया कि वे कानूनी कार्रवाइयों से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने सरकार को घेरते हुए कहा:
“सरकार को जब भी घेरना होगा, हम इसी तरह आंदोलन करेंगे। जनता की आवाज उठाना हमारा कर्तव्य है और हम इससे कभी पीछे नहीं हटेंगे। भविष्य में भी अगर जरूरत पड़ी, तो हम सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन जारी रखेंगे।”
कोरोना काल की यादें और विपक्ष की भूमिका
तेजस्वी ने उन कठिन दिनों का जिक्र किया जब हजारों मजदूर पैदल चलकर बिहार लौट रहे थे। उन्होंने कहा कि उस समय परिवहन की व्यवस्था नहीं थी और लोग दाने-दाने को मोहताज थे। ऐसे संवेदनशील समय में सरकार को आईना दिखाना विपक्ष की जिम्मेदारी थी। राजद नेताओं का आरोप है कि सरकार ने राजनीतिक द्वेष के कारण उन पर मुकदमे लादे, जबकि वे केवल लोकतांत्रिक तरीके से अपना विरोध दर्ज करा रहे थे।
अदालती फैसले और समर्थकों का उत्साह
तेजस्वी यादव ने न्यायपालिका पर अटूट विश्वास जताते हुए कहा कि उन्हें उम्मीद थी कि सच की जीत होगी। कोर्ट से जमानत मिलने की खबर जैसे ही बाहर आई, परिसर के बाहर जमा समर्थकों ने नारेबाजी शुरू कर दी। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि तेजस्वी यादव का यह कड़ा रुख संकेत दे रहा है कि आने वाले दिनों में बेरोजगारी, महंगाई और कानून-व्यवस्था के मुद्दे पर बिहार में आंदोलन का दौर और तेज होने वाला है।