पटना: TRE-4 प्रदर्शन के दौरान राष्ट्रीय ध्वज का अपमान; तिरंगे से चेहरा पोंछते और पैर से हटाते दिखा पुलिस जवान

BiharNewsAuthor
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BNT Desk: राजधानी पटना में शुक्रवार को शिक्षक भर्ती (TRE-4) के नोटिफिकेशन की मांग को लेकर हजारों अभ्यर्थियों ने प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन पहले ही लाठीचार्ज और 5000 अभ्यर्थियों पर FIR की वजह से चर्चा में है, लेकिन अब इस आंदोलन से जुड़ा एक ऐसा वीडियो सामने आया है जिसने पूरे प्रदेश को शर्मसार कर दिया है। सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे इस वीडियो में बिहार पुलिस के एक जवान द्वारा राष्ट्रीय ध्वज ‘तिरंगे’ के प्रति बेहद अपमानजनक व्यवहार करते देखा जा रहा है। इस घटना के बाद लोगों का गुस्सा फूट पड़ा है और आरोपी जवान पर सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है।

क्या है वायरल वीडियो का सच?

वायरल वीडियो प्रदर्शन के दौरान किसी सड़क का बताया जा रहा है, जहाँ पुलिस और अभ्यर्थी आमने-सामने थे। वीडियो में कैद हुए दृश्य किसी भी देशभक्त को विचलित कर सकते हैं:

  • तिरंगे से चेहरा पोंछना: वीडियो में स्पष्ट दिख रहा है कि भारी उमस और गर्मी के बीच ड्यूटी पर तैनात एक पुलिस जवान के हाथ में तिरंगा आता है। वह गरिमा बनाए रखने के बजाय उस तिरंगे से अपना पसीना और चेहरा पोंछने लगता है।

  • तिरंगे को नीचे फेंकना: चेहरा पोंछने के बाद जवान ने तिरंगे को सम्मानजनक तरीके से रखने के बजाय उसे सड़क पर नीचे फेंक दिया।

  • डंडे और पैरों का अपमान: तिरंगा सड़क पर गिरने के बाद वही जवान अपने हाथ में लिए डंडे (लाठी) से तिरंगे को कचरे की तरह सड़क के किनारे हटाने लगा। इतना ही नहीं, वीडियो के अन्य हिस्सों में राष्ट्रीय ध्वज कई पुलिसकर्मियों के पैरों के नीचे भी आता हुआ नजर आ रहा है।

सोशल मीडिया पर आक्रोश की लहर

जैसे ही यह वीडियो इंटरनेट पर अपलोड हुआ, यह आग की तरह फैल गया। लोग इस वीडियो को शेयर करते हुए बिहार पुलिस और राज्य सरकार को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं।

  • नेटीजन्स की प्रतिक्रिया: सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि जो पुलिस बल अनुशासन और तिरंगे की रक्षा की शपथ लेता है, उसका यह व्यवहार कतई बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

  • कार्यवाही की मांग: ट्विटर (X) और फेसबुक पर लोग बिहार के डीजीपी और मुख्यमंत्री से मांग कर रहे हैं कि वीडियो की जांच कर दोषी जवान को तुरंत सेवा से बर्खास्त किया जाए। लोगों का तर्क है कि यदि कोई आम नागरिक ऐसा करता तो अब तक वह जेल में होता।

अभ्यर्थियों और पुलिस के बीच तनाव का माहौल

यह घटना उस समय हुई जब पटना का डाकबंगला और जेपी गोलंबर इलाका पहले से ही रणक्षेत्र बना हुआ था। TRE-4 के अभ्यर्थी सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे और पुलिस उन्हें खदेड़ने की कोशिश कर रही थी। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि तिरंगा उनके हाथ में था जिसे पुलिस ने छीन लिया और उसके बाद यह शर्मनाक हरकत की गई।

एक प्रदर्शनकारी छात्र ने कहा, “हम तिरंगे को अपनी ढाल बनाकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन पुलिस ने न केवल हम पर लाठियां चलाईं, बल्कि हमारे देश की आन-बान-शान तिरंगे का भी अपमान किया।”

राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम

भारत में राष्ट्रीय ध्वज का अपमान एक गंभीर दंडनीय अपराध है। ‘भारतीय झंडा संहिता’ और ‘राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971’ के तहत तिरंगे को जानबूझकर जमीन पर फेंकना, उससे शरीर पोंछना या उसे पैरों से कुचलना अपराध की श्रेणी में आता है। इस कानून के तहत दोषी को 3 साल तक की जेल या जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं। पुलिस जवान का यह कृत्य सीधे तौर पर इन नियमों का उल्लंघन प्रतीत होता है।

पुलिस और प्रशासन का पक्ष

वीडियो वायरल होने के बाद पटना पुलिस के आला अधिकारियों में खलबली मची हुई है। हालांकि अभी तक आधिकारिक तौर पर किसी जवान का नाम सामने नहीं आया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार विभाग ने वीडियो का संज्ञान लिया है।

  • जांच के आदेश: संभावना है कि मामले की आंतरिक जांच कराई जाएगी ताकि यह स्पष्ट हो सके कि वीडियो में दिख रहा व्यक्ति किस यूनिट का है और क्या वीडियो के साथ कोई छेड़छाड़ तो नहीं की गई है।

  • कड़ी कार्रवाई का भरोसा: प्रशासनिक गलियारों में यह चर्चा है कि यदि घटना सत्य पाई जाती है, तो जवान पर बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई तय है क्योंकि यह मामला सीधे तौर पर राष्ट्रीय सम्मान से जुड़ा है।

सम्मान सर्वोपरि है

विरोध प्रदर्शन लोकतंत्र का हिस्सा है और कानून व्यवस्था बनाए रखना पुलिस का काम। लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में राष्ट्रीय प्रतीकों का अपमान किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। पटना की सड़कों पर जो हुआ, उसने खाकी की छवि को नुकसान पहुँचाया है। अब सभी की नजरें सरकार और पुलिस प्रशासन पर टिकी हैं कि वे इस ‘शर्मनाक व्यवहार’ पर क्या उदाहरण पेश करते हैं। तिरंगा हमारी पहचान है, और इसका सम्मान बनाए रखना हर नागरिक और सरकारी कर्मचारी का संवैधानिक कर्तव्य है।

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