बिहार: पंचायत सचिवों की जंग; 21वें दिन भी हड़ताल जारी, 4 मई को पटना में ‘महा-आंदोलन’ की चेतावनी

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BNT Desk: बिहार की ग्रामीण प्रशासनिक व्यवस्था इन दिनों पूरी तरह चरमरा गई है। राज्य के हजारों पंचायत सचिव अपनी मांगों को लेकर आर-पार की लड़ाई के मूड में हैं। बिहार राज्य पंचायत सचिव संघ के आह्वान पर शुरू हुई यह अनिश्चितकालीन हड़ताल आज मंगलवार को 21वें दिन में प्रवेश कर गई है। काम का बहिष्कार कर रहे सचिवों ने अब सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए राजधानी पटना कूच करने का मन बना लिया है।

4 मई को पटना के गर्दनीबाग में ‘महाजुटाान’

हड़ताल के लंबा खिंचने और सरकार की ओर से कोई ठोस पहल न होने के कारण संघ ने आंदोलन को उग्र करने का फैसला किया है। संघ के अध्यक्ष बिरेन्द्र कुमार ने एक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर घोषणा की है कि आगामी 4 मई 2026 को राज्यभर के पंचायत सचिव पटना के गर्दनीबाग में विशाल धरना-प्रदर्शन करेंगे। संघ का कहना है कि यह प्रदर्शन सरकार की नींद खोलने के लिए किया जा रहा है।

पूर्व समझौते पर वादाखिलाफी का आरोप

संघ के अध्यक्ष बिरेन्द्र कुमार के मुताबिक, यह हड़ताल बेवजह नहीं है। उन्होंने कहा कि 15 मई 2025 को राज्य सरकार और संघ के बीच एक लिखित समझौता हुआ था। सरकार ने तब मांगों को पूरा करने का आश्वासन दिया था, लेकिन एक साल बीत जाने के बाद भी उस समझौते का पूर्ण अनुपालन नहीं किया गया है। इसी ‘वादाखिलाफी’ से नाराज होकर पंचायत सचिवों ने 8 अप्रैल 2026 से कलमबंद हड़ताल शुरू की थी।

क्या हैं पंचायत सचिवों की 5 सूत्री मांगें?

हड़ताली सचिवों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी निम्नलिखित पांच मांगों पर आधिकारिक मुहर नहीं लगती, वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे:

  1. जिला स्थानांतरण: वर्ष 2005 के पंचायत सचिवों के लिए एकमुश्त जिला स्थानांतरण का आदेश तुरंत जारी किया जाए।

  2. वेतनमान और योग्यता: शैक्षणिक योग्यता को ‘स्नातक’ अनिवार्य करते हुए ₹4200 का ग्रेड पे लागू किया जाए।

  3. पदनाम में बदलाव: पंचायत सचिव के पदनाम को बदलकर “ग्राम पंचायत राज पदाधिकारी” किया जाए।

  4. परिवहन भत्ता: कार्य के दौरान होने वाली भागदौड़ के लिए न्यूनतम ₹2000 परिवहन भत्ता स्वीकृत हो।

  5. पदोन्नति (Promotion): बीपीआरओ (BPRO) पद पर पदोन्नति के लिए वर्तमान 55 वर्ष की अधिकतम आयु सीमा को पूरी तरह समाप्त किया जाए।

प्रशासनिक प्रताड़ना और उपेक्षा का इल्जाम

पंचायत सचिवों का आरोप है कि पंचायती राज विभाग उन्हें केवल प्रताड़ित कर रहा है। संघ के नेताओं का कहना है कि सरकार की उपेक्षा के कारण ही वे सड़क पर उतरने को मजबूर हुए हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि 4 मई को होने वाले प्रदर्शन के दौरान यदि कोई जनसमस्या उत्पन्न होती है या प्रशासनिक कामकाज में दिक्कत आती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार और संबंधित विभाग की होगी।

ग्रामीण क्षेत्रों में कामकाज ठप

पंचायत सचिवों की 21 दिनों की इस हड़ताल का सीधा असर गांवों के विकास कार्यों पर पड़ रहा है। जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, आवासीय प्रमाण पत्र, वृद्धावस्था पेंशन और मनरेगा जैसे जरूरी काम पूरी तरह रुके हुए हैं। ग्रामीण जनता ब्लॉक और पंचायत कार्यालयों के चक्कर काट रही है, लेकिन समाधान नहीं मिल रहा है।

सरकार से अपील

संघ ने मुख्यमंत्री और पंचायती राज विभाग से अपील की है कि वह मामले की गंभीरता को समझे और संवेदनशीलता दिखाते हुए पूर्व में हुए समझौते को लागू करे। उनका कहना है कि वे भी काम पर लौटना चाहते हैं, लेकिन स्वाभिमान और हक की लड़ाई से पीछे नहीं हटेंगे। अब सबकी नजरें 4 मई को होने वाले पटना के विशाल प्रदर्शन पर टिकी हैं, जो इस आंदोलन की अगली दिशा तय करेगा।

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